तबरेज के नाम पर और कितनी हिंसा! शेखर और बंसल पर चाकू से हमला

तबरेज का वीडियो दिखाकर चार लोगों ने धार्मिक नारे लगाने को किया मजबूर, मना करने पर किया लहूलुहान।

चोरी के आरोप में भीड़ की हिंसा का शिकार बने तबरेज अंसारी के नाम पर समूचे देश में हिंसात्मक गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। साम्प्रदायिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश हो रही। कहीं तबरेज को शहीद का दर्जा देने की माँग हो रही तो कहीं उसके नाम पर उपद्रव। ISIS के झंडे तक लहराए गए। 

अब तबरेज का वीडियो दिखाकर दो हिन्दुओं को धार्मिक नारे लगाने के लिए मजबूर करने और उनकी पिटाई का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर में छपी ख़बर के अनुसार, रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र के हरमू फल मंडी के पीछे शेखर राम और बसंत राम को चार स्थानीय लोगों ने पकड़ा और उन्हें धार्मिक नारे लगाने को मजबूर किया। धार्मिक नारे न लगाने पर उन दोनों को चाकू मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। एक की गर्दन पर चाकू मारा तो दूसरे के हाथ को लहुलूहान कर दिया।

गंभीर रूप से घायल शेखर और बसंत ने अरमोड़ा थाने में एक पर नामज़द और तीन अज्ञात के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करवाई है। उन्होंने पुलिस को बताया कि वे अपने जानवर को ढूँढ़ने हरमू फल मंडी के पीछे गए थे। वहाँ चार लोगों ने उन्हें अचानक पकड़ लिया और उनसे उनका समुदाय पूछा। इसके बाद चारों ने मोबाइल पर उन्हें तबरेज का वीडियो दिखाया और धार्मिक नारे लगाने को बाध्य किया।

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शेखर राम और बसंत राम ने धार्मिक नारे लगाने से मना किया तो चारों उन्हें चोर बताने लगे। यह कहते हुए कि दोनों फल मंडी में चोरी करने आए हैं उनके ऊपर चाकू से हमला कर दिया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

अंजुमन इस्लामिया, रांची के अध्यक्ष इबरार अहमद ने कहा है की इस मामले की गहराई से जाँच होनी चाहिए जिससे दोषियों को कड़ी सज़ा मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं में घृणा और अहिंसा बढ़ रही है। इसे रोकने के लिए सिविल सोसाइटी को आगे आना चाहिए।

ग़ौरतलब है कि पिछले दिनों सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने के मामले में कोर्ट ने अभिनेता एजाज़ ख़ान को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था। मुंबई पुलिस की साइबर विंग ने एजाज़ को 17 जुलाई को गिरफ़्तार किया था। दरअसल, ख़ान ने 9 जुलाई 2019 को सोशल मीडिया पर तबरेज से जुड़े दो वीडियो शेयर कर उसकी मौत का बदला लेने की बात कही थी।

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संदिग्ध हत्यारे
संदिग्ध हत्यारे कानपुर से सड़क के रास्ते लखनऊ पहुंचे थे। कानपुर रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी से इसकी पुष्टि हुई है। हत्या को अंजाम देने के बाद दोनों ने बरेली में रात बिताई थी। हत्या के दौरान मोइनुद्दीन के दाहिने हाथ में चोट लगी थी और उसने बरेली में उपचार कराया था।

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