Homeदेश-समाजराजनाथ सिंह का समर्थन करने पर मौलानाओं को मिली जान से मारने की धमकी

राजनाथ सिंह का समर्थन करने पर मौलानाओं को मिली जान से मारने की धमकी

"तुम्हें पिछले जुमे को भी मारने की कोशिश की थी लेकिन सही मौक़ा नहीं मिला। इस बार कोई नहीं बचेगा।"

लखनऊ संसदीय सीट पर भाजपा उम्मीदवार राजनाथ सिंह का समर्थन करने वाले शियाओं के धर्मगुरू मौलाना कल्बे जव्वाद और शिया सूफी संघ के मौलाना हसनैन बकाई को जान से मारने की धमकी मिली है। इस बारे में कोतवाली पुलिस को शिकायत कर दी गई है। दोनों उलेमाओं के मुताबिक, उन्हें इंटरनेट कॉलिंग के जरिए जान से मारने की धमकी दी गई है।

जनसत्ता में प्रकाशित खबर के मुताबिक, मौलाना कल्बे जव्वाद ने बताया कि रविवार (मई 19, 2019) को उन्हें रात 8 बजे एक फोन कॉल आया। फोन करने वाले ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। जवाब में मौलाना ने भी ऐसी धमकियों से नहीं डरने की बात कही।

वहीं मौलाना सैयद हसनैन बकाई के मुताबिक राजनाथ सिंह को समर्थन करने के कारण ही उनके पास इस प्रकार का कॉल आया और उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी गई। मौलाना बकाई के अनुसार, फोन करने वाले शख़्स ने अपनी धमकी में उनसे कहा, “तुम्हें पिछले जुमे को भी मारने की कोशिश की थी लेकिन सही मौक़ा नहीं मिला। इस बार कोई नहीं बचेगा।

गौरतलब है कि इससे पहले राजधानी के एक होटल में 4 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी। इस कॉन्फ्रेंस में मौलाना कल्बे जव्वाद ने खुलकर राजनाथ सिंह को समर्थन देने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वह एक अच्छे उम्मीदवार का समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, राजनाथ सिंह एक अच्छे इंसान हैं और उनके साथ पुराने रिश्ते होने के कारण वह निश्चित ही राजनाथ के साथ हैं। राजनाथ सिंह के ख़िलाफ़ कॉन्ग्रेस से आचार्य प्रमोद कृष्णन और सपा-बसपा महागठबंधन से शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा मैदान में थीं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

महरंग बलोच पर मलाला का मौन… अफगान महिलाओं के लिए मंच-मंच भाषण, लेकिन पाकिस्तानी फौज के बलोचों के दमन पर नोबेल विजेता खामोश क्यों?

दुनिया के कोने-कोने से मानवाधिकार का झंडा उठाने वाली नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला पाकिस्तान में महरंग को उम्रकैद मिलने पर मौन बैठी है।

कभी ग्रीस से लेकर गंगा तक थी दहाड़, अब सिर्फ गिर तक सीमित क्यों हैं एशियाई शेर?: पढ़ें विलुप्ति के कगार से जंगलों पर...

फिर आया 2025 का आँकड़ा। गुजरात सरकार द्वारा घोषित की गई हालिया गणना के अनुसार, राज्य में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर 891 तक पहुँच गई है।
- विज्ञापन -