Tuesday, March 9, 2021
Home विचार मीडिया हलचल Zee न्यूज की मरकज के साथ तुलना केवल कुंठा... जमात के गुनाहों पर पर्दा...

Zee न्यूज की मरकज के साथ तुलना केवल कुंठा… जमात के गुनाहों पर पर्दा डालने का और तरीका तलाशो लिबरलों

zee न्यूज में कोरोना संक्रमण का पहला केस आने के बाद फौरन संस्थान की ओर से स्टेटमेंट जारी की गई और सारे हालातों से दर्शकों को अवगत कराया गया। लेकिन मरकज में संक्रमण फैलने के बाद हालात को छिपाने की पूरी कोशिश की गई।

बीते दिनों हमने सोशल मीडिया पर देखा कि कैसे जी न्यूज (zee news) में कोरोना संक्रमण की सूचना ने लिबरलों को ऑकसीजन देने का काम किया। हमने देखा कि किस तरह से जी न्यूज के कर्मचारियों के संक्रमित होने की सूचना पाते ही वामपंथी गिरोह ने इस खबर को प्रमुखता से अपनी टाइमलाइन पर ब्रेकिंग न्यूज की तरह चलाया। संस्थान के लिए ‘छी’ न्यूज जैसे शब्द इस्तेमाल कर वहाँ काम कर रहे सभी कर्मचारियों का मखौल उड़ाया।

वामपंथियों की टाइमलाइन पर zee news में संक्रमितों लोगों की संख्या गिनने की उत्सुकता इतनी देखने को मिली, जैसे कोई पुरानी मुराद ने अपना असर दिखाया हो। नैतिकता का पाठ पढ़ाते-पढ़ाते पूरा गिरोह जी न्यूज और सुधीर चौधरी को घेरने लगा। तबलीगी जमात की करतूतों पर सवाल उठाने के कारण संस्थान के कर्मचारियों की स्थिति को मरकज के जमातियों से भी तौला गया।

न्यूजलॉन्ड्री तो इतना उत्साहित हुआ कि अपना एजेंडा चलाने के लिए जी न्यूज की अंदरुनी सच्चाई के नाम पर सुधीर चौधरी के ख़िलाफ़ पूरा एक आर्टिकल लिख डाला। उनके ख़िलाफ़ घृणा की उलटी कर डाली और अंत में इस बात को भी जोड़ दिया कि वो वास्तिविक स्थिति को जानने के लिए सुधीर चौधरी से बात करने की कोशिश कर रहे हैं, पर उनका फोन स्विच ऑफ हैं। इसलिए जब भी उनसे या संस्थान के एचआर से बात होगी वो आर्टिकल को अपडेट कर देंगे। 

अब आखिर ये शुभ काम कब होगा? किसी को नहीं पता और ये बात भी कोई नहीं जानता कि यदि सुधीर चौधरी या जी न्यूज का एचआर उनके लेख (एजेंडे) से उलट जवाब में कोई बात कह देंगे तो क्या आर्टिकल की पूरी भाषा दोबारा बदली जाएगी या फिर बदले हुए नाम वाले कर्मचारियों को सत्यापित करवाया जाएगा जिनकी आड़ में न्यूज़लॉन्ड्री ने ये आरोप लगाए हैं?

खैर! सोशल मीडिया पर इस समय इस आर्टिकल को खूब शेयर किया जा रहा है और वामपंथी भी अपनी अद्भुत लेखन शैली से पाठकों पर प्रभाव छोड़ने के लिए zee news के नाम पर तरह-तरह की बातें कर रहे हैं। मगर, इन बुद्धिजीवियों की बातों में एक चीज जो हर जगह सबसे सामान्य देखने को मिल रही है। वो ये कि ये लोग जी न्यूज में पाए गए कोरोना संक्रमितों के लिए या तो बहुत खुश हैं या फिर तबलीगी जमातियों के बराबर में रखकर उनसे संवेदना व्यक्त कर रहे हैं और सुधीर चौधरी को भाईचारे का मतलब समझा रहे है।

किंतु विचार करने वाली बात ये है कि भ्रामक शब्दों के जाल में फँसकर क्या वाकई तबलीगी जमातियों की ‘हरकत’ को zee news के कर्मचारियों की ‘स्थिति’ के साथ तौला जा सकता है? क्या वाकई कोरोना योद्धाओं को कोरोना बम कहकर बुलाया जा सकता है? नहीं, बिल्कुल भी नहीं।

दरअसल, 15 मई के बाद से शुरू हुई ये तुलना केवल उस कुँठा की उपज है, जिसमें गिरोह सदस्य के लोग पिछले महीने से ही झुलस रहे थे और बहुत चाहने के बाद भी जमातियों की करतूत को जस्टिफाई नहीं कर पा रहे थे। मगर, आज जब एक ऐसा मीडिया संस्थान महामारी की चपेट में आया, जिसने जमातियों के ख़िलाफ़ खुलकर रिपोर्टिंग की, तो इन लोगों को संवेदनाओं के नाम पर खेलने का मौका मिल गया। 

इन बिंदुओं पर गौर करिए और खुद फैसला करिए कि तबलीगी जमात के सदस्यों के गुनाह को आखिर कोई बिना एजेंडा के कैसे जी न्यूज के कर्मचारियों से जोड़ सकता है…

  1. जी न्यूज एक मीडिया संस्थान है और ये बात सब जानते हैं कि कोरोना संकट में मीडियाकर्मियों को ‘कोरोना योद्धाओं’ की श्रेणी में रखा गया है। उन्हें अपना काम रोकने से मनाही नहीं है। ऐसे समय में जब हर सेक्टर वर्क फ्रॉम करने के लिए बाध्य है, उस समय पत्रकारिता जगत से जुड़े लोगों को पूरा अधिकार है कि वह अपने दर्शकों को, पाठकों को यथास्थिति से अवगत कराने के लिए प्रयासरत रहें। 
    लेकिन, निजामुद्दीन स्थित मरकज- एक मजहबी स्थल है, जहाँ कोरोना के हालात जानने के बाद भी लोगों को मजहब के नाम पर जबरन रोका गया और अल्लाह का हवाला देकर समझाया गया कि मरना है तो यही मरो, इससे बढ़िया जगह कोई और होगी क्या?
  1. जी न्यूज में कोरोना संक्रमण का पहला केस आने के बाद फौरन संस्थान की ओर से स्टेटमेंट जारी की गई और सारे हालातों से दर्शकों को अवगत कराया गया।
    लेकिन मरकज में संक्रमण फैलने के बाद हालातों को छिपाने की पूरी कोशिश हुई। बात यहाँ तक बिगड़ गई कि जब प्रशासन खुद संक्रमण के बारे में पता करने इलाके में पहुँची तो स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस को भगा दिया।
Image
कर्मचारियों के संक्रमित होने पर zee news की प्रतिक्रिया
  1. जी न्यूज में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने के बाद सुधीर चौधरी खुद सामने आए। उन्होंने संस्थान में बिगड़े हालातों को स्वीकारा, उन्होंने कहा कि हो सकता है जिस तरह की परिस्थिति बन गई है, उसमें स्वयं भी कोरोना संक्रमित हो जाएँ।
    लेकिन, मरकज के मामले में अपने कुकर्मों की पोल खुलते ही मौलाना साद फरार हो गया और आज भी दिल्ली पुलिस को उसे ढूँढने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है, जगह-जगह छापे मारने पड़ रहे हैं, बार-बार ये कहना पड़ रहा है कि वह कोरोना चेक टेस्ट करवाकर सामने आए।
  1. न्यूजलॉन्ड्री के आर्टिकल के हिसाब से संस्थान में कई कर्मचारी हैं जिन्होंने अपने बूते कोरोना का टेस्ट कराया। हालाँकि, एजेंडा चलाने के लिए उन्होंने इस बात को कैसे प्रेषित किया, ये दूसरा विषय है। लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि कर्मचारियों ने स्थिति को समझते हुए, सतर्कता बरतते हुए अपना बीड़ा खुद उठाया। 
    मरकज से निकाले गए लोगों के कारनामों को याद करिए। जब प्रशासन ने जमातियों को अस्पताल में भर्ती करवाया, उन्होंने प्रशासन की नाक में दम कर डाला।
  1. जी न्यूज के कर्मचारियों की स्थिति को मरकज के जमातियों से तौलने से पहले उन घटनाओं को भी याद रखने की जरूरत है, जब अस्पताल में भर्ती होने के बाद जमाती नर्सों के सामने नंगे घूमते दिखाई दिए। पैंट उतारकर अश्लील हरकतें की। क्वारंटाइन सेंटर में गंदगी फैलाई। मौका देखकर डॉक्टरों पर हमला करने से भी नहीं चूके।  
    क्या 15 मई के बाद से हम में से किसी ने भी तबलीगियों की तरह जी न्यूज के कर्मचारियों को ये उत्पात मचाते देखा। या फिर सुधीर चौधरी को इस मामले पर कुछ कहने से बचते देखा? 

ये बात बिलकुल सच है कि कोरोना महामारी का ये समय वो काल है जब हर किसी को अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना है। मगर, उसी बीच इस बात को भी ध्यान रखना है कि हमारे कारण किसी अन्य को नुकसान न पहुँचे। जी न्यूज के प्रत्येक कर्मचारी ने इस बात को अपने बूते सार्थक किया। साथ ही प्रोफेशन के लिए प्रतिबद्धता और अपने काम के प्रति लगन का उदहारण पेश किया।

इसलिए, उनका इस संकट की चपेट में आना केवल बने-बनाए हालातों का परिणाम है या ये कहें एक दुर्घटना है। किंतु मरकज के कारण जो पूरे देश कोरोना तेजी से फैला, वह समुदाय विशेष के बीच फैली धूर्तता व कट्टरपंथ का नमूना है।  

यहाँ बता दें, सोशल मीडिया पर इस समय जी न्यूज को मरकज से जोड़ने के लिए उसको ‘जी मरकज’ जैसे शब्दों की उलाहना भी दी जा रही है, जिसपर सुधीर चौधरी ने खुद सफाई दी है कि उनका ऑफिस नोएडा प्रशासन द्वारा पिछले फ्राइडे को ही सील किया जा चुका है और जिन्हें यकीन नहीं है वे खुद आधिकारिक बयान को पढ़ लें और झूठ के कारोबार को विराम दें।

आखिर में सिर्फ़ ये बात याद रखने वाली है कि अपवाद हर जगह पर होते हैं। मरकज में भी थे। जी न्यूज में भी रहे होंगे।  किंतु, अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वाहन करते हुए कौन दो व्यक्ति, कौन से दो संस्थान, समाज के भले के लिए कैसा बर्ताव कर रहे हैं, बस यही बिंदु उन्हें समांतर रखते हुए तुलना के योग्य बनाता है। वरना अगर दो अलग-अलग प्रवृति की किन्हीं चीजों को बराबर रखा जाता है, उनपर एक साथ बात की जाती है, तो उसे समानता नहीं बल्कि अंतर कहते हैं। जैसे जी न्यूज और तबलीगी जमातियों को लेकर ऊपर हमने बिंदुवार बताया है।

हम ये बात मानते हैं कि मरकज में बहुत से जमाती रहे होंगे जिन्हें कोरोना का मालूम पड़ते ही वह वहाँ से भागने को विचलित हो उठे। लेकिन सच ये भी है कि अधिकांश जमाती छुप-छुपकर अपने घर लौटे व बात खुलने पर सामने नहीं आए। इस क्रम में पढ़े लिखे डॉक्टर से लेकर विदेश से आए लोग भी शामिल थे। तो बताइए, कैसे मरकज की स्थिति एक ऐसे मीडिया संस्थान से जोड़ने के लायक है, जहाँ कर्मचारी केवल अपने प्रोफेशन के साथ इसलिए ईमानदारी से लगे हुए थे, क्योंकि प्रशासन ने उन्हें इसकी इजाजत दी थी।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘सोनिया जी रोई या नहीं? आवास में तो मातम पसरा होगा’: बाटला हाउस केस में फैसले के बाद ट्रोल हुए सलमान खुर्शीद

"सोनिया गाँधी, दिग्वियजय सिंह, सलमान खुर्शीद, अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों जिन्होंने बाटला हाउस एनकाउंटर को फेक बताया था, इस फैसले के बाद पुलिसवालों के परिवार व पूरे देश से माफी माँगेंगे।"

मिथुन दा के बाद क्या बीजेपी में शामिल होंगे सौरभ गांगुली? इंटरव्यू में खुद किया बड़ा खुलासा: देखें वीडियो

लंबे वक्त से अटकलें लगाई जा रही हैं कि बंगाल टाइगर के नाम से प्रख्यात क्रिकेटर सौरव गांगुली बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। गांगुली ने जो कहा, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दादा का विचार राजनीति में आने का है।

सलमान खुर्शीद ने दिखाई जुनैद की तस्वीर, फूट-फूट कर रोईं सोनिया गाँधी; पालतू मीडिया गिरते-पड़ते पहुँची!

पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के एक तस्वीर लेकर 10 जनपथ पहुँचने की वजह से सारा बखेड़ा खड़ा हुआ है।

‘भारत की समृद्ध परंपरा के प्रसार में सेक्युलरिज्म सबसे बड़ा खतरा’: CM योगी की बात से लिबरल गिरोह को सूँघा साँप

सीएम ने कहा कि भगवान श्रीराम की परम्परा के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित किया जाना चाहिए।

‘बलात्कार पीड़िता से शादी करोगे’: बोले CJI- टिप्पणी की हुई गलत रिपोर्टिंग, महिलाओं का कोर्ट करता है सर्वाधिक सम्मान

बलात्कार पीड़िता से शादी को लेकर आरोपित से पूछे गए सवाल की गलत तरीके से रिपोर्टिंग किए जाने की बात चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कही है।

असमी गमछा, नागा शाल, गोंड पेपर पेंटिंग, खादी: PM मोदी ने विमेंस डे पर महिला निर्मित कई प्रॉडक्ट को किया प्रमोट

"आपने मुझे बहुत बार गमछा डाले हुए देखा है। यह बेहद आरामदायक है। आज, मैंने काकातीपापुंग विकास खंड के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाया गया एक गमछा खरीदा है।"

प्रचलित ख़बरें

मौलाना पर सवाल तो लगाया कुरान के अपमान का आरोप: मॉब लिंचिंग पर उतारू इस्लामी भीड़ का Video

पुलिस देखती रही और 'नारा-ए-तकबीर' और 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगा रही भीड़ पीड़ित को बाहर खींच लाई।

‘मासूमियत और गरिमा के साथ Kiss करो’: महेश भट्ट ने अपनी बेटी को साइड ले जाकर समझाया – ‘इसे वल्गर मत समझो’

संजय दत्त के साथ किसिंग सीन को करने में पूजा भट्ट असहज थीं। तब निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी बेटी की सारी शंकाएँ दूर कीं।

‘हराम की बोटी’ को काट कर फेंक दो, खतने के बाद लड़कियाँ शादी तक पवित्र रहेंगी: FGM का भयावह सच

खतने के जरिए महिलाएँ पवित्र होती हैं। इससे समुदाय में उनका मान बढ़ता है और ज्यादा कामेच्छा नहीं जगती। - यही वो सोच है, जिसके कारण छोटी बच्चियों के जननांगों के साथ इतनी क्रूर प्रक्रिया अपनाई जाती है।

14 साल के किशोर से 23 साल की महिला ने किया रेप, अदालत से कहा- मैं उसके बच्ची की माँ बनने वाली हूँ

अमेरिका में 14 साल के किशोर से रेप के आरोप में गिरफ्तार की गई ब्रिटनी ग्रे ने दावा किया है कि वह पीड़ित के बच्चे की माँ बनने वाली है।

आज मनसुख हिरेन, 12 साल पहले भरत बोर्गे: अंबानी के खिलाफ साजिश में संदिग्ध मौतों का ये कैसा संयोग!

मनसुख हिरेन की मौत के पीछे साजिश की आशंका जताई जा रही है। 2009 में ऐसे ही भरत बोर्गे की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी।

‘ठकबाजी गीता’: हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अकील कुरैशी ने FIR रद्द की, नहीं माना धार्मिक भावनाओं का अपमान

चीफ जस्टिस अकील कुरैशी ने कहा, "धारा 295 ए धर्म और धार्मिक विश्वासों के अपमान या अपमान की कोशिश के किसी और प्रत्येक कृत्य को दंडित नहीं करता है।"
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,347FansLike
81,968FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe