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जितेंद्र त्यागी ने जताई संन्यास की इच्छा, नरसिंहानंद ने भी सार्वजनिक जीवन को कह चुके हैं अलविदा: अब नहीं होगी कोई ‘धर्म संसद’?

अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी का कहना है कि चूँकि अब उन्होंने हिन्दू धर्म धारण कर लिया है, इसलिए वह संन्यास धारण कर सकते हैं। यदि उन्होंने इच्छा जताई है तो कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

जितेंद्र त्यागी उर्फ वसीम रिजवी ने अब संन्यास लेने की इच्छा जताई है। इस्लाम छोड़कर हिन्दू धर्म अपनाने वाले शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन रिजवी ने हरिद्वार के शांभवी धाम के पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप के सामने अपनी इस इच्छा को रखा है। स्वामी आनंद स्वरूप के साथ ही जितेंद्र त्यागी ने रविवार (22 मई, 2022) को रुद्राभिषेक किया था।

बता दें कि धर्म ससंद में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में जितेंद्र नारायण त्यागी पिछले चार माह चार दिन से हरिद्वार जेल में थे। वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा जितेंद्र नारायण त्यागी को फिर से कोई भड़काऊ भाषण न देने की शर्त पर जमानत दी गई है। कहा जा रहा है कि जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद त्यागी ने हरिद्वार स्थित शांभवी धाम में काली सेना प्रमुख स्वामी दिनेशानंद भारती के साथ भगवान शंकर का रुद्राभिषेक किया था। इस दौरान ही उन्होंने संन्यास की इच्छा जताई।

वसीम रिजवी उर्फ़ त्यागी ने कहा कि अब हिन्दू धर्म में आने के बाद वह सभी मोह माया से दूर होकर संन्यास परंपरा धारण करना चाहते हैं। वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह भी कहा जा रहा है कि मंगलवार (24 मई, 2022) को स्वामी आनंद स्वरूप अखाड़ा परिषद के अलावा सभी 13 अखाड़ों से इस संबंध में बातचीत करेंगे।

हालाँकि, अभी उनको अखाड़े में शामिल किया जाएगा या नहीं इस पर विचार किया जा रहा है। बताया जा रहा है अखाड़े में उनके सन्यास की बाबत बड़े संतों से भी राय ली जाएगी। वहीं इस बात पपर गहन विचार-विमर्श के बाद ही इस बात का निर्णय होगा कि परंपरा में ऐसा हो सकता है या नहीं, उसके बाद उन्हें दीक्षा दिलाई जाएगी।

इस मामले में अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी का कहना है कि चूँकि अब उन्होंने हिन्दू धर्म धारण कर लिया है, इसलिए वह संन्यास धारण कर सकते हैं। यदि उन्होंने इच्छा जताई है तो कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

गौरतलब है कि हाल ही में गाजियाबाद के डासना देवी मंदिर के महंत और जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने भी एक चौंकाने वाली घोषणा की थी। उन्होंने सार्वजानिक जीवन से संन्यास लेकर पूरी तरह अपना जीवन धार्मिक कार्यों में लगाने की बात कही है। उन्होंने इस्लामी जिहाद के खिलाफ अपनी लड़ाई और धर्म संसद के आयोजन से खुद को अलग करने की भी घोषणा की थी। इस तरह से देखा जाए तो अदालत के निर्देशानुसार दोनों लोगों ने भड़काऊ भाषणों से दूरी बना ली है।

बता दें कि यति नरसिंहानंद ने ये बातें 19 मई 2022 (गुरुवार) को कही। अपने बयान में उन्होंने जितेंद्र नारायण त्यागी के खिलाफ हुई कार्रवाई के लिए भी खुद को दोषी बताया है। एक वीडियो जारी कर यति नरसिंहानंद ने कहा था, “हम सभी जितेंद्र नारायण त्यागी को जेल में से लेने आए थे। उनकी रिहाई हो गई है। वे हमसे मिलने से पहले ही चले गए हैं। उनसे हमारा यहीं तक का साथ था। उनके साथ हमारे सुखद या दुखद अनुभव का पूर्णतया दोषी मैं हूँ। उनकी कोई गलती नहीं है। उन्होंने केवल सच बोला। मेरी कमजोरी के चलते उन्हें 4 महीने से ज्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा। इसके लिए मैं उनसे क्षमाप्रार्थी हूँ।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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