Sunday, September 26, 2021
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हमें किसी ने छेड़ा तो होगी सुताई: ‘बक्कल उतारने’ की बात कहने वाले राकेश टिकैत ने फिर दी धमकी

राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि इस आंदोलन को तोड़ने के लिए नई-नई चाल चली जा रही है। कोविड-19 भी वही चाल है। कोविड-19 का किसान आंदोलन से क्या मतलब। जिसे दिक्कत होगी वह अस्पताल में जाकर इलाज करवा लेगा।

पिछले 24 घंटे में पूरे देश से 3.32 लाख कोरोना के नए मामले सामने आए हैं। हर राज्य की सरकार कोरोना से निपटने के लिए सख्त पाबंदियाँ लगा रही है। इस बीच भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रवक्ता राकेश टिकैत की आवाजाही जारी है। गाजीपुर बॉर्डर पर इफ्तार पार्टी के बाद अब वे हिसार पहुँचकर धमकी दे रहे हैं कि किसी ने उन्हें छेड़ा तो उसकी सुताई होगी।

बार एसोसिएशन के धरने को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने शुक्रवार (अप्रैल23, 2021) को हरियाणा में कहा कि अगर हमें छेड़ने का प्रयास किया गया तो हम भी सुताई करेंगे। उनके मुताबिक सुताई शब्द का मतलब उनके गाँव के लोग काफी अच्छे से समझते हैं।

कोविड-19 सिर्फ़ एक चाल

हरि भूमि की रिपोर्ट के मुताबिक राकेश टिकैत ने आरोप लगाया कि इस आंदोलन को तोड़ने के लिए नई-नई चाल चली जा रही है। कोविड-19 भी वही चाल है। कोविड-19 का किसान आंदोलन से क्या मतलब। जिसे दिक्कत होगी वह अस्पताल में जाकर इलाज करवा लेगा।

टिकैत ने कहा, “जहाँ हम धरना दे रहे हैं वह हमारा घर है, हमारी कॉलोनी है। हम इसे किसी भी सूरत में माँगे पूरी नहीं होने तक खाली नहीं करेंगे… यह शाहीन बाग नहीं है जो डरा-धमकाकर खाली करवा लोगे। जहाँ तक क्लीन स्वीप अभियान चलाने की बात चल रही है तो मैं बता देना चाहता हूँ कि सरकार ने अगर ऐसी कोई गलती की तो पूरे देश में सुताई अभियान चलेगा। हरियाणा में तो पहले से ही यह अभियान चल रहा है।”

टिकैत ने हिसार कोर्ट परिसर में वकीलों द्वारा किसानों के समर्थन में दिए जा रहे धरने को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि देश बेचने की कोशिश हो रही है। लेकिन वह ऐसा नहीं होने देंगे। उनका आंदोलन देश को बचाने का आंदोलन है। पहले देश को बचाने के लिए बुजुर्गों ने लड़ाई लड़ी, लेकिन अब का आंदोलन साइलेंट है।

टिकैत ने कहा कि कृषि कानून के बाद बिजली और दूध एग्रीमेंट को लेकर सरकार बिल आएगी। धीरे-धीरे देश के विश्वविद्यालयों को भी ठेके पर दे दिया जाएगा। इसके बाद जो शिक्षक सवा लाख ले रहा है उसे 30,000 में काम करना होगा। टिकैत के मुताबिक, केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ समाज के सभी वर्गों को मिलकर आंदोलन में शामिल होना होगा।

टीका लगवाएँगे, टेस्ट नहीं कराएँगे

किसान नेता ने कोरोना वैक्सीन पर कहा कि बॉर्डर पर बैठे किसान इंजेक्शन लेंगे, लेकिन कोरोना टेस्ट नहीं कराएँगे। इंजेक्शन भी तब लगवाएँगे, जब आधे इंजेक्शन पुलिसकर्मी लगवाएँगे। उन्हें सरकार पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उन्होंने कोरोना की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए पूछा अगर कोरोना इतना खतरनाक है तो कुछ लोग बंगाल में रैली क्यों कर रहे हैं। कोरोना को एक तरह का बुखार ही मान सकते हैं। लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिल रही तो वहाँ की सरकार को इस्तीफा देना चाहिए।

बक्कल उतारने की दे चुके हैं धमकी

बता दें कि कोरोना महामारी के बीच किसान आंदोलन खत्म न करने की जिद्द पर अड़े किसान नेता राकेश टिकैत इससे पहले बक्कल उतारने वाले बयान दे चुके हैं। 26 जनवरी को जब उन्होंने रैली निकालने से रोने के लिए प्रशासन कोशिश कर रहा था तो उन्होंने कहा था कि अगर ट्रैक्टर को रोका गया तो उसका इलाज होगा। अगर किसी ने रोका तो उसकी बक्कल उतार दी जाएगी। 

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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