उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से 16 वर्षीय दलित नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म और बाद में आत्महत्या का गंभीर मामला सामने आया है। मामले में पुलिस ने तीनों नाबालिग आरोपितों के खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो और SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
इस मामले में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़िता को न्याय नहीं मिला, इसलिए उसने फाँसी लगाई और भाजपा के राज में महिलाओं की सुरक्षा नहीं है।
A 17-year-old Dalit girl’s death in Chitrakoot has triggered political reactions and competing narratives. Here are the verified facts on record:
— Facts (@BefittingFacts) April 15, 2026
Claim: Police ignored the case and denied justice.
Fact: On 6 March, the victim’s family submitted a written application to the… pic.twitter.com/kjaUGkql1a
अखिलेश के बयान में 6 मार्च 2026 को परिवार द्वारा पुलिस को दी गई उस लिखित अर्जी का जिक्र नहीं था, जिसमें उन्होंने खुद कार्रवाई न करने की बात कही थी। जाँच में सामने आया कि पहले परिवार ने खुद लिखित में केस दर्ज न करने की बात कही थी, लेकिन अखिलेश ने बिना पूरी जानकारी इस मामले में भ्रम पैदा करने की कोशिश की। उन्होंने बड़ी चालाकी से मामले को अगड़ा बनाम पिछड़ा, सवर्ण बनाव दलित बनाने की कोशिश की।
क्या है पूरा मामला? होली के दिन छेड़छाड़, 40 दिन बाद आत्महत्या
पीड़िता के पिता के अनुसार, 4 मार्च 2026 को होली के दिन उनकी बेटी कुएँ पर पानी भरने गई थी। रास्ते में गाँव के तीन लड़कों ने उसे पकड़ लिया। परिवार का आरोप है कि लड़कों ने उसे बंधक बना लिया, जबरन उसे रंग लगाया और खेत में ले जाकर मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
जब बेटी काफी समय तक घर नहीं लौटी तो उसका छोटा भाई ढूँढने के लिए खेत की तरफ गया तो बेटे को आवाज सुनाई दी, जिसके बाद उसने मंदिर पर चढ़कर देखा तो 3 लड़के बेटी को बैठाए थे। बेटे को देखकर वे वहाँ से भाग गए। 6 मार्च 2026 को परिवार थाने पहुँचा, जहाँ पुलिस ने दोनों पक्षों को बुलाकर समझौता कराया।
पुलिस डायरी में दर्ज है कि उस समय परिवार ने लिखित रूप से मुकदमा न करने की बात कही थी। करीब 40 दिन बाद, 14 अप्रैल 2026 की रात, जब परिवार के अन्य सदस्य खेत पर काम करने गए थे, लड़की ने घर में फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। चित्रकूट SP अरुण कुमार सिंह के अनुसार, युवती की माँ ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
इसमें आरोपितों पर जबरन रंग लगाने का आरोप लगाया गया था। मामले में माता-पिता ने लिखित रूप से कार्रवाई न करने की बात कही थी। यह मामला जीडी में दर्ज किया गया था।
मामले के खुलासे के बाद पीड़िता की माँ ने लगाए आरोप, अफेयर एंगल की भी जाँच कर रही पुलिस
मामले में एक्शन और कई खुलासों के बाद दैनिक भास्कर से पीड़िता की माँ ने बात की है। उन्होने पुलिस पर भी कई आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस वालों ने कहा कि उनकी लड़की को कोई चोट नहीं है, कपड़े भी नहीं फटे है, तो कैसे मानें? उन्होंने आगे कहा कि ऐसे में इन सब आरोपों से उसकी शादी पर भी असर पड़ेगा।
पीड़िता की माँ का कहना है कि पुलिसवालों ने ये सब समझाते हुए उनसे पूछा कि वो केस लिखवाना चाहती हैं या नहीं तो उन्होंने मना कर दिया कि अगर बात बेटियों की शादी की है तो केस नहीं लिखवाना। माँ का आरोप है कि पुलिस ने आरोपितों को हिरासत में लिया, लेकिन फिर पैसे लेकर दो दिन बाद उन्हें छोड़ दिया गया।
परिवार ने बताया है कि आरोपित ब्राह्मण हैं और उनमें एक प्रधान का भतीजा है। पुलिस को छात्रा की एक डायरी मिली है, जिसमें उसने भावनात्मक और प्रेम से जुड़ी बातें लिखी थीं। इसके आधार पर पहाड़ी थाना पुलिस यह भी जाँच कर रही है कि मामला किसी निजी संबंध से जुड़ा था या नहीं।
चित्रकूट के पहाड़ी थाना प्रभारी ने ऑपइंडिया से क्या-क्या कहा?
इस मामले में ऑपइंडिया ने पहाड़ी थाना के प्रभारी प्रवीण सिंह से बातचीत की। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि होली के दिन रंग लगाने को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद परिवार दो बार थाने पहुँचा था। हमने केस दर्ज कराने के लिए काउंसिलिंग भी कराई, लेकिन तब गैंगरेप का कोई जिक्र नहीं था। इस बारे में पीड़िता- पीड़िता के पिता और पीड़िता की माता का वीडियो टेस्टिमनी और उनकी शिकायत की दोनों- कॉपी जीडी में दर्ज है।
थाना प्रभारी ने कहा कि घटनाक्रम के 15 दिन के बाद मैंने खुद पीड़ित परिवार से फॉलोअप के लिए संपर्क किया था। तब भी पीड़ित परिवार ने किसी समस्या का कोई जिक्र नहीं किया। थाना प्रभारी ने कहा कि कार्रवाई न करने वाला दावा गलत है। हमने हर संभव कार्रवाई की है।
पीड़िता की बहन ने क्या कहा?
ऑपइंडिया ने पीड़िता की बहन से बात की। पीड़िता की बहन ने कहा कि फिलहाल पुलिस ने किसी भी आरोपित को नहीं पकड़ा है। पुलिस आती है और हमसे ही रोज पूछ ताछ करती है। मैं चाहती हूँ कि उन तीनों को भी फाँसी की सजा हो, जैसे मेरी बहन फाँसी पर लटकी मिली। फोन पर बात करते हुए वो भावुक हो जाती है।


