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सुप्रीम कोर्ट से तीस्ता सीतलवाड़ को अंतरिम जमानत, गुजरात दंगों में निर्दोषों को फँसाने के लिए की थी साजिश: कपिल सिब्बल ने पेश की दलीलें

बता दें कि गुजरात दंगों में भूमिका को लेकर तीस्ता सीतलवाड़ को गुजरात एटीएस टीम ने 25 जून 2022 को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया था। उनके ऊपर दंगों के दौरान गुजरात की छवि खराब करने का आरोप है।

गुजरात दंगों को लेकर गुजरात सरकार की छवि खराब करने के आरोप में गिरफ्तार तथाकथित सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (2 सितंबर 2022) को अंतरिम जमानत दे दी। तीस्ता पर गवाहों के झूठे बयानों का मसौदा तैयार कर नानावती आयोग के सामने प्रस्तुत करने का आरोप है।

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देते हुए तीस्ता सीतलवाड़ को जाँच में सहयोग करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ से अपना पासपोर्ट सरेंडर करने के लिए भी कहा कि यह पासपोर्ट तब तक सरेंडर रहेगा जब तक कि हाईकोर्ट नियमित जमानत के मामले पर विचार नहीं कर लेता।

बता दें कि इस मामले में तीस्ता की जमानत याचिका निचली अदालत और हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। इन दोनों जगहों से आवेदन खारिज होने के बाद तीस्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

तीस्ता की ओर से अदालत में उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी 24 जून को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ समाप्त हुई कार्यवाही के बाद आगे बढ़ाने के अलावा और कुछ नहीं थी।

कपिल सिब्बल ने कहा कि तीस्ता सीतलवाड़ दो महीने से अधिक समय से हिरासत में हैं और उच्च न्यायालय के समक्ष मूल आवेदन के लंबित रहने के दौरान अंतरिम जमानत की हकदार हैं।

वहीं, गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि FIR में तीस्ता सीतलवाड़ की संलिप्तता को लेकर जो बात कही गई है उसके पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने कहा कि तीस्ता का आवेदन उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में मामले को उच्च न्यायालय द्वारा ही विचार करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिरासत में पूछताछ सहित जाँच के सभी आवश्यक तत्व पूरे होने के बाद मामला एक जटिल रूप लेता है। इसलिए उच्च न्यायालय द्वारा मामले पर विचार किए जाने तक अंतरिम जमानत दिया जाना चाहिए।

बता दें कि गुजरात दंगों में भूमिका को लेकर तीस्ता सीतलवाड़ को गुजरात एटीएस टीम ने 25 जून 2022 को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया था। उनके ऊपर दंगों के दौरान गुजरात की छवि खराब करने का आरोप है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, तीस्ता के खिलाफ यह कार्रवाई आईपीसी की धारा 498 के तहत दर्ज एफआईआर पर हुई थी। तीस्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि गुजरात दंगों से जुड़े मामले में उनकी भूमिका पर और छानबीन की जरूरत है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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