इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मुस्लिम प्रोफेसर के सनातन धर्म में घर वापसी के आवेदन को खारिज करने को लेकर प्रयागराज के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) (ADM-प्रशासन) के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अनिल पंडित (पूर्व में मोहम्मद अहसान) ने अपनी मर्जी से सनातन में घर वापसी की थी और उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 के तहत इसकी औपचारिक मान्यता के लिए आवेदन किया था।
हालाँकि, ADM ने आवेदन पर फैसला लेने से पहले बार-बार पुलिस जाँच कराई और बाद में उसकी अर्जी खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह तथ्य भी आया कि युवक के खिलाफ उसके ससुर ने आपराधिक मामला दर्ज कराया था। फिलहाल, हाईकोर्ट की जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने प्रयागराज के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) के आदेश पर रोक लगा दी है।
क्या था मामला?
यह मामला मोहम्मद अहसान द्वारा घर वापसी किए जान से जुड़ा था। मोहम्मद अहसान ने 2022 में आर्य समाज मंदिर में सनातन अपना लिया था और उनका नाम अनिल पंडित रखा गया था। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि स्कूल के दिनों से ही उनका झुकाव सनातन धर्म/हिंदू संस्कृति और परंपराओं की ओर था। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में कभी नमाज पढ़ने की परंपरा नहीं थी।
उन्होंने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में पीएचडी करते समय उनकी मुलाकात अपर्णा बाजपेयी से हुई और दोनों के बाद में प्रेम विवाह कर लिया था। अपर्णा बाजपेयी ने अदालत को बताया कि उन्होंने अपनी इच्छा से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार श्री अनिल पंडित से विवाह किया लेकिन उनके पिता इस विवाह के खिलाफ थे। फिलहाल वह 7 माह की गर्भवती हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि अनिल पंडित ने 12 जनवरी 2022 को जिला मजिस्ट्रेट के सामने यह घोषणा की थी कि वह अपनी इच्छा से सनातन धर्म अपनाना चाहते हैं। इसके बाद 14 मार्च 2022 को आर्य समाज मंदिर में विधि-विधान के साथ उनका धर्म परिवर्तन कराया गया। यह प्रक्रिया पुजारी सत्य प्रकाश ने पूरी कराई और धर्म परिवर्तन के बाद उनका नया नाम ‘अनिल पंडित’ रखा गया। पुजारी ने कानून के अनुसार धर्म परिवर्तन की सूचना भी जिला मजिस्ट्रेट को दे दी थी।
अदालत को यह भी बताया गया कि ADM प्रयागराज ने मामले की जाँच के लिए पुलिस रिपोर्ट मँगाई थी। जांँच के बाद पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि याचिकाकर्ता ने बिना किसी दबाव या लालच के अपनी मर्जी से घर वापसी की है। इसके बाद अपर्णा के पिता ने अनिल के खिलाफ FIR करा दी। इसके बाद इस मामले में पुलिस ने 23 अक्टूबर 2023 को एक और रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया कि याचिकाकर्ता पर धर्म परिवर्तन के लिए किसी तरह का दबाव नहीं डाला गया था और न ही उसे किसी अनुचित तरीके से प्रभावित कर सनातन धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया गया है।

2 रिपोर्ट के बाद ADM ने 11 जुलाई 2024 को एक और जाँच का आदेश दिया और पुलिस ने 23 जुलाई 2024 को नई रिपोर्ट दी। इस रिपोर्ट के आधार पर ADM ने आदेश दिया और कहा गया कि याचिकाकर्ता ने अपर्णा बाजपेयी को बहला-फुसलाकर शादी की है। अप्रैल 2021 में याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए 1 लाख रुपए को भी घर वापसी को अवैध साबित करने के लिए सबूत माना गया। हालाँकि, अपर्णा ने कोर्ट को बताया कि माँ की बीमारी के चलते एक दोस्त के रूप में उनकी मदद की गई थी। हालाँकि, ADM ने 9 अगस्त 2024 को इस आदेश को रद्द कर दिया था।
याचिकाकर्ता ने क्या कहा?
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में कहा कि पहले की दो पुलिस रिपोर्टें विरोधाभासी नहीं थीं फिर भी ADM बार-बार नई रिपोर्ट मँगवा रही थीं। उन्होंने याचिकाकर्ता से बुलाकर पूछताछ भी नहीं की और पहले की दो रिपोर्टों को बिना उचित कारण के नजरअंदाज कर दिया गया। वकील ने कहा कि अनिल की पत्नी गर्भवती हैं और बच्चे के जन्म के बाद जन्म प्रमाण पत्र में माता-पिता की पहचान दर्ज कराने में समस्या आ सकती है। उन्होंने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करने की माँग की।
कोर्ट ने क्या कहा?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट याचिकाकर्ता के पक्ष में थी तो फिर केवल लड़की के पिता द्वारा FIR दर्ज कराने के बाद अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट बार-बार जाँच क्यों करवा रही थीं जबकि घर वापसी के समय लड़की और उसके पिता की कोई भूमिका नहीं थी। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने धर्म परिवर्तन से 60 दिन पहले आवेदन देकर उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन कानून की धारा 8(1) का पालन किया था। इसके बाद हुआ धर्म परिवर्तन कानूनी रूप से वैध माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिपोर्ट पक्ष में होने के बाद भी ADM ने FIR को आधार बनाकर इस पर विचार किया और पुलिस ने इस मामले को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट माँगी। कोर्ट ने ADM के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि आपराधिक जाँच से इसका संबंध नहीं था। उन्होंने पुलिस को बार-बार रिपोर्ट देने के लिए मजबूर किया। साथ ही, हाईकोर्ट ने कहा कि ADM ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर शक्ति का इस्तेमाल किया है। FIR में लगाए गए आरोपों से ADM का कोई लेना-देना नहीं था।
हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि धर्म परिवर्तन किसी दबाव, लालच या गलत मंशा से कराया गया था। कोर्ट ने माना कि ADM FIR और चार्जशीट से जरूरत से ज्यादा प्रभावित हो गईं और उसी आधार पर धर्म परिवर्तन को अवैध मान लिया। अदालत ने कहा कि दोस्तों के बीच पैसों के लेन-देन को आधार बनाकर यह नहीं माना जा सकता कि याचिकाकर्ता ने उन पर गलत प्रभाव डाला था।
कोर्ट ने कहा कि विवाह का पंजीकरण सिर्फ इसलिए रुका हुआ है क्योंकि धर्म परिवर्तन से जुड़ा मामला अभी लंबित है। कोर्ट ने माना कि ADM को शुरुआती दो जाँच रिपोर्टों के आधार पर फैसला लेना चाहिए था। अदालत ने साफ कहा कि केवल चार्जशीट दाखिल हो जाने से कोई व्यक्ति अपराधी साबित नहीं हो जाता।

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जुड़े एक संस्थान में सहायक प्रोफेसर हैं जबकि उनकी पत्नी बलिया के एक इंटर कॉलेज में अंग्रेजी की प्रवक्ता हैं। कोर्ट ने ADM को निर्देश दिया कि वे मामले को से दोबारा देखें और शुरुआती दो जाँच रिपोर्टों तथा कोर्ट द्वारा दोनों से हुई बातचीत को ध्यान में रखते हुए नया आदेश पारित करें। अदालत ने यह आदेश 26 मई 2026 तक देने को कहा है। तब तक 9 अगस्त 2024 का विवादित आदेश स्थगित रहेगा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 मई 2026 को होगी।


