Tuesday, June 22, 2021
Home विचार मीडिया हलचल 'द वायर' हो या 'स्क्रॉल', बंगाल में TMC की हिंसा पर ममता की निंदा...

‘द वायर’ हो या ‘स्क्रॉल’, बंगाल में TMC की हिंसा पर ममता की निंदा की जगह इसे जायज ठहराने में व्यस्त है लिबरल मीडिया

उम्मीद की जाती है कि एक 'विश्लेषक' निष्पक्ष होगा लेकिन NDTV पर ऐसा नहीं होता। असली बात तो ये है कि न मुख्यधारा की मीडिया और न ही इन बुद्धिजीवियों को पश्चिम बंगाल की कोई चिंता है। ये बुद्धिजीवी और मुख्यधारा के मीडिया संस्थान इस मामले में मिलजुल कर तय करते हैं कि कौन सी हिंसा 'सही' है और कौन गलत।

पश्चिम बंगाल में रविवार (मई 2, 2021) को मतगणना के बाद चुनाव परिणामों में TMC की जीत क्या हुई, उसके गुंडों ने राज्य भर के कई इलाकों में भाजपा के दफ्तरों को जलाने से लेकर कार्यकर्ताओं की हत्या और उनके घरों को तहस-नहस करना शुरू कर दिया। इस बीच लिबरल मीडिया क्या कर रहा है? उसका पूरा जोर इन घटनाओं को छिपाने, इन्हें सही ठहराने या फिर इनके महिमामंडन पर ही है।

आइए, देखते हैं कि लिबरल गिरोह के कुख्यात मीडिया संस्थान ‘स्क्रॉल’ और ‘द वायर’ ने बंगाल हिंसा पर क्या लिखा। दोनों ने जो लेख लिखे, वो एक तरह से एक ही लाइन पर थे और उनका उद्देश्य था कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल के गुंडों द्वारा की जा रही हिंसा को ‘महज पार्टी पॉलिटिक्स’ बता कर ख़ारिज करना। ऐसा दिखाना जैसे ये सामान्य घटनाक्रम हो। ‘स्क्रॉल’ ने लिखा, “क्यों बंगाल में नतीजों के बाद हो रही हिंसा को भाजपा द्वारा सांप्रदायिक बताना गलत है।”

‘द वायर’ ने अनुमान लगा लिया कि ये एकतरफा नहीं है

ये हेडलाइन ही ‘द वायर’ के नैरेटिव की पोल खोल देता है। ये दिखाना चाह रहा है कि हिंसा अगर सांप्रदायिक है तो वो बहुत बुरी है और बाकी तो जैसे ठीक है। ये नैरेटिव न सिर्फ दोहरी रणनीति से भरा है, बल्कि देश के तथाकथित अभिजात्य वर्ग की मानसिकता को दिखाता है। इसने बंगाल में हो रही हिंसा की न तो निंदा की है और न ही उसे गलत बताया है। इसका सारा जोर भाजपा द्वारा इसे सांप्रदायिक बताए जाने के आरोपों पर है।

इस लेख में लिखा है, “फलाँ-फलाँ कारण हैं जो बताता है कि भाजपा का इन दंगों को सांप्रदायिक बताना गलत है। सभी समुदायों के लोगों पर हमले हुए हैं – हिन्दू या मुस्लिम। ये भाजपा के दावों के विपरीत है। एक ही पैटर्न है इस हिंसा का और वो है राजनीतिक।” इस लेख में इसने ये तक माना है कि हिंसा के पीछे तृणमूल कॉन्ग्रेस ही है। लेकिन, इसका जोर इस पर न होकर इस हिंसा के ‘सांप्रदायिक न होने’ के दावे को साबित करने पर है।

‘द वायर’ आखिर क्या सन्देश देना चाहता है? यही कि हमें बंगाल में हो रही हिंसा को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए और न ही इसके खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए, क्योंकि ये सांप्रदायिक नहीं है इनके हिसाब से? क्या जिन भाजपा, कॉन्ग्रेस और CPI(M) कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, उनके परिजनों को ये सोच कर अच्छा महसूस करना चाहिए कि ये हिंसा ‘सांप्रदायिक’ नहीं थी। इसका नैतिकता से कोई लेना-देना नहीं है।

न सिर्फ नैतिक रूप से, बल्कि कानूनन भी ये गलत है। ये मुख्यधारा की मीडिया के जरिए एक ऐसी दुनिया और एक ऐसा माहौल बनाने पर उतारू हैं, जहाँ ये तय करेंगे कि कौन सी हिंसा जायज है और कौन सी बुरी। अमेरिका में एंटीफा भी इसी तरह काम करता है, जो हिंसा के सहारे ‘बदला’ लेता है और अपने खूनी लक्ष्य को प्राप्त करने की कोशिश करता है। कुछ ही महीनों पहले एक एंटीफा के आरोपित को यूएस के पुलिस स्टेशन को जलाने के आरोप में 4 साल की जेल हुई

एंटीफा भी एक कट्टर वामपंथी संगठन ही तो है। उन्हें लगता है कि हिंसा और तबाही से ही लक्ष्य मिलेगा। इसी तरह ‘स्क्रॉल’ का लेख भी हास्यास्पद तरीके से बंगालियों का उनकी पसंदीदा पार्टियों के प्रति प्रतिबद्धता होती है लेकिन जाति या धर्म को लेकर नहीं। किसी प्राकृतिक कानून, धार्मिक सिद्धांत या नैतिकता के हवाले से ऐसा नहीं कहा जा सकता कि उस हिंसा में मरने वालों को न्याय नहीं मिलना चाहिए, जो ‘सांप्रदायिक’ न हो।

इस लेख में कहा गया है कि बंगाल में 1977 के आसपास इस तरह की पार्टी पॉलिटिक्स और राजनीतिक पहचान का खेल शुरू हुआ और उनके जीवन में धर्म और जाति के नाम पर पहचान का मुद्दा पीछे हट गया। ‘द वायर’ के लेख में ममता बनर्जी की इस हिंसा के लिए ज़रूर नाममात्र की आलोचना की गई है लेकिन साथ सी उन्हें न सिर्फ ‘मजबूत फाइटर’, बल्कि ‘घृणा को हराने वाली’ भी बताया गया है।

ये सब तब किया जा रहा है, जब TMC के गुंडे न सिर्फ भाजपा और कॉन्ग्रेस, बल्कि CPI(M) के कार्यकर्ताओं को भी निशाना बना रहे हैं। इस हिंसा को जायज ठहराने की लिबरल मीडिया के प्रयासों का यहीं अंत नहीं होता है, बल्कि NDTV पर ‘राजनीतिक विश्लेषक’ के रूप में प्रोफेसर अनन्या चक्रवर्ती ने यहाँ तक दावा कर डाला कि बंगाल में इससे पहले राजनीतिक हिंसा हुई ही नहीं है। इस बात को TMC ही नकार देगी, जो खुद कभी लेफ्ट की हिंसा की शिकार रही है।

वैसे उम्मीद की जाती है कि एक ‘विश्लेषक’ निष्पक्ष होगा लेकिन NDTV पर ऐसा नहीं होता। असली बात तो ये है कि न मुख्यधारा की मीडिया और न ही इन बुद्धिजीवियों को पश्चिम बंगाल की कोई चिंता है। ये बुद्धिजीवी और मुख्यधारा के मीडिया संस्थान इस मामले में मिलजुल कर तय करते हैं कि कौन सी हिंसा ‘सही’ है और कौन गलत। इनके लिए एक दलित व्यक्ति पर मुस्लिम भीड़ के हमले की कोई कीमत नहीं लेकिन कोई सवर्ण किसी दलित पर हमला करे तो ये बड़ा मुद्दा है।

ये सब उस मीडिया में हो रहा है, जहाँ पश्चिम बंगाल से हमेशा से अच्छा प्रतिनिधित्व रहा है। ज्योति बासु की कम्युनिस्ट सरकार ने किस तरह से दलितों का नरसंहार करवाया था, उसे भुला दिया गया है। ये लोग मरीचझांपी नरसंहार को याद नहीं करते, क्योंकि ये ‘सेक्युलर वामपंथी’ सरकार ने करवाया था, ‘हिंदुत्व की ताकतों’ ने नहीं। लेकिन नहीं, ये ‘जायज’ है क्योंकि ये कम्युनल थोड़े था, कम्युनिस्ट था न। ‘स्क्रॉल’ और ‘द वायर’ को नए लेख लिख कर इसे स्पष्ट करना चाहिए।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

भारत ने कोरोना संकटकाल में कैसे किया चुनौतियों का सामना, किन सुधारों पर दिया जोर: पढ़िए PM मोदी का ब्लॉग

भारतीय सार्वजनिक वित्त में सुधार के लिए हल्का धक्का देने वाली कहानी है। इस कहानी के मायने यह हैं कि राज्यों को अतिरिक्त धन प्राप्त करने के लिए प्रगतिशील नीतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

पल्स पोलियो से टीके को पिटवा दिया अब कॉन्ग्रेस के कोयला स्कैम से पिटेगी मोदी की ईमानदारी: रवीश कुमार

ये व्यक्ति एक ऐसा फूफा है जो किसी और के विवाह में स्वादिष्ट भोजन खाकर यह कहने में जरा भी नहीं हिचकेगा कि; भोजन तो बड़ा स्वादिष्ट था लेकिन अगर नमक अधिक हो जाता तो खराब हो जाता। हाँ, अगर विवाह राहुल गाँधी का हुआ तो...

TMC के गुंडों ने किया गैंगरेप, कहा- तेरी काली माँ न*गी है, तुझे भी न*गा करेंगे, चाकू से स्तन पर हमला: पीड़ित महिलाओं की...

"उस्मान ने मेरा रेप किया। मैं उससे दया की भीख माँगती रही कि मैं तुम्हारी माँ जैसी हूँ मेरे साथ ऐसा मत करो, लेकिन मेरी चीख-पुकार उसके बहरे कानों तक नहीं पहुँची। वह मेरा बलात्कार करता रहा। उस दिन एक मुस्लिम गुंडे ने एक हिंदू महिला का सम्मान लूट लिया।"

‘भारत ने किया कश्मीर पर कब्जा, इस्लाम ने दिखाई सही राह’: TISS में प्रकाशित हुए कई विवादित पेपर, फण्ड रोकने की माँग

पेपर में लिखा गया, "...अल्लाह के शरण में जाना मेरे मन को शांत करता है और साथ ही मुझे एक समझ देता है कि चीजों के होने का उद्देश्य क्या था जो मुझे कहीं और से नहीं पता चलता।"

‘नंदलाला की #$ गई क्या’- रैपर MC कोड के बाद अब मफ़ाद ने हिन्दुओं की आस्था को पहुँचाई चोट, भगवान कृष्ण को दी गालियाँ

रैपर ने अगली पंक्ति में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए बेहद आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया जैसे, "मर गया तेरा नंदलाल नटखट, अब गोपियाँ भागेंगी छोड़के पनघट।"

मॉरीशस के थे तुलसी, कहते थे सब रामायण गुरु: नहीं रहे भारत के ‘सांस्कृतिक दूत’ राजेंद्र अरुण

1973 में 'विश्व पत्रकारिता सम्मेलन' में वो मॉरीशस गए और वहाँ के तत्कालीन राष्ट्रपति शिवसागर रामगुलाम हिंदी भाषा को लेकर उनके प्रेम से खासे प्रभावित हुए। वहाँ की सरकार ने उनसे वहीं रहने का अनुरोध किया।

प्रचलित ख़बरें

टीनएज में सेक्स, पोर्न, शराब, वन नाइट स्टैंड, प्रेग्नेंसी… अनुराग कश्यप ने बेटी को कहा- जैसी तुम्हारी मर्जी

ब्वॉयफ्रेंड के साथ सोने के सवाल पर अनुराग ने कहा, "यह तुम्हारा अपना डिसीजन है कि तुम किसके साथ रहती हो। मैं केवल इतना चाहता हूँ कि तुम सेफ रहो।"

‘एक दिन में मात्र 86 लाख लोगों को वैक्सीन, बेहद खराब!’: रवीश कुमार के लिए पानी पर चलने वाले कुत्ते की कहानी

'पोलियो रविवार' के दिन मोदी सरकार ने 9.1 करोड़ बच्चों को वैक्सीन लगाई। रवीश 2012 के रिकॉर्ड की बात कर रहे। 1950 में पहला पोलियो वैक्सीन आया, 62 साल बाद बने रिकॉर्ड की तुलना 6 महीने बाद बने रिकॉर्ड से?

‘तुम्हारे शरीर के छेद में कैसे प्लग लगाना है, मुझे पता है’: पूर्व महिला प्रोफेसर का यौन शोषण, OpIndia की खबर पर एक्शन में...

कॉलेज के सेक्रेटरी अल्बर्ट विलियम्स ने उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। जोसेफिन के खिलाफ 60 आरोप लगा कर इसकी प्रति कॉलेज में बँटवाई गई। एंटोनी राजराजन के खिलाफ कार्रवाई की बजाए उन्हें बचाने में लगा रहा कॉलेज प्रबंधन।

वो ब्राह्मण राजा, जिनका सिर कलम कर दिया गया: जिन मुस्लिमों को शरण दी, उन्होंने ही अरब से युद्ध में दिया धोखा

राजा दाहिर ने जब कई दिनों तक शरण देने की एवज में खलीफा के उन दुश्मनों से मदद माँगी, तो उन्होंने कहा, "हम आपके आभारी हैं, लेकिन हम इस्लाम की फौज के खिलाफ तलवार नहीं उठा सकते। हम जा रहे हैं।"

हिंदू से धर्मान्तरण कर बना मोहम्मद उमर गौतम, चला रहा था दिल्ली के जामिया से मुस्लिम बनाने का रैकेट: कई बड़े खुलासे

उमर गौतम द्वारा स्थापित इस्लामिक दावा सेंटर में ही गैर मुस्लिमों का धर्मान्तरण कराया जाता था। मोहम्मद उमर अपने चार मंजिला घर को ही ऑफिस बना रखा था, जिसे एटीएस ने सील कर दिया है।

‘नंदलाला की #$ गई क्या’- रैपर MC कोड के बाद अब मफ़ाद ने हिन्दुओं की आस्था को पहुँचाई चोट, भगवान कृष्ण को दी गालियाँ

रैपर ने अगली पंक्ति में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए बेहद आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया जैसे, "मर गया तेरा नंदलाल नटखट, अब गोपियाँ भागेंगी छोड़के पनघट।"
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
105,471FollowersFollow
392,000SubscribersSubscribe