Sunday, November 27, 2022
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स्मृति ईरानी ने फैबइंडिया के ट्रायल रूम से पकड़ा था हिडन कैमरा, ‘खादी’ के अवैध इस्तेमाल सहित कई मामले: ब्रांड का विवादों से है पुराना नाता

गोवा में फैबइंडिया स्टोर के ट्रायल रूम में हिडन कैमरे पाए गए थे। इन कैमरों के बारे में किसी और ने नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पता लगाया था। जब वह ट्रायल रूम में गईं तो उन्होंने पाया कि यहाँ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।

पारंपरिक परिधानों का कारोबार करने वाले फैबइंडिया का विवादों से पुराना नाता रहा है। साल 2015 में, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने गोवा के कैंडोलिम में स्थित फैबइंडिया आउटलेट के ट्रायल रूम में हिडन कैमरा पकड़ा था। इस मामले में चार लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था। यह फैबइंडिया का एकमात्र विवाद नहीं है। अपने 60 साल के लंबे समय में कंपनी ने हाल के वर्षों में खुद को पहले से कहीं अधिक विवादों में पाया है।

दरअसल, 3 अप्रैल, 2015 को गोवा में पॉप्युलर ब्रैंड फैबइंडिया स्टोर के ट्रायल रूम में हिडन कैमरे पाए गए थे। इन कैमरों के बारे में किसी और ने नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पता लगाया था। जब वह ट्रायल रूम में गईं तो उन्होंने पाया कि यहाँ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने तुरंत अपने पति को कैमरे के बारे में बताया और फिर स्थानीय भाजपा विधायक माइकल लोबो को फोन किया। बाद में उन्होंने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत भी दर्ज कराई, जिसके आधार पर चार लोगों परेश भगत, राजू पायनचे, प्रशांत नाइक और करीम लखानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

पुलिस ने इस मामले में फैबइंडिया के स्टाफ से भी पूछताछ की थी। स्टाफ के मुताबिक, ये कैमरे चार महीने पहले लगाए गए थे। उस समय भाजपा विधायक लोबो ने कहा था कि ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम औरतों के खिलाफ ऐसी घटनाओं को सहन नहीं करेंगे। उन्होंने साथ ही यह भी कहा था कि वह गोवा के एसपी और डीजीपी से सादे कपड़ों में जाकर सभी शोरूम्स पर छापे मारें। इस मामले में पुलिस थाने में स्मृति ईरानी ने अपना बयान भी दर्ज कराया था।

चारों को गिरफ्तार करने के बाद अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। उन पर IPC की धारा 354C (voyeurism), 509 (गोपनीयता के साथ छेड़छाड़) और IT अधिनियम की धारा 66E (किसी भी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी निजी तस्वीरें कैप्चर करना, प्रकाशित करना) के तहत मामला दर्ज किया गया था। 12 अप्रैल को, पुलिस ने बताया था कि मुख्य आरोपित भगत के पास डीवीआर का पासवर्ड था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (क्राइम ब्रांच) कार्तिक कश्यप ने मीडिया को बताया था कि मंत्री के शोर मचाने के तुरंत बाद भगत को कैमरे की दिशा बदलते हुए पकड़ा गया था।

इसके बाद फैबइंडिया ने एक बयान जारी किया था, जिसमें उन्होंने इस घटना के लिए मंत्री से माफी माँगी थी। लेकिन साथ ही स्पष्टीकरण दिया था कि ट्रायल रूम में कोई भी कैमरा नहीं छिपाया गया था। उन्होंने कहा, “कैंडोलिम-गोवा स्टोर में कैमरा स्टोर की निगरानी का केवल एक हिस्सा था और खरीदारी वाली जगह पर ही लगाया गया था। ट्रायल रूम सहित स्टोर में कहीं भी कोई हिडन कैमरा नहीं था।”

कोल्हापुर आउटलेट में एक और मामला

इसी तरह की एक घटना 31 मार्च, 2015 को दर्ज की गई थी, जहाँ कोहलापुर आउटलेट पर एक सेल्समैन को महिला ग्राहक का वीडियो निकालने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 25 वर्षीय प्रकाश आनंद इसपुर्ले को एक महिला ग्राहक की शिकायत के बाद 1 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। अपनी शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि जब वह कपड़े पहन रही थी, तो इसपुर्ले ने अपने मोबाइल फोन को ट्रायल रूम के दरवाजे और फर्श के बीच में वीडियो रिकॉर्डिंग मोड में रखा था।

खादी शब्द का गलत प्रयोग

फरवरी 2018 में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग भारत सरकार ने बिना अनुमति के खादी ब्रांड का उपयोग करने के लिए फैबइंडिया पर मुकदमा दायर किया था। केवीआईसी ने ट्रेडमार्क चरखा का अवैध रूप से उपयोग करने और खादी टैग के तहत परिधान बेचने के लिए एथनिक वियर रिटेल आउटलेट से 525 करोड़ रुपए का हर्जाना माँगा था। जब कंपनी पर पहली बार केवीआईसी द्वारा मुकदमा दायर किया गया था, तो उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ किए गए दावे निराधार थे और वे उनके खिलाफ अदालत में लड़ेंगे।

KVIC और FabIndia के बीच यह विवाद साल 2015 में शुरू हुआ, जब KVIC ने कंपनी को खादी ट्रेडमार्क के इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी देते हुए कानूनी नोटिस भेजा था। फैबइंडिया ने जवाब दिया था कि उसने विज्ञापनों में खादी शब्द और उसके ट्रेडमार्क का इस्तेमाल बंद कर दिया है। हालाँकि, 2017 में KVIC को पता चला कि FabIndia अभी भी खादी ट्रेडमार्क और नाम का उपयोग कर रहा है। इसके बाद उसने एक नया कानूनी नोटिस भेजा था।

उल्लेखनीय है कि सरकारी निकाय केवीआईसी ने ‘खादी’ ब्रांड नाम का दुरुपयोग करने और इसका लाभ उठाने के लिए फैबइंडिया सहित 1,000 से अधिक निजी फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की है।

गौरतलब है कि अक्टूबर 2021 में फैबइंडिया (Fabindia) ने दिवाली के मौके पर जारी किए गए कलेक्शन को ‘जश्न-ए-रिवाज’ का नाम देकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। हिंदुओं के त्योहार को फैबइंडिया ने अपने ट्वीट में उर्दू में पेश किया था, जिसे अब डिलीट कर कर दिया गया है। दरअसल, यह ट्वीट नेटीजन्स के भारी विरोध के बाद हटाया गया। वहीं अब खबर आ रही है कि फैबइंडिया ने लोगों के भारी विरोध को देखते हुए यह विज्ञापन भी हटा लिया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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