पूर्व गृहमंत्री के बेटी का अपहरण व 5 सैनिकों की हत्या के मामले में टाडा कोर्ट में पेश होंगे यासीन मलिक

सीबीआई के दूसरे चालान के मुताबिक 25 जनवरी 1990 की शाम के लगभग साढ़े सात बजे रावलपोरा इलाके के सनतनगर क्रॉसिंग पर एयरपोर्ट की बस का इंतजार कर रहे एयरपोर्ट कर्मियों पर आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियाँ बरसाई थीं। इसमें.....

जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अध्यक्ष यासीन मलिक को टाडा कोर्ट ने अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं। यासीन पर पूर्व मुख्यमंत्री और बाद में गृहमंत्री मुफ्ती सईद की बेटी रुबिया सईद के अपहरण और वायुसेना कर्मियों की हत्या के आरोप में केस दर्ज हैं। कोर्ट ने इस संबंध में तिहाड़ जेल के प्रभारी को हिदायत दी है कि 11 सितंबर को अगली सुनवाई में उन्हें कोर्ट में पेश किया जाए।

उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान ही मलिक को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे, लेकिन जाँच एजेंसी सीबीआई ने समय की कमी बताते हुए गुरुवार को उसे कोर्ट में पेश करने में असमर्थता दिखाई। जिसकी जानकारी कोर्ट के पीठासीन अधिकारी की ओर से जारी ताजा पेशी वारंट में भी है।

इस वारंट में कहा गया है कि 17 अगस्त को यासीन की पेशी को लेकर वारंट जारी किया गया था जो कि तिहाड़ जेल के डाक विभाग को सौंपा गया था। लेकिन समय कम होने की वजह से आरोपित की पेशी नहीं हो पाई। इसलिए सीबीआई के वकील को ताजा पेशी वारंट तामील करने की हिदायत गई है। साथ ही इसमें यह भी कहा गया है कि इस बार वारंट जेल अधीक्षक को दिया जाए।

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बता दें यासीन मलिक के ख़िलाफ़ इस समय जिन दो मामलों में केस चल रहा है, वह काफ़ी पुराने हैं। रुबिया सईद के अपहरण के दौरान सीबीआई द्वारा दाखिल चालान के मुताबिक श्रीनगर के सदर पुलिस स्टेशन में आठ दिसंबर 1989 को रिपोर्ट दर्ज हुई थी। जबकि सैनिको की हत्या वाला मामला 25 जनवरी 1990 का है।

सईद के मामले में दर्ज हुई रिपोर्ट में पूरे वाकये का जिक्र था। इसमें बताया गया कि कैसे 1989 में अस्पताल से घर लौटने के दौरान मुख्यमंत्री की बेटी का कैसे कुछ बंदूक लिए लोगों ने उनका अपहरण कर लिया। इस मामले में सीबीआई ने जाँच पूरी होने के बाद 18 सितंबर 1990 को जम्मू की टाडा कोर्ट में आरोपितों के खिलाफ चालान पेश किया था।

वहीं, यासीन के ख़िलाफ़ सीबीआई के दूसरे चालान के मुताबिक 25 जनवरी 1990 की शाम के लगभग साढ़े सात बजे रावलपोरा इलाके के सनतनगर क्रॉसिंग पर एयरपोर्ट की बस का इंतजार कर रहे एयरपोर्ट कर्मियों पर आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियाँ बरसाई थीं। इसमें 40 लोग घायल हुए थे, जिनमें से दो की मौके पर ही मौत हो गई थी। कुल पाँच एयरफोर्स कर्मचारियों की इस घटना में मौत हुई थी।  

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