Wednesday, December 8, 2021
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हाथ-गला काटकर खून से लिखा ‘भ्रष्टाचार मुर्दाबाद’: 5 साल से वेतन न मिलने पर सीतामढ़ी के शिक्षक ने किया आत्महत्या का प्रयास

डीपीओ शैलेन्द्र कुमार ने मीडिया को बताया कि संजीव कुमार बरियापुर के पंचायत शिक्षक हैं। उनके बकाया वेतन मद का करीब छह लाख रुपया बैंक खाता में भेज दिया गया है। केवल प्रशिक्षण अवधि का अवैतनिक वेतन शेष है। यह भी विभागीय प्रावधान के पेच में फँसा है।

पिछले दिनों बिहार के सीतामढ़ी में संजीव कुमार नाम के एक पंचायत शिक्षक ने 5 साल से वेतन न मिलने के कारण आत्महत्या का प्रयास किया। उन्होंने जिला मुख्यालय के डुमरा परेड स्थल मैदान में अपनी नस काटकर जान देने की कोशिश की।

इस दौरान उन्होंने अपने खून से दीवार पर ‘भ्रष्टाचार मुर्दाबाद’ भी लिखा और फिर वहीं पर बेहोश हो गए। खून से लथपथ हालत में शिक्षक को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही ट्विटर पर कुछ लोग उन्हें मृत समझकर श्रद्धांजलि देने लगे। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में उन्हें अस्पताल में भर्ती बताया जाता रहा।

ऐसे में ऑपइंडिया ने संजीव कुमार की वर्तमान स्थिति जानने के लिए डुमरा थाना क्षेत्र के एचएसओ को संपर्क किया। एसएचओ ने हमें बताया कि संजीव की स्थिति फिलहाल स्थिर है। लेकिन उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं मिला है।

संजीव के वेतन पर सवाल पूछे जाने पर एसएचओ ने कहा कि वो शिक्षा विभाग ही बता पाएँगे। लेकिन सुनने में आया है कि कुछ वेतन मिल चुका है और कुछ बकाया है।

मामले में एक्शन लेने की बात पूछे जाने पर डुमरा एसएचओ ने बताया कि अभी शिक्षक की ओर से इस संबंध में लिखित रूप से शिकायत नहीं दायर करवाई गई है। उनका कहना है कि उन्हें किसी के ऊपर कोई दोष नहीं देना है।

यहाँ बता दें शिक्षक संजीव कुमार बेला थाना क्षेत्र के नरगा गाँव निवासी हैं। उनकी प्रतिनियुक्ति बरियारपुर के प्राथमिक विद्यालय लपटी टोला में है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि शिक्षक की जेब से लंबित वेतनमान को लेकर डीएम को लिखा 28 जनवरी 2019 का आवेदन भी मिला है। हालाँकि, एसएचओ ने इस बात से इंकार किया है कि उनकी जेब से कोई पत्र नहीं मिला।

इधर, डीपीओ शैलेन्द्र कुमार ने मीडिया को बताया कि संजीव कुमार बरियापुर के पंचायत शिक्षक हैं। उनके बकाया वेतन मद का करीब छह लाख रुपया बैंक खाता में भेज दिया गया है। केवल प्रशिक्षण अवधि का अवैतनिक वेतन शेष है। यह भी विभागीय प्रावधान के पेच में फँसा है।

जख्मी शिक्षक संजीव के मुताबिक प्रशिक्षित टीचर होने के बावजूद उनका वेतन जुलाई 2015 से ही विभाग ने बंद कर रखा था। उन्होंने बताया कि अपने लंबित वेतन को लेकर वो पंचायत से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काट कर थक गए। लेकिन किसी तरह का सहयोग न मिलने के कारण उसने हताशा में ये कदम उठा लिया।

उल्लेखनीय है कि शिक्षक के इस प्रयास के बाद पंचायत शिक्षकों के संगठन ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष पवन कुमार व बिहार पंचायत नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष प्रकाश कुमार ने कहा समय पर संजीव के वेतन भुगतान हो जाता तो उनको ऐसा कदम नहीं उठाना पड़ता। उसके आत्महत्या के प्रयास के तुरंत बाद वेतन भुगतान में आने वाली सारी बाधाएँ दूर हो गईं। इससे साफ है कि विभागीय उदासीनता से शिक्षक भुखमरी के शिकार हो रहे हैं।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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