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पहले थे ‘बंगाली गौरव’, अब बन गए ‘बाहरी’: लिएंडर पेस के पार्टी छोड़ते ही TMC के बदले सुर, क्या ‘युसूफ पठान’ पर भी पार्टी देगी ज्ञान?

लिएंडर पेस ने स्पष्ट किया है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'खेलो इंडिया' विजन और खेल शिक्षा के जरिए बंगाल के युवाओं को सशक्त बनाने आए हैं। जहाँ भाजपा पेस के जरिए बंगाल को मॉडर्न स्पोर्ट्स हब बनाने की बात कर रही है, वहीं TMC अभी भी 'बाहरी-भीतरी' के पुराने और खोखले मुद्दे में फँसी हुई है।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘बाहरी और भीतरी’ का पुराना खेल एक बार फिर शुरू हो गया है, लेकिन इस बार दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। जैसे ही महान टेनिस खिलाड़ी और ओलंपिक मेडल विजेता लिएंडर पेस BJP में शामिल हुए, TMC ने उन्हें ‘बाहरी’ (बोहिरगातो) कहना शुरू कर दिया। सोमवार (30 मार्च 2026) को दिल्ली में बीजेपी का दामन थामने वाले पेस का TMC ने सोशल मीडिया पर खूब मजाक उड़ाया।

लेकिन इस हमले से खुद TMC की दोहरी सोच की पोल खुल गई है। जिस पेस को आज TMC ‘बाहरी‘ बता रही है, वे न केवल बंगाल की महान विरासत का हिस्सा हैं, बल्कि कुछ समय पहले तक TMC के खास ‘अपने’ भी थे। जब तक वे TMC में थे तब तक बंगाली और अपने थे, और अब BJP में जाते ही बाहरी और पराए हो गए।

जब TMC में थे तब ‘बंगाली बाबू’, अब भाजपा में ‘बाहरी’?

लिएंडर पेस राजनीति में कोई नए खिलाड़ी नहीं हैं। साल 2021 में खुद ममता बनर्जी ने उन्हें बड़े सम्मान के साथ TMC में शामिल किया था। उस वक्त TMC के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से बड़े-बड़े ट्वीट करके उनका स्वागत किया गया और उन्हें ‘बंगाल का गौरव’ बताया गया था। यहाँ तक कि गोवा के चुनावों में TMC ने पेस को अपना सबसे बड़ा चेहरा बनाकर उनसे खूब प्रचार भी करवाया।

अब सोशल मीडिया पर लोग TMC के उन्हीं पुराने ट्वीट्स को निकालकर आज के ‘बाहरी’ वाले बयान से तुलना कर रहे हैं। लोग मजे लेते हुए पूछ रहे हैं कि क्या 2021 में लिएंडर पेस ‘पक्के बंगाली’ थे और 2026 में भाजपा चुनते ही अचानक ‘बाहरी’ हो गए? यह साफ दिखाता है कि टीएमसी इस वक्त कितनी घबराई हुई है और उनके पास पेस का कोई ठोस जवाब नहीं है।

यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा ‘भीतरी’ कैसे?

TMC का ‘बाहरी-बाहरी’ का राग तब पूरी तरह फेल हो जाता है, जब हम उनके अपने नेताओं की लिस्ट देखते हैं। सोशल मीडिया पर लोग पुराने और नए ट्वीट्स शेयर करके TMC से कड़े सवाल पूछ रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि जो पार्टी गुजरात के यूसुफ पठान, बिहार के शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और साकेत गोखले जैसे नेताओं को बाहर से लाकर बंगाल में चुनाव लड़ाती है, वो लिएंडर पेस को ‘बाहरी’ कैसे बोल सकती है?

यूसुफ पठान गुजरात के हैं और शत्रुघ्न सिन्हा बिहार के, उनका बंगाल के जन्म या संस्कृति से कोई पुराना रिश्ता नहीं है, फिर भी TMC उन्हें ‘अपना’ मानती है। यह साफ तौर पर पार्टी का दोहरा चेहरा है, वोट के लिए बाहर के लोग भी ‘अपने’ हो जाते हैं, लेकिन बंगाल की मिट्टी के बेटे ने जैसे ही भाजपा चुनी, उसे ‘पराया’ बना दिया गया। यह दोगलापन अब जनता को अच्छी तरह समझ आ गया है।

बंगाल की मिट्टी और साहित्य से पेस का अटूट नाता

लिएंडर पेस को ‘बाहरी’ कहना असल में बंगाल की संस्कृति और इतिहास का अपमान है। पेस बंगाल के सबसे महान कवियों में से एक, माइकल मधुसूदन दत्त के परिवार से ताल्लुक रखते हैं। लिएंडर पेस की माँ खुद बंगाल की ही रहने वाली थीं और पेस का जन्म भी कोलकाता में ही हुआ था।

अपनी जड़ों पर गर्व करते हुए पेस ने भाजपा मुख्यालय में साफ कहा, “मैं एक शानदार बंगाली विरासत में पैदा हुआ हूँ।” अब जिस इंसान की रगों में बंगाल के इतने बड़े साहित्यकार का खून दौड़ रहा हो, उसे TMC के कुछ लोग ‘बाहरी’ बता रहे हैं। यह दिखाता है कि TMC के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है और वे बस राजनीति के लिए किसी का भी अपमान कर रहे हैं।

विकास बनाम विभाजन की राजनीति

लिएंडर पेस ने स्पष्ट किया है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘खेलो इंडिया’ विजन और खेल शिक्षा के जरिए बंगाल के युवाओं को सशक्त बनाने आए हैं। जहाँ भाजपा पेस के जरिए बंगाल को मॉडर्न स्पोर्ट्स हब बनाने की बात कर रही है, वहीं TMC अभी भी ‘बाहरी-भीतरी’ के पुराने और खोखले मुद्दे में फँसी हुई है।

2026 के चुनाव से पहले पेस का BJP में आना एक बड़ा संदेश है कि अब बंगाल का युवा पहचान की संकुचित राजनीति के बजाय विकास और राष्ट्रीय गौरव को चुन रहा है। TMC का यह दोहरा चेहरा अब उनके लिए ही गले की हड्डी बन गया है।

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