Wednesday, May 22, 2024
Homeदेश-समाज'बच्चे को जन्म देने से बेहतर एबॉर्शन' : SC ने 14 साल की बच्ची...

‘बच्चे को जन्म देने से बेहतर एबॉर्शन’ : SC ने 14 साल की बच्ची को 30 हफ्ते का गर्भ गिराने की परमिशन, बॉम्बे HC के फैसले को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को खारिज किया जिसमें गर्भपात कराने पर कोई आदेश देने से मना किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छे 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करके फैसला दिया।

14 साल की रेप सर्वाइवर को सुप्रीम कोर्ट ने 7 महीने (30 हफ्ते) का गर्भ गिराने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने इस मामले पर अपना फैसला दिया। इस दौरान उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को खारिज किया जिसमें गर्भपात कराने पर कोई आदेश देने से मना किया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करके बच्ची को एबॉर्शन करा लेने की मंजूरी दी। फैसले में कहा गया कि गर्भपात में देरी बच्चे के लिए कठिनाई से भरा है। उन्होंने कहा कि ये बहुत ही असाधारण स्थिति है जहाँ बच्चों को प्रोटेक्ट करने के लिए ऐसे फैसले लिए जाते हैं।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला देने से पहले 19 अप्रैल 2024 को नाबालिग बच्ची के मेडिकल टेस्ट का आदेश दिया था। कोर्ट ने मुंबई के सायन स्थित लोकमान्य तिलक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (LTMGH) से कहा था कि वो इस बात पर रिपोर्ट दें कि अगर पीड़िता मेडिकल प्रोसिजर से एबॉर्शन कराती है या उसे ऐसा न करने की सलाह दी जाती है तो इसका उसकी शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्थिति पर क्या असर पड़ने की संभावना है।

कोर्ट के आदेश के बाद बच्ची का मेडिकल टेस्ट हुआ और अस्पताल की ओर से स्पष्ट राय दी गई कि गर्भावस्था जारी रहने से नाबालिग की शारीरिक और मानसिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि मेडिकल बोर्ड ने राय दी है कि बच्चे को जन्म देने के मुकाबले गर्भपात करने में जोखिम कम है। इसलिए सायन अस्पताल के डीन से नाबालिग के चिकित्सीय गर्भपात करने का अनुरोध किया जाता है।

गौरतलब है कि एक यौन उत्पीड़न पीड़िता के गर्भपात के लिए सुप्रीम कोर्ट से इसलिए फैसला आया है क्योंकि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी के अनुसार, गर्भावस्था को समाप्त करने की मैक्सीमम लिमिट 24 सप्ताह है। ये सीमा विवाहित महिलाओं के साथ-साथ विशेष श्रेणियों की महिला के लिए तय की गई है। इनमें रेप पीड़िता, कमजोर महिलाएँ और विकलांग महिलाएँ शामिल आती हैं।।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

पश्चिम बंगाल में 2010 के बाद जारी हुए हैं जितने भी OBC सर्टिफिकेट, सभी को कलकत्ता हाई कोर्ट ने कर दिया रद्द : ममता...

कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार 22 मई 2024 को पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को बड़ा झटका दिया। हाईकोर्ट ने 2010 के बाद से अब तक जारी किए गए करीब 5 लाख ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं।

महाभारत, चाणक्य, मराठा, संत तिरुवल्लुवर… सबसे सीखेगी भारतीय सेना, प्राचीन ज्ञान से समृद्ध होगा भारत का रक्षा क्षेत्र: जानिए क्या है ‘प्रोजेक्ट उद्भव’

न सिर्फ वेदों-पुराणों, बल्कि कामंदकीय नीतिसार और तमिल संत तिरुवल्लुवर के तिरुक्कुरल का भी अध्ययन किया जाएगा। भारतीय जवान सीखेंगे रणनीतियाँ।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -