बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड जीत हासिल कर ली है। और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को जबरदस्त पछाड़ मिली है। नतीजों ने साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता ने ‘पोरिबर्तन’ कर दिखाया है, वे 15 साल से बंगाल में सत्ता में रही TMC से तंग आ चुके हैं। और TMC को ढहाने के पीछे भी उनके ही नेताओं का हाथ है। इनमें से ही एक हैं सयोनी घोष। एक्ट्रेस से पॉलिटिशियन बनीं सयोनी घोष ने इन चुनावों में खुद को TMC की फायर ब्रांड नेता के तौर पर पेश किया, लेकिन निकली वो ‘पनौती’। वे जिन-जिन क्षेत्रों में चुनाव प्रचार करने पहुँची थी, उनमें से ज्यादातर सीटों पर TMC को करारी हार मिली।
चाहे वो TMC का गढ़ कहे जाने वाला दक्षिण 24 परगना जिला हो, या हो मदारीहाट, पुरुलिया और या जलपाईगुड़ी की राजगंज सीट। हर सीट पर BJP ने TMC को धोबी पछाड़ दिया है। इन्हीं इलाकों में घूम-घूमकर सयोनी घोष ने कविता और गाने गाकर खुद को ‘सेकुलर’ नेता के रूप में पेश किया। सयोनी का बंगाली भाषा में गुनगुनाया गया वो गीत खूब बिका, जिसके हिंदी बोल हैं- ‘मेरे दिल में है काबा, आँखों में मदीना।’ इसी गाने पर लिबरल गैंग ने सयोनी घोष के कसीदे पढ़े।
इतना ही नहीं चुनाव में उनको ममता बनर्जी की परछाई की तरह देखा जाने लगा। जो साधी सफेद साड़ी और हाथ में माइक पकड़कर BJP के बड़े-बड़े नेताओं पर सीधे हमले बोलने लगीं। मीडिया ने भी सयोनी घोष के प्रचार को खूब हवा दी। जब कुछ यूट्यूब चैनल ने उनका इंटरव्यू किया और ‘सेकुलर’ राजनीति पर सवाल पूछे। लेकिन किसी ने उनकी हिंदू घृणा की पोल नहीं खोली।
लेकिन असलियत यह है कि मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने वाली TMC और उसकी नेता सयोनी घोष को CM योगी ने हिंदुत्व का पाठ पढ़ाया था। जब एक रैली में CM योगी ने सयोनी घोष का नाम लिए बिना उन्हें सीख दी कि बंगाल की पहचान काबा नहीं, बल्कि माँ काली है। इसके बाद सयोनी घोष हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए मजबूर हुईं और चुनाव में उनकी पहचान ‘सेकुलर’ नेता के रूप में होने लगी।
अब चुनावों के नतीजे के बाद सयोनी घोष की सोशल मीडिया पर खूब आलोचना हो रही है। जहाँ यूजर्स उनकी पुरानी फिल्मों को लेकर सयोनी घोष की ‘सेकुलर’ राजनीति और साधे कपड़े वाली पहचान की हकीकत बता रहे हैं। लोग बता रहे हैं कि ये वही सयोनी घोष हैं, जिन्होंने ‘चरित्रहीन’ जैसी एडल्ट फिल्मों में काम किया और अब चुनाव में सीधी-साधी महिला की पहचान ओड़े खूब बयानबाजी की।
इतना ही नहीं सयोनी घोष की हकीकत यह भी है कि उन्होंने शिवलिंग पर कंडोम की फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की। जब लोगों ने सवाल पूछे, तो कहने लगी कि ‘एक्स’ अकाउंट हैक हो गया था। लेकिन हैकर ने मुस्लिम-विरोधी पोस्ट शेयर नहीं किए। यानी सयोनी घोष खुले में सिर्फ हिंदू घृणा दिखाती हैं और काबा-मदीना पर गाने गाती हैं। और फिर इसी बैकग्राउंड के साथ जनता के बीच अपनी ‘सेकुलर’ राजनीति चमकाती हैं।
लेकिन बंगाल के नतीजों में साफ दिख गया है कि यहाँ पिछले 15 सालों से TMC के ‘जंगलराज’ से परेशान लोगों ने जनादेश दे दिया है। अब लोगों ने ‘पोरिबर्तन’ कर दिया है। आने वाले समय में बंगाल में काबा-मदीना के गाने नहीं, बल्कि राज्य को अपनी बंगाली पहचान से नवाजा जाएगा।
आखिर में सयानी घोष ने जो लकीर खींची है, उम्मीद है कि उसकी तस्वीर हमें वैसी ही देखने को मिले जैसा वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल कहते हैं, “दिल में काबा, आँखों में मदीना! पश्चिम बंगाल का ये चुनाव इस गाने के कारण भी याद रखा जाएगा। जैसे शाह बानो मैटर के बाद केंद्र में कभी कॉन्ग्रेस को बहुमत नहीं मिला, वैसा ही हाल अब तृणमूल का हो सकता है। सांप्रदायिक अतिवाद भारत के स्वभाव के विपरीत है। चोलबे ना।”


