‘विश्व में सबसे ज्यादा सुखी मुसलमान भारत में मिलेगा, परसियन की पूजा-मूल धर्म केवल यहीं सुरक्षित, क्योंकि हम हिंदू हैं’

भारत की विविधता की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा देश एक सूत्र से बँधा हुआ है। यहाँ के लोग विविध संस्कृति, भाषा और भौगोलिक स्थानों के बावजूद खुद को भारतीय मानते हैं। इस अद्वितीय अहसास के कारण मुस्लिम, पारसी या अन्य मजहबों में विश्वास रखने वाले लोग खुद को यहाँ सुरक्षित समझते हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार (अक्टूबर 12, 2019) को भुवनेश्वर में बुद्धिजीवियों की एक सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि संघ को किसी से नफरत नहीं है। आरएसएस का उद्देश्य भारत में परिवर्तन के लिए सभी समुदायों को संगठित करने का है, न कि सिर्फ हिंदू समुदाय को। भागवत ने कहा, “राष्ट्रवाद लोगों को डराता है क्योंकि वह तुरंत इसे हिटलर और मुसोलिनी से जोड़ देते हैं। लेकिन भारत में राष्ट्रवाद ऐसा नहीं है क्योंकि यह राष्ट्र अपनी सामान्य संस्कृति से बना है।”

भारत की विविधता की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि पूरा देश एक सूत्र से बँधा हुआ है। यहाँ के लोग विविध संस्कृति, भाषा और भौगोलिक स्थानों के बावजूद खुद को भारतीय मानते हैं। इस अद्वितीय अहसास के कारण मुस्लिम, पारसी या अन्य मजहबों में विश्वास रखने वाले लोग खुद को यहाँ सुरक्षित समझते हैं। उन्होंने कहा, “यहूदी मारे-मारे फिरते थे अकेला भारत है, जहाँ उनको आश्रय मिला। परसियन (पारसी) की पूजा और मूल धर्म केवल भारत में सुरक्षित हैं। विश्व के सर्वाधिक सुखी मुसलमान भारत में मिलेंगे। ये क्यों है? क्योंकि हम हिंदू हैं।”

संघ प्रमुख का कहना है कि समाज में बदलाव की दिशा में सही तरीका यह है कि ऐसे उत्कृष्ट इंसान तैयार किए जाएँ, जो समाज को बदलने के साथ ही देश की कायापलट में अहम भूमिका निभा सकें, क्योंकि 130 करोड़ लोगों को एक साथ बदलना मुमकिन नहीं है। भागवत ने कहा कि समाज में बदलाव लाना जरूरी है ताकि देश का भाग्य बदले। इसके लिए ऐसे लोगों को तैयार करना होगा, जिनका चरित्र साफ सुथरा हो, जो प्रत्येक सड़क, गाँव और शहर में नेतृत्व रखने की क्षमता रखें।

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आगे उन्होंने कहा, “हमारी किसी के प्रति कोई घृणा नहीं है। एक बेहतर समाज बनाने के लिए हमें एक साथ आगे बढ़ना चाहिए जो देश में बदलाव ला सकें और उसे विकास में मदद दे सकें। यह हमारी इच्छा है कि आरएसएस ठप्पा हट जाए और आरएसएस और समाज मिलकर एक समूह के तौर पर काम करे और इसका श्रेय भी समाज को ही दिया जाए। हम कोई श्रेय नहीं लेना चाहते।”

उल्लेखनीय है कि संघ प्रमुख शनिवार (अक्टूबर 12, 2019) को नौ दिन के दौरे पर ओडिशा पहुँचे। यहाँ वो अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की पहली बैठक में शिरकत करेंगे। इस दौरान उनके साथ भैयाजी जोशी भी होंगे। उन्होंने बताया कि आरएसएस कार्यकारिणी समिति की बैठक एक निजी विश्वविद्यालय में 16 से 18 अक्टूबर तक होगी।

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