Sunday, May 16, 2021
Home विविध विषय धर्म और संस्कृति सबरीमाला कोई पब्लिक प्लेस नहीं, हिन्दुओं का पवित्र स्थल: संघ प्रमुख के बयान के...

सबरीमाला कोई पब्लिक प्लेस नहीं, हिन्दुओं का पवित्र स्थल: संघ प्रमुख के बयान के मायने

भगवान अयप्पा को पूरे भारत द्वारा पूजे जाने की बात कह कर उन्होंने केरल के लोगों को ढाढस बंधाया है कि उनकी लड़ाई राष्ट्रीय स्तर की है, एक ही मंदिर, राज्य या सम्प्रदाय तक सीमित नहीं है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने प्रयागराज कुंभ में आयोजित धर्म संसद में सबरीमाला मुद्दे को लेकर केरल सरकार पर निशाना साधा। संघ प्रमुख ने कहा कि सबरीमाला मंदिर कोई सार्वजनिक जगह नहीं है बल्कि एक सम्प्रदाय विशेष का स्थल है। उन्होंने केरल की वामपंथी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि हिन्दुओं के सम्मान एवं भावनाओं को आहत करते हुए श्रीलंका से महिलाओं को लाकर सबरीमाला मंदिर में घुसाया गया। सरसंघचालक ने कहा:

“कोर्ट ने कहा महिला अगर प्रवेश चाहती है तो करने देना चाहिए। अगर किसी को रोका जाता है तो उसको सुरक्षा देकर जहाँ से अब दर्शन करते हैं वहाँ से ले जाना चाहिए। लेकिन कोई जाना नहीं चाह रहा है इसलिए श्रीलंका से लाकर इनको पिछले दरवाजे से घुसाया जा रहा है।”

हिन्दू महिलाएँ जानतीं हैं परम्पराओं का सम्मान करना

भागवत का यह बयान विचारणीय है। संघ प्रमुख ने वही बात कही है, जिस से हर एक हिन्दू और भारतीय परम्पराओं का सम्मान करने वाला व्यक्ति सहमत होगा। उन्होंने कहा कि हिन्दू महिलाएँ सबरीमाला मंदिर में नहीं जाना चाहती। उनका यह बयान निश्चित ही रेहाना फातिमा और मैरी स्वीटी जैसी महिलाओं के मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश करने के परिपेक्ष्य में है। संघ प्रमुख की सोच यह है कि हिन्दू महिलाएँ अपने ही पूर्वजों द्वारा सदियों पहले बनाए गए परम्पराओं का सम्मान करना जानती है, और उसे तोड़ना नहीं चाहती।

अक्टूबर 2018 में 46 वर्षीय मैरी स्वीटी ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने का प्रयास किया था लेकिन श्रद्धालुओं के विरोध के कारन उन्हें वापस लौटना पड़ा था। ईसाई संप्रदाय से आने वाली मैरी स्वीटी के एक हिन्दू मंदिर में जबरन प्रवेश को लेकर सवाल भी खड़े किए गए थे। इसी तरह, उसी महीने रेहाना फ़ातिमा ने भी मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की थी। मैरी ने तो यहाँ तक कहा था कि उनके अंदर कोई दैवीय शक्ति है जो उन्हें सबरीमाला की तरफ खींच रही है।

संघ प्रमुख का यह कहना कि हिन्दू महिलाएँ सबरीमाला के नियम-क़ानून का पालन करना चाहती है, इन्ही ख़बरों के परिपेक्ष्य में हो सकता है। अन्य सम्प्रदायों की महिलाओं का अचानक से एक हिन्दू मंदिर के प्रति प्रेम जग जाना उनके इस बयान के पृष्ठभूमि को दर्शाता है। इसी तरह एक 46 वर्षीय श्रीलंकन महिला ने भी सबरीमाला में प्रवेश किया था। संघ प्रमुख ने इसी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि श्रीलंका से महिलाओं को लाकर मंदिर में घुसाया जा रहा है।

जस्टिस इंदु मल्होत्रा के निर्णय से अलग नहीं है संघ प्रमुख का बयान

संघ प्रमुख का बयान इस मुद्दे को लेकर जस्टिस इंदु मल्होत्रा के असहमति वाले निर्णय से मिलता-जुलता है। आपको याद होगा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय पीठ ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश करने की इजाज़त दे दी थी। 4-1 के बहुमत वाले निर्णय में जस्टिस इंदु मल्होत्रा एकमात्र सदस्य थीं, जिन्होंने बहुमत के ख़िलाफ़ निर्णय (Dissenting Voice) दिया था। ग़ौरतलब है कि वह उस पीठ की एकमात्र महिला सदस्य भी थीं। उन्होंने कहा था:

“देश में पंथनिरपेक्ष माहौल बनाये रखने के लिये गहराई तक धार्मिक आस्थाओं से जुड़े विषयों के साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। सामाजिक कुरीतियों से इतर यह तय करना अदालत का काम नहीं है कि कौन सी धार्मिक परंपराएँ खत्म की जाएँ। भगवान अय्यप्पा के श्रद्धालुओं के पूजा करने के अधिकार के साथ समानता के अधिकार का टकराव हो रहा है। इस मामले में मुद्दा सिर्फ सबरीमाला तक सीमित नहीं है। इसका अन्य धार्मिक स्थलों पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।”

अगर मोहन भागवत के बयानों की जस्टिस इंदु मल्होत्रा के बहुमत के विपरीत दिए गए निर्णय से तुलना करें तो पता चलता है कि दोनों के बयान काफ़ी मिलते-जुलते हैं। जस्टिस मल्होत्रा का कहना था कि इसका प्रभाव अन्य धार्मिक स्थलों पर भी पड़ेगा। उनका यह डर बेवज़ह नहीं था। कुछ दिनों पहले ही प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक जे नंदकुमार ने भी इसी प्रकार का डर जताते हुए कहा था कि अगर इस साजिश को सीमा से परे ले जाया गया तो देश के अन्य मंदिर और उनकी पूजा प्रणाली भी इस से अछूते नहीं रहेंगे

वामपंथी ताक़तों पर प्रहार

संघ प्रमुख ने वामपंथी ताक़तों पर करारा प्रहार करते हुए JNU प्रकरण व ऐसे अन्य घटनाओं की तरफ भी इशारा किया। उन्होंने कहा:

भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह बोलने वाले साथ मिलकर हमारे समाज में महिला-पुरुष में भेदभाव की बात लोगों के दिमाग में फैलने का काम कर रहे हैं। यह कपट है। राजनीतिक विवाद के कारण समाज को तोड़कर वोटों की कटाई करने वाले लोग ऐसा कर रहे हैं।”

ज्ञात हो कि केरल में वामपंथी पार्टी CPI (M) की ही सरकार है। केरल की लगभग सभी विपक्षी पार्टियाँ श्रद्धालुओं के साथ कड़ी नज़र आ रही हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर पर भले ही अदालत के निर्णय का स्वागत किया हो लेकिन पार्टी की राज्य ईकाई शुरुआत से ही केरल सरकार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा रही है। राहुल गाँधी का बयान इस मामले में भी बदलता ही रहा है और हाल के बयानों में उन्होंने श्रद्धालुओं का समर्थन भी किया था। भाजपा की बात करें तो, पार्टी और उसके तमाम बड़े नेता एकमत से श्रद्धालुओं की वकालत करते रहे हैं।

संघ प्रमुख के बयान से उनका सन्देश साफ़ झलकता है। उनके बयान का सीधा अर्थ यह है कि राजनीति और वोटों के खेल के लिए हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका मामना है कि ऐसे सदियों पुराने परंपरा पर किसी भी प्रकार का निर्णय लेने से पहले जान-भावनाओं का ख़्याल रखा जाना चाहिए।

यह पूरे भारत की लड़ाई है

केरल के श्रद्धालुओं को मोहन भागवत ने यह सन्देश भी देने की कोशिश की है कि उनकी इस लड़ाई में पूरा देश उनके साथ है, वो अलग-थलग नहीं हैं। भगवान अयप्पा को पूरे भारत द्वारा पूजे जाने की बात कह कर उन्होंने केरल के लोगों को ढाढस बंधाया है कि उनकी लड़ाई राष्ट्रीय स्तर की है, एक ही मंदिर, राज्य या सम्प्रदाय तक सीमित नहीं है। संघ प्रमुख का कि ‘सम्पूर्ण भारत के नागरिकों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाएगा’, यह दिखता है कि संघ इस मामले में कमर कस चुका है।

संघ प्रमुख की सोच यह है कि अभी भी भारत के अधिकतर हिस्सों में ऐसे लोग हैं, जो सबरीमाला को केवल एक राज्य या मंदिर की समस्या समझते हैं। उनका कहना है कि हिन्दू सगठनों ने पूरे देश को इस से अवगत कराने की बात कह इस मुद्दे को पूरी तरह राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की तैयारी का संकेत दिया है। सार यह है कि अयप्पा किसी पंथ विशेष के देवता नहीं हैं, सम्पूर्ण हिन्दू समाज के हैं। सबरीमाला मंदिर समस्या सिर्फ एक मंदिर की नहीं है, अन्य धार्मिक स्थलों पर भी इसके परिणाम होंगे। और अंत में, यह मुट्ठी भर श्रद्धालुओं की लड़ाई नहीं है, पूरे देश के हिन्दुओं की है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हिंदू धर्म और RSS का उड़ाया मजाक: मीडिया गिरोह ने मुक्ति को मौत से जोड़ा, वीडियो से खुल गई इनकी पोल

स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए चिश्ती ने आश्चर्य जताया कि क्या कॉन्ग्रेस-मुक्त-भारत में 'मुक्त' वास्तव में 'मौत' के लिए इस्तेमाल किया गया है।

ईद में तिरंगा बिछाया, उसके ऊपर खाना खाया: असम में 6 गिरफ्तार, रेजिना परवीन सुल्ताना के घर हो रही थी दावत

असम पुलिस ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि अभयपुरी के टेंगनामारी गाँव की रेजिना परवीन सुल्ताना के घर में डाइनिंग टेबल पर भारतीय ध्वज...

कॉन्ग्रेस नेता और बॉक्सर विजेंद्र सिंह Randya पर फँसे: घेर रहे थे BJP को, अब ‘गाली नहीं है’ पर दूसरे दे रहे सफाई

कॉन्ग्रेस नेता व बॉक्सर विजेंद्र सिंह ट्विटर पर किए गए एक आपत्तिजनक ट्वीट को लेकर फँस गए हैं। कॉन्ग्रेस नेता ने Randya लिख कर...

Tauktae का कहर, 6 की मौत: कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा में भारी बारिश, प्रभावित राज्यों के CM के साथ गृहमंत्री की बैठक

अरब सागर में बने चक्रवाती तूफान Tauktae ने पश्चिमी भारत के समुद्री तटों पर दस्तक दे दी है। इसकी वजह गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा समेत...

इजराइली बेबस बाप की गोद में बेटी और आसमान में फटता रॉकेट: रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो वायरल

यह वीडियो फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास द्वारा किए गए हमले का है। आप इस वीडियो में देख सकते हैं कि किस तरह एक बेबस पिता..

हमास और PIJ के टॉप 30+ आतंकियों को उड़ा दिया: नाम और फोटो के साथ इजराइल ने कहा – अभी और मारेंगे

इजराइल और हमास के बीच खूनी संघर्ष सातवें दिन भी जारी है। इजराइल डिफेंस फोर्स ने 30 से अधिक हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहादियों को...

प्रचलित ख़बरें

ईद पर 1 पुलिस वाले को जलाया जिंदा, 46 को किया घायल: 24 घंटे के भीतर 30 कट्टरपंथी मुस्लिमों को फाँसी

ईद के दिन मुस्लिम कट्टरपंथियों ने 1 पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की, उन्हें जिंदा जला दिया। त्वरित कार्रवाई करते हुए 30 को मौत की सजा।

पैगंबर मोहम्मद की दी दुहाई, माँगा 10 मिनट का समय: अल जजीरा न्यूज चैनल बिल्डिंग के मालिक को अनसुना कर इजरायल ने की बमबारी

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि बिल्डिंग का मालिक इजरायल के अधिकारी से 10 मिनट का वक्त माँगता है। वो कहता है कि चार लोग बिल्डिंग के अंदर कैमरा और बाकी उपकरण लेने के लिए अंदर गए हैं, कृपया तब तक रुक जाएँ।

ईद में नंगा नाच: 42 सदस्यीय डांस ग्रुप की लड़कियों को नंगा नचाया, 800 की भीड़ ने खंजर-कुल्हाड़ी से धमकाया

जब 42-सदस्यीय ग्रुप वहाँ पहुँचा तो वहाँ ईद के सांस्कृतिक कार्यक्रम जैसा कोई माहौल नहीं था। जब उन्होंने कुद्दुस अली से इस बारे में बात की तो वह उन्हें एक संदेहास्पद स्थान पर ले गया जो हर तरफ से लोहे की चादरों से घिरा हुआ था। यहाँ 700-800 लोग लड़कियों को घेर कर खंजर से...

इजरायली सेना ने अल जजीरा की बिल्डिंग को बम से उड़ाया, सिर्फ 1 घंटे की दी थी चेतावनी: Live Video

गाजा में इजरायली सेना द्वारा अल जजीरा मीडिया हाउस की बिल्डिंग पर हमला किया गया है। यह बिल्डिंग पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।

इजरायल के विरोध में पूर्व पोर्न स्टार मिया खलीफा: ट्वीट कर बुरी तरह फँसीं, ‘किसान’ प्रदर्शन वाला ‘टूलकिट’ मामला

इजरायल और फिलिस्तीनी आंतकियों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पूर्व पोर्न-स्टार मिया खलीफा ने गलती से इजरायल के विरोध में...

इजरायली रॉकेट से मरीं केरल की सौम्या… NDTV फिर खेला शब्दों से, Video में कुछ और, शीर्षक में जिहादियों का बचाव

केरल की सौम्या इजरायल में थीं, जब उनकी मौत हुई। वह अपने पति से बात कर रही थीं, तभी फिलिस्तीनी रॉकेट उनके पास आकर गिरा। लेकिन NDTV ने...
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,376FansLike
94,907FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe