मजहब को आधार बनाकर राजनीति करने वाले हर छोटे-बड़े नेता को अपना असली मकसद अच्छे से पता है। इसका एक उदाहरण एक समय में AIMIM पार्टी के बड़े नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने दिया था और एक उदाहरण अब उनकी ही पार्टी की युवा महिला नेता सहर युनूस शेख ने पेश किया है। सहर ने हैदराबाद जाकर भीड़ के सामने ’15 मिनट’ वाला बयान इस लहजे में दोहराया है जिससे साफ पता चलता है कि उनका इशारा क्या था।
आगे बढ़ने से पहले आपको याद दिला दें कि साल 2013 में अकबरुद्दीन ओवैसी ने ’15 मिनट हटा लो पुलिस को’ वाला विवादित बयान दिया था। अपने भड़काऊ बयान में उन्होंने कहा था, “अगर 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दी जाए तो हम (मुसलमान) 100 करोड़ (हिंदुओं) को खत्म कर देंगे।”
इस भड़काऊ बयान को सुनने के बाद उनपर IPC (अब BNS) की धारा 120(b) और 153(a) व अन्य धाराओं के तहत लंबा केस चला था। 2022 में उन्हें इस मामले में जाकर बरी किया गया था। बाद में उन्होंने जेल से निकलकर अपने ऊपर भड़काऊ बयानबाजी करने वाले आरोपों को खारिज करने की कोशिश की थी।
अब AIMIM के यही नेता उसी 15 मिनट वाले बयान को खुलेआम दोहराते हैं। सहर शेख को देखिए। मुंबई के मुंब्रा में नगर निगम चुनाव जीतने के बाद उन्हें हैदराबाद में ‘दारुल इस्लाम दिन’ को मनाने के लिए बुलाया गया।
सहर मंच पर गईं और स्पीच शुरू करने से पहले ही साफ कर दिया कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है। वीडियो में देख सकते हैं कि इस्लाम का नाम लेकर और हिजाब पहनकर सोशल मीडिया पर पॉपुलर होने वाली सहर को देखते ही भीड़ ने हल्ला करना शुरू कर दिया था। सहर पहले ये देख कर मुस्कुराई और उसके बाद उन्होंने कहा “2 मिनट की शांति चाहिए…नहीं-नहीं 15 मिनट की।”
वीडियो में जिस तरह से सहर 15 मिनट वाली बात को नेताओं को देखकर कह रही हैं उससे साफ है कि ये कोई मजाक नहीं था। ये संदेश था कि सहर के जहन में भी वही जहर भरा है जो अकबरुद्दीन में था।
वहीं उनके साथ हँसने वाली भीड़ भी ये बता रही थी कि उन सबको इस 15 मिनट के मायने बहुत अच्छे से पता हैं। वो इस बात से वाकिफ हैं कि अगर देश से 15 मिनट के लिए कानून व्यवस्था गायब हो जाए तो उन्हें एकजुट होकर क्या करना है और किसके साथ करना है।
सहर का ये अंदाज हिंदुओं के लिए एक चेतावनी है, लेकिन हिंदुओं को उनके रवैये पर हैरान होने की जरूरत नहीं है। AIMIM से जब सहर को पार्षद चुना गया था तब उन्होंने अपनी जीत के बाद लोगों को संबोधित करते हुए यही कहा था कि अगली बार पूरे मुंब्रा को ‘हरे रंग‘ में रंग देना।
जब इस बयान पर बवाल मचा तो वो अपनी बात से पलट गईं। उन्होंने कहा कि ये रंग उनकी पार्टी का रंग है। जो इसके मायने निकाले जा रहे हैं उनका वो अर्थ था ही नहीं। अपनी सफाई में उन्होंने सेकुलर होने तक का दावा किया था। हालाँकि लोगों को सच्चाई का पता था। इस बार भी यही हुआ है। हो सकता है सहर बाद में ये कह दें कि 15 मिनट से उनका अर्थ वाकई भीड़ को शांत करने से था, लेकिन हिंदुओं को इसके मायने पता होने चाहिए।


