Saturday, July 13, 2024
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सबकी जात गिनेगा बिहार, पर जातीय जनगणना में कैसे रोकेगा रोहिंग्या-बांग्लादेशियों की घुसपैठ: डेमोग्राफी बदली, अब मुस्लिम गलियारे की साजिश

बिहार में मुस्लिम घुसपैठियों की एक बड़ी आबादी है, जो म्यांमार और बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के रास्ते अवैध रूप से रहकर आबादी में घुलमिल गए हैं। माना जाता है कि इनकी संख्या 66 लाख से 1 करोड़ के बीच है। इनमें से लगभग 66 लाख अवैध घुसपैठिए बिहार के लोगों के हक के रोजगारों पर कब्जा जमाए हुए बैठे हैं।

राजनीति में कोई भी कदम बिना फायदे के नहीं उठाए जाते। यह सत्ता के गलियारों की दुनिया का शाश्वत सत्य है। हालाँकि, अपवाद हर समय और हर जगह रहा है, इसलिए इसमें भी हो सकता है। बिहार की राजनीति के चिर प्रतिद्वंद्वी लालू यादव (Lalu Yadav) की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल- राजद (RJD) की लंबे समय से की जा रही माँग पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) द्वारा जातीय गणना या जातीय सर्वे (Caste Census) कराने का निर्णय लोकोपकारी कम, राजनैतिक हित वाला ज्यादा साबित होता है। हालाँकि, इस गणना को इस्तेमाल राजनीति से हटकर किया जाए तो लंबे समय में इसके फायदे भी नजर आएँगे।

जातीय गणना में भाजपा की माँग पर मुस्लिमों सहित सभी धर्मों की जातीय और उप-जातीय गणना को शामिल किया गया है। हालाँकि, इस जातीय गणना से उन मुल्ले-मौलवियों का यह भ्रम भी दूर होगा कि मुस्लिमों में जाति आधारित व्यवस्था नहीं है। लेकिन, इस लेख का विषय दूसरा है। इस लेख में हम चर्चा करेंगे कि जातीय गणना के दौरान बिहार की नीतीश सरकार अवैध बांग्लादेशियों और घुसपैठिए रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर क्या रुख अपनाएगी।

जातीय गणना को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार की राजधानी पटना में सर्वदलीय बैठक संपन्न हुई और सभी दलों ने इसके लिए सहमति दी। अवैध मुस्लिम घुसपैठियों को लेकर सरकार की नीति क्या होगी इस पर चर्चा सिर्फ भाजपा ने की। जातीय गणना की लंबे समय से माँग करने वाले अन्य दलों ने इस मुद्दे को विचार योग्य ही नहीं समझा।

भाजपा ने रोहिंग्या और अवैध बांग्लादेशियों को लेकर रखी माँग

सर्वदलीय बैठक में भाजपा ने स्पष्ट रूप से कहा कि इसमें अवैध बांग्लादेशी मुस्लिमों और घुसपैठी रोहिंग्या मुस्लिमों को लेकर बाहर रखना होगा। इसका लाभ उन्हें किसी भी तरह नहीं मिलना चाहिए। इसके अलावा, उच्च जाति वाले मुस्लिम खुद को निम्न जाति का बताकर इसका लाभ ना ले सकें, यह भी सरकार को सुनिश्चित करना होगा।

ऑपइंडिया से बात करते हुए बिहार के भाजपा अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा, “कल (बुधवार, 1 जून 2022) जो सर्वदलीय बैठक हुई, उसमें हमने तीन मुद्दे उठाए। पहला कि जब जातीय सर्वे हो तो कोई अवैध बांग्लादेशी या रोहिंग्या इसका हिस्सा ना बने। दूसरी बात कि इसमें पिछड़ों की हकमारी ना हो। सीमांचल में बहुत सारे ऐसे मुस्लिम हैं, जो शेख (उच्च मुस्लिम जाति) हैं और बाद में शेखरा बोलकर वो OBC का लाभ उठाते हैं या कुलहरिया बोलकर OBC का लाभ उठाते हैं।”

उदाहरण देते हुए डॉ. जायसवाल ने कहा, “तस्लीमुद्दीन शेख कम्युनिटी के थे, अगर उनका पुराना रिकॉर्ड चेक किया जाए तो, लेकिन उन्होंने कुलहरिया बोलकर रिजर्वेशन का लाभ लिया। ऐसा ना कि सर्वे के दौरान दूसरे मुसलमान अपने आपको OBC या EBC कहकर इसमें शामिल हो जाएँ। इसको भी देखना होगा।”

जातीय गणना में खरच दलों वामपंथियों और अन्य दलों की जातीय गणना पर की जा रही राजनीति को लेकर भाजपा नेता जायसवाल ने कहा, “जातिगत सर्वे भी हो और हम कराएँगे भी नहीं- इस पॉलिसी के तहत वामपंथी और कुछ अन्य दलों ने चाहा कि पैसे केंद्र सरकार दे। ताकि, इन्हें जातीय गणना भी ना हो और उनका क्लेम भी बन जाए और वे इसका लाभ उठा सकें।”

वहीं, एक विधान परिषद के सदस्य और भाजपा नेता ने कहा कि यह बेहतर होता कि जातीय गणना के बजाए राज्य सरकार गरीबों और आर्थिक रूप से पिछड़ों की गणना कराती। इससे यह फायदा होता कि जो सरकारी योजनाओं से वंचित हैं, उन्हें उनका लाभ मिलता।

जातीय गणना का कोई मैकेनिज्म नहीं, NRC लागू करने से CM ने किया था मना

इस तरह राज्य में रह रही अवैध आबादी न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए समस्या उत्पन्न कर रही है, बल्कि देश के मुस्लिमों के विकास का बड़ा हिस्सा खा जा रही है। इनकी पहचान के लिए अब तक सरकार की तरफ से ना ही कोई प्रयास किए गए और ना जातीय गणना में इनकी पहचान करने के लिए किसी मसौदे या मैकेनिज्म अपनाने की बात कही गई है। ये पार्टी विशेष के लिए वोटबैंक का काम करते हैं, इसलिए अधिकतर पार्टियाँ इनको लेकर चुप्पी साधे रहती है।

इस मसले पर बिहार के भाजपा अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने ऑपइंडिया से कहा कि अभी इस सर्वे को लेकर किसी तरह का मैकेनिज्म नहीं बना है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सभी दलों की बातों को सुना और कहा कि इस पर जो भी निर्णय लिया जाएगा, इसको लेकर सबको सूचित कर दिया जाएगा।

बता दें कि जब इन अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए केंद्र की भाजपा सरकार ने राष्ट्रीय पंजीयन रजिस्टर (NRC) को देश भर में लागू करने की बात कही, तब वोटबैंक को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे लागू करने से साफ मना कर दिया। नीतीश कुमार ने कहा था दरभंगा में हायाघाट ब्लॉक के चंदनपट्टी में मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय में एक समारोह को संबोधित कहा था कि बिहार में NRC लागू नहीं किया जाएगा।

बिहार के 66 लाख लोगों के रोजगार खा गए अवैध घुसपैठिए

बिहार में मुस्लिम घुसपैठियों की एक बड़ी आबादी है, जो म्यांमार और बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल के रास्ते अवैध रूप से रहकर आबादी में घुलमिल गए हैं। माना जाता है कि इनकी संख्या 66 लाख से 1 करोड़ के बीच है। इनमें से लगभग 66 लाख अवैध घुसपैठिए बिहार के लोगों के हक के रोजगारों पर कब्जा जमाए हुए बैठे हैं।

इनमें से अधिकतम के पास पहचान पत्र, राशन कार्ड और आधार कार्ड बने हुए है। हाल में कई ऐसे ऑपरेटरों का फंडाफोड़ हो चुका है, जो अवैध घुसपैठियों को फर्जी कागजातों पर उनका पहचान पत्र बनवाने में संलग्न रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के जरिए पूरे देश में घुसपैठ

बांग्लादेश और म्यामांर से आए ये घुसपैठिए पहले पश्चिम बंगाल में रहते हैं और फिर वहाँ फर्जी कागजात बनाकर खुद को बंगाली मुस्लिम बताकर देश के अन्य हिस्सों में बस जाते हैं। आज पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मुस्लिम आबादी 69.5 प्रतिशत, मालदा में 53.3 प्रतिशत, उत्तरी और दक्षिणी दिनाजपुर में 42.8 प्रतिशत, बीरभूम में 39.6 प्रतिशत, उत्तरी और दक्षिणी 24 परगना में 36.1 प्रतिशत, हावड़ा में 30 प्रतिशत और नदिया में 26.76 प्रतिशत है।

बिहार की सीमा पश्चिम बंगाल से सटी होने के कारण ये घुसपैठिए आसानी से बिहार के सीमावर्ती जिलों में बस जाते हैं। इसमें इनकी मदद स्थानीय स्तर के लोग करते हैं। मुस्लिम हितों को नाम पर सामूहिक रूप से सड़कों पर निकलने वाला मुस्लिम समुदाय कभी अवैध घुसपैठियों को लेकर सामने नहीं आया। और नहीं तो उनके पक्ष में अपनी आवाज ही बुलंद करते रहा है। यही कारण है कि राज्य के सीमांचल, मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र में मुस्लिमों की आबादी में बहुत तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है।

देश में बांग्लादेश से पाकिस्तान तक मुस्लिम गलियारा बनाने की साजिश

हाल ही में यह बात भी सामने आ चुकी है कि देश में अवैध रूप से बांग्लादेश और रोहिंग्या मुस्लिमों को लाकर उन्हें सुनियोजित तरीके से बसाने का काम किया जा रहा है, ताकि डेमोग्राफी में बदलाव करते हुए एक मुस्लिम गलियारा विकसित किया जा सके। यह मुस्लिम गलियारा मुस्लिम मुल्क बांग्लादेश को इस्लामिक मुल्क पाकिस्तान से जोड़ेगा।

बिहार के पूर्व विधान पार्षद हरेंद्र प्रताप ने अपने एक लेख में बताया था कि उत्तर भारत में मुस्लिम षड्यंत्रकारियों ने जिस मुस्लिम गलियारे को तैयार करने की साजिश रची है, वो बांग्लादेश से सटे पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा होते हुए पाकिस्तान से मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस गलियारे में मुस्लिमों को बड़ी संख्या में बसाने का काम शुरू किया जा रहा है और असम में घुसपैठियों के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद वहाँ के कई मुस्लिमों को भी इधर ही बसाया गया है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में शासन के संरक्षण और भाषाई अनुकूलता के कारण वो खुले रूप से अपना काम कर रहे हैं, लेकिन यूपी-बिहार में इसकी अनदेखी आश्चर्यजनक है। उन्होंने कैराना से हिन्दुओं के पलायन की खबर याद दिलाते हुए लिखा है कि 2011 की जनगणना में जहाँ हिंदू जनसंख्या वृद्धि दर राष्ट्रीय से आधा यानी 9.19% तथा मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि हिंदू से तीन गुना यानी 29.81% थी।

उन्होंने आँकड़ा पेश किया कि 2001-11 में पश्चिम बंगाल से 35 लाख हिन्दुओं के पलायन की बात सामने आई है। उन्होंने पूर्णिया के बायसी विधानसभा में एक दलित बस्ती को जलाए जाने की घटना को भी याद किया और कहा कि वहाँ से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने जीत दर्ज की है। बकौल हरेंद्र प्रताप, ओवैसी हैदराबाद को कश्मीर बनाना चाहते हैं और वहाँ हिन्दू जनसंख्या पहले से घटी है।

‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव हरेंद्र प्रताप ने अपने लेख में नेपाल सीमा पर मरदसों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण गिरोह की सक्रियता को भी इसी साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम बहुल इलाकों मुजफ्फरनगर (50.14%), मुरादाबाद (46.77%), बरेली (50.13%), सीतापुर (129.66%), हरदोई (40.14%), बहराइच (49.17%) और गोंडा (42.20%) से ‘मुस्लिम पट्टी’ बनाने की साजिश है। 

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सुधीर गहलोत
सुधीर गहलोत
इतिहास प्रेमी

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