Monday, June 17, 2024
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सिलक्यारा सुरंग के भीतर फँसे सभी मजदूर स्वस्थ, पहली बार सामने आई तस्वीरें: डॉक्टर वाले इंडोस्कोपिक कैमरे से हुआ लाइव सम्पर्क

इस सुंरग के भीतर इंडोस्कोपिक फ्लेक्सी कैमरा भेजा गया है। इसे एक रबर के पाइप के मुहाने पर लगाया गया है, जिससे पाइप के जरिए इसे अन्दर को धकेला जा सके। सामने आई तस्वीरों में सभी मजदूर स्वस्थ दिख रहे हैं।

उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग के भीतर फँसे मजदूरों के पास कैमरा पहुँच गया है। सुरंग के भीतर मलबे के बीच फँसे 41 मजदूरों की पहली तस्वीरें सामने आई हैं। सामने आई तस्वीरों में सभी मजदूर स्वस्थ दिख रहे हैं। तस्वीरों में अन्दर आया मलबा भी देखा जा सकता है। यह मजदूर 12 नवम्बर 2023 से सुरंग के भीतर मलबा आने के कारण फँसे हुए हैं।

रेस्क्यू टीम ने इसी के साथ फँसे हुए मजदूरों से लाइव सम्पर्क स्थापित कर लिया है। इससे पहले 20 नवम्बर की शाम को सुरंग के भीतर फँसे मजदूरों तक 6 इंच व्यास का पाइप पहुँचाने में सफलता मिली थी। यह पाइप 90 मीटर से भी अधिक लंबा है।

इस पाइप के जरिए अब खाना, पानी, दवाइयाँ और अन्य सामान भेजा जा रहा है। अब इस पाइप के जरिए खिचड़ी और अन्य पका हुआ भोजन भी मजदूरों को भेजने में सफलता मिली है। इससे पहले उन्हें केवल सूखा भोजन भेजा जा रहा था।

रेस्क्यू टीम इसी पाइप के जरिए सुरंग में अंदर कैमरा भी भेजने में सफल रही है। अन्दर फँसे मजदूरों को निर्देश देने के लिए भी इस पाइप का सहारा लिया जा रहा है। अन्दर मौजूद लोगों में गब्बर सिंह नेगी, सुशील और सहाबा हैं, जो अपने साथी मजदूरों के हौसले को बनाए रखने में सहायता कर रहे हैं।

इस सुंरग के भीतर इंडोस्कोपिक फ्लेक्सी कैमरा भेजा गया है। इसे एक रबर के पाइप के मुहाने पर लगाया गया है, जिससे पाइप के जरिए इसे अन्दर को धकेला जा सके। ऐसे कैमरों का इस्तेमाल तंग जगहों की जानकारी लेने के लिए किया जाता है। ऐसे कैमरों का उपयोग डॉक्टर भी करते हैं।

इससे पहले 20 नवम्बर को घटनास्थल पर अंतरराष्ट्रीय सुरंग विशेषज्ञ अर्नाल्ड डिक्स भी पहुँचे थे। उन्होंने मजदूरों को जल्द निकाल लेने की बात कही थी। सुरंग के जायजे के लिए रक्षा मंत्रालय से एक रोबोटिक्स टीम भी पहुँची थी।

टीम का कहना था कि वह अन्दर एक वाईफाई कनेक्शन लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं। पाइप के जरिए अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी भेजे गए हैं। कैमरे से अन्दर मौजूद प्रत्येक मजदूर की स्थिति जानी जा रही है।

इसी के साथ ही मजदूरों के निकालने के लिए 900 मिलीमीटर (.9 मीटर, मतलब 1 मीटर से थोड़ा सा कम) वाली पाइप को आगे धकेलने का काम भी पुनः चालू होने वाला है। मलबे के भीतर से यह पाइप अब ऑगर मशीन की सहायता से भेजा जा रहा है। मशीन के कलपुर्जों की दोबारा मरम्मत हुई है।

सुरंग में ऊपर की तरफ से खुदाई के लिए मशीन भी पहुँच गई हैं। पहाड़ी में ऊपर की तरफ से ड्रिलिंग करके भी मजदूरों को निकालने की योजना बनाई जा रही है। घटना पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रधानमंत्री ने कल मुख्यमंत्री पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी भी ली थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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