बिहार के उप-मुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा के नेतृत्व में विभाग में हो रहे सुधारों की एक नई सुबह की शुरुआत हुई है। लंबे समय से बिहार की जनता जमीन से जुड़े मामलों में भ्रष्टाचार, देरी और रिश्वतखोरी की शिकार रही है। अंचलाधिकारी (CO) स्तर पर 90% से अधिक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी थीं, जहाँ दाखिल-खारिज, म्यूटेशन, नाम सुधार जैसे बुनियादी काम बिना घूस के नहीं होते थे।
दलालों का एक पूरा नेटवर्क खड़ा हो गया था, जो अंचल और थाना मिलकर जनता की जमीन लूटने का रैकेट चला रहे थे। इसी कारण बिहार में जमीन विवादों से जुड़ी मारपीट, हत्याएँ और अपराध बढ़ते जा रहे थे। लेकिन विजय कुमार सिन्हा के सख्त रुख और ईमानदारी से भरे संकल्प ने इन भ्रष्ट तत्वों में खौफ पैदा कर दिया है।
सिन्हा ने विभाग में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि राजस्व विभाग जनता की सेवा के लिए है, परेशान करने के लिए नहीं। जनता दरबार और भूमि सुधार जनकल्याण संवाद कार्यक्रमों में वे खुद बैठकर शिकायतें सुनते हैं और दोषी अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई करते हैं।
गया के बोधगया में आयोजित एक ऐसे ही कार्यक्रम में आमस अंचल के CO अरशद मदनी पर रिश्वत लेने के आरोप लगे। एक आवेदक ने बताया कि 25000 रुपए की रिश्वत सरकारी बॉडीगार्ड के माध्यम से ली गई। सिन्हा ने मंच से ही CO को हटाने, जाँच कराने और यदि दोष सिद्ध हुआ तो निलंबन व FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
बिहार में सीओ साहब ने लिया 25000 रुपया घुस, मंच से ही विजय सिन्हा ने कर दिया सीओ का पावर सीज,बजने लगी तालियां। pic.twitter.com/DxLHX9fKsO
— छपरा जिला 🇮🇳 (@ChapraZila) January 29, 2026
इसी तरह अन्य शिकायतों पर उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि फाइलें लटकाने या जनता को भटकाने वाले अब नहीं बचेंगे। उनका व्यंग्यपूर्ण बयान- ‘नाम सुधारने के लिए अंचल में कौन-कौन से देवता खुश किए जाते हैं, मुझे सब मालूम है’- भ्रष्टाचार और बिचौलियों पर सीधा प्रहार था।
गड़बड़ी करने वाले अफसरों को नौकरी करने के लायक नहीं छोड़ूंगा: विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री ने कहा-नाम सुधारने के लिए “अंचल के देवता” को पैसा देकर खुश करना पड़ता है।#BiharNews #VijaySinha #Corruption #Governance #LandRecords #IndiaNews pic.twitter.com/SQXmNAUblZ
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अधिकारियों में यह खौफ साफ दिख रहा है। जब सरकार ने भ्रष्टाचार पर लगाम कसनी शुरू की, तो अंचलाधिकारियों ने हड़ताल (सामूहिक अवकाश) की धमकी दी और 2 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। उनका मुख्य मुद्दा अनुमंडल राजस्व पदाधिकारी जैसे नए पदों के सृजन से संवर्गीय आशंका था।
जनहित में अंचल कार्यालय बंद नहीं रह सकते थे, खासकर बजट सत्र के दौरान। सिन्हा ने सख्ती दिखाई-नो वर्क, नो पे लागू किया, सरकारी गाड़ी और कार्यालय की चाबी वापस लेने का आदेश दिया और वरीय कर्मचारियों, BDO, DSLR आदि को अंचल का प्रभार सौंपने का विकल्प दिया। प्रधान सचिव सीके अनिल ने मंत्री के सामने ही चेतावनी दी कि हड़ताल वापस न ली तो डिसमिस कर दिया जाएगा।
परिणामस्वरूप, हड़ताल पहले दिन ही टूट गई। शाम को सिन्हा से मुलाकात के बाद बिहार राजस्व सेवा संघ ने हड़ताल वापस ले ली। उन्होंने तीन सदस्यीय समिति गठित की, जिसमें प्रधान सचिव सीके अनिल अध्यक्ष हैं। समिति माँगों, प्रमोशन, न्यायालयीय आदेशों और संवर्गीय संतुलन पर विचार करेगी। सिन्हा ने आश्वासन दिया कि जायज माँगें पूरी होंगी, सेवा नियमावली का सम्मान होगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। उनका बयान- “ठीक है, दवा हो रहा है, असर भी दिख रहा है, घबराइए नहीं, सब कुछ समाधान होगा”- सुधार की प्रक्रिया को दवा की तरह प्रभावी बताता है।
यह पहली बार है जब सरकार ने इतनी सख्ती से भ्रष्ट अंचलाधिकारियों पर नकेल कसी है। पहले दलालों के माध्यम से रिश्वत ऊपरी कमाई होती थी, जो CO के खाते में नहीं आती थी। कई अधिकारियों के खर्च उनकी सैलरी से कहीं अधिक थे-बच्चों की फीस अकेले वेतन के बराबर। लेकिन अब जाँच का डर है। सिन्हा के आने से ईमानदारी को प्रोत्साहन मिला है। जनता में खुशी की लहर है। लोग कह रहे हैं कि CO अब पैसा वसूली के लिए दलाल नहीं रख पाएँगे और काम बिना रिश्वत के होगा।
सिन्हा का यह प्रयास ऐतिहासिक है। वे न केवल भूमाफियाओं को ‘सिर पर कफन बाँधकर’ चुनौती दे रहे हैं बल्कि विभाग को पारदर्शी और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) हर अंचल में खोलने, शनिवार को grievance redressal, ऑनलाइन सेवाओं को मजबूत करने जैसे कदम आम आदमी की मदद करेंगे। ईमानदार अधिकारी अब सम्मानित होंगे जबकि भ्रष्टों पर कार्रवाई तय है।
आने वाला समय बताएगा कि बिहार में जमीन विवाद कम होंगे, अपराध की जड़ें सूखेंगी। जनता सिन्हा के साथ है। बिहार की जनता अब उम्मीद की किरण देख रही है-भ्रष्टाचार मुक्त राजस्व व्यवस्था की। विजय कुमार सिन्हा का यह संघर्ष बिहार के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय बनेगा।


