पुलिस से बचने के लिए राहगीरों से फोन माँगकर इस्तेमाल कर रहे कमलेश के हत्यारे अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन

दोनों लगातार अपना भेष बदलकर छिप रहे हैं। वो अपना मोबाइल भी सात-आठ घंटे बाद ऑन कर रहे हैं और उसके बाद स्विच ऑफ कर दे रहे हैं। वहीं गुजरात एटीएस द्वारा सूरत से गिरफ्तार तीनों आरोपितों मौलाना मोहसिन शेख, फैजान और राशिद अहमद पठान को.....

कमलेश तिवारी हत्‍याकांड के दोनों संदिग्ध हत्यारे अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन की लोकेशन लगातार चेंज हो रही है। रविवार (अक्टूबर 20, 2019) को पुलिस को पता चला कि उनकी लोकेशन अम्‍बाला में है। इसके बाद पुलिस को उनकी तलाश में लगाया गया। रात होते-होते उनके शाहजहाँपुर में होने की ख़बर मिली। शाहजहाँपुर रेलवे स्‍टेशन के पास एक होटल के सीसीटीवी में आरोपितों को देखा गया।

जब तक पुलिस शाहजहाँपुर में आरोपितों को लोकेट कर पाती, उनकी लोकेशन फिर बदल गई। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपित अपने फोन की बजाय राहगीरों से मोबाइल माँगकर इस्‍तेमाल कर रहे हैं। पुलिस ने दोनों की तलाश में यूपी के शाहजहॉंपुर में मुसाफिरखानों और मदरसों पर छापेमारी की है। ये आरोपित शाहजहाँपुर में रुके थे लेकिन एसटीएफ के पहुँचने के भनक मिलते ही लापता हो गए। यूपी के डीजीपी ओपी सिंह ने दोनों पर ढाई-ढाई लाख रुपए के ईनाम का ऐलान किया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में संदिग्ध हत्यारों के नेपाल भाग जाने की भी आशंका जताई गई है।

दोनों लगातार अपना भेष बदलकर छिप रहे हैं। वो अपना मोबाइल भी सात-आठ घंटे बाद ऑन कर रहे हैं और उसके बाद स्विच ऑफ कर दे रहे हैं। वहीं गुजरात एटीएस द्वारा सूरत से गिरफ्तार तीनों आरोपितों मौलाना मोहसिन शेख, फैजान और राशिद अहमद पठान को हवाई मार्ग से गुजरात के अहमदाबाद से लखनऊ लाया गया। फिलहाल गुजरात से लखनऊ लाए गए तीनों आरोपितों से पूछताछ कर बाकी दोनों आरोपितों के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

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गौरतलब है कि कमलेश तिवारी की 18 अक्टूबर को उनके कार्यालय में हत्या कर दी गई थी। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में खुलासा हुआ कि कमलेश तिवारी की नृशंस हत्‍या को मौलाना मोहसिन ने शरियत कानून के कत्‍ल ए वाजिब के सिद्धांत के तहत जायज ठहराया था। उसने राशिद के भाई  मोईनुद्दीन और अशफाक को इसके लिए तैयार किया। इस मामले में राशिद की माँ और अशफाक की बीबी से भी पूछताछ की गई।

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