लॉस्ट इन ट्रांसलेशन: वामियों का ‘एलिटिस्ट’ अभियान और भारत की आम जनता

कन्हैया के समर्थन में कोई स्वरा भास्कर भी अभियान चला रही हैं। जिस पर महिला छात्रावास के सामने अभद्रता करने का जुर्माना लग चुका हो, उसके समर्थन में 'नारीवाद' कहना अपने आप में ही अजीब है।

अगर अजीब सी फ़िल्म देखनी हो तो ‘लॉस्ट इन ट्रांसलेशन’ देखी जा सकती है। इसकी कहानी एक अमेरिकी फिल्म स्टार बॉब की है जो किसी प्रचार की शूटिंग के लिए जापान आता है। उसकी शादीशुदा जिन्दगी बहुत अच्छी नहीं चल रही होती। जिस होटल में वो ठहरा हुआ होता है, वहीं शेर्लोट नाम की एक कम उम्र की लड़की भी ठहरी होती है। उसकी हाल ही में शादी हुई थी, लेकिन उसका पति जो कि एक नामी फोटोग्राफर था, उसे होटल में छोड़कर, काम पर गया था। वो भी अपने शादीशुदा भविष्य को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं होती।

बॉब और शेर्लोट रोज सुबह होटल में मिलते थे, एक दिन जब रात को दोनों को नींद नहीं आ रही होती तो दोनों एक दूसरे से बार में टकरा जाते हैं। शेर्लोट अपने दोस्तों से मिलने के लिए बॉब को आमंत्रित करती है। टोक्यो में घूमते फिरते दोनों में प्यार जैसा कुछ हो जाता है। दोनों एक दूसरे से अपने-अपने निजी जीवन की परेशानियाँ भी साझा करने लगते हैं। जिस दिन बॉब को वापस लौटना होता है, उससे पहले की रात वो होटल की ही एक गायिका के साथ गुजार रहा होता है।

शेर्लोट को इसका पता चलता है और वो नाराज हो जाती है। दोनों में झगड़ा भी होता है। फिर बाद में होटल में आग लगने जैसी घटना के जरिए दोनों में सुलह भी हो जाती है। जब बॉब वापस लौट रहा होता है तो दोनों एक दूसरे को अलविदा कहकर निकलते हैं। थोड़ी ही देर बाद एअरपोर्ट के रास्ते में बॉब को एक भीड़ भरी सड़क पर शेर्लोट दिखती है, वो रुकता है, उसके पास जाता है। कान में फुसफुसाकर कुछ कहता है, दोनों गले मिलते हैं, किस करते हैं, और एक दूसरे से विदा होते हैं।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

ये फिल्म इसलिए अजीब है क्योंकि इसमें सब कुछ होता है और कुछ नहीं होता। या फिर इसे इसलिए अजीब कह सकते हैं क्योंकि इसमें कुछ होता तो है, मगर क्या हुआ ये समझना-समझाना मुश्किल है। दूसरे देशों से आए हुए लोग एक जापानी शहर में कैसे खोए हुए से हैं, ये नजर आता है। उनके सांस्कृतिक तरीकों या चलन से माहौल अलग है, इसलिए वो खोए रहते हैं। जापानी के लम्बे वाक्यों को अनुवादक अंग्रेजी में एक वाक्य में कहता है, जिसमें पूरी बात कहीं खो गई, ये भी लोगों को समझ में आता रहता है। फिल्म के दोनों मुख्य कलाकारों ने शादी तो की है, लेकिन अपने पारिवारिक संबंधों में भी वो दोनों खोए हुए से हैं।

वामी मजहब के नए पोस्टर-बॉय के समर्थन में उतरे हुजूम के साथ ही लॉस्ट इन ट्रांसलेशन याद आता है। इसमें फ़िल्मी माहौल के जावेद अख्तर ने आकर अपने भाषणों में कॉन्ग्रेस के सिद्धू पर निशाना क्यों लगाया पता नहीं। बेगुसराय के लोगों को उसमें कुछ समझ नहीं आ रहा था, ये उनके चेहरे देखने से ही पता चलता था। योगेन्द्र ‘सलीम’ यादव की भाषा ही उन्हें क्षेत्रीय जनता से अलग काट देती है। ऐसी बातचीत आम लोग नहीं करते, हाँ टीवी डिबेट में जरूर परिष्कृत लगेगी। उनके समर्थन में कोई स्वरा भास्कर भी अभियान चला रही हैं। जिस पर महिला छात्रावास के सामने अभद्रता करने का जुर्माना लग चुका हो, उसके समर्थन में ‘नारीवाद’ कहना अपने आप में ही अजीब है।

कुल मिलाकर ये अभियान भी लॉस्ट इन ट्रांसलेशन ही है। वो इंडिया के लोग भारत में आकर, किसी और माहौल, किसी और भाषा में, किसी और विषय की बात कर रहे हैं। बाकी जनता अपना मत देने के लिए बटन दबाती है। दुआ है कि इस ‘दबाने’ में भी कहीं उन्हें अपने प्रत्याशी के विरोध के स्वर को दबाया जाना न समझ आ जाए!

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

ये पढ़ना का भूलें

लिबरल गिरोह दोबारा सक्रिय, EVM पर लगातार फैला रहा है अफवाह, EC दे रही करारा जवाब

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ओपी राजभर

इतना सीधा नहीं है ओपी राजभर को हटाने के पीछे का गणित, समझें शाह के व्यूह की तिलिस्मी संरचना

ये कहानी है एक ऐसे नेता को अप्रासंगिक बना देने की, जिसके पीछे अमित शाह की रणनीति और योगी के कड़े तेवर थे। इस कहानी के तीन किरदार हैं, तीनों एक से बढ़ कर एक। जानिए कैसे भाजपा ने योजना बना कर, धीमे-धीमे अमल कर ओपी राजभर को निकाल बाहर किया।
राहुल गाँधी

सरकार तो मोदी की ही बनेगी… कॉन्ग्रेस ने ऑफिशली मान ली अपनी हार

कॉन्ग्रेस ने 23 तारीख को चुनाव नतीजे आने तक का भी इंतजार करना जरूरी नहीं समझा। समझे भी कैसे! देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कॉन्ग्रेस भी उमर अबदुल्ला के ट्वीट से सहमत होकर...
उपेंद्र कुशवाहा

‘सड़कों पर बहेगा खून अगर मनमुताबिक चुनाव परिणाम न आए, समर्थक हथियार उठाने को तैयार’

एग्जिट पोल को ‘गप’ करार देने से शुरू हुआ विपक्ष का स्तर अब खुलेआम हिंसा करने और खून बहाने तक आ गया है। उपेंद्र कुशवाहा ने मतदान परिणाम मनमुताबिक न होने पर सड़कों पर खून बहा देने की धमकी दी है। इस संभावित हिंसा का ठीकरा वे नीतीश और केंद्र की मोदी सरकार के सर भी फोड़ा है।
राशिद अल्वी

EVM को सही साबित करने के लिए 3 राज्यों में कॉन्ग्रेस के जीत की रची गई थी साजिश: राशिद अल्वी

"अगर चुनाव परिणाम एग्जिट पोल की तरह ही आते हैं, तो इसका मतलब पिछले साल तीन राज्यों के विधानसभा के चुनाव में कॉन्ग्रेस जहाँ-जहाँ जीती थी, वह एक साजिश थी। तीन राज्यों में कॉन्ग्रेस की जीत के साथ ये भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि ईवीएम सही है।"
पुण्य प्रसून वाजपेयी

20 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी को 35+ सीटें: ‘क्रन्तिकारी’ पत्रकार का क्रन्तिकारी Exit Poll

ऐसी पार्टी, जो सिर्फ़ 20 सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है, उसे वाजपेयी ने 35 सीटें दे दी है। ऐसा कैसे संभव है? क्या डीएमके द्वारा जीती गई एक सीट को दो या डेढ़ गिना जाएगा? 20 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी 35 सीटें कैसे जीत सकती है?

यूट्यूब पर लोग KRK, दीपक कलाल और रवीश को ही देखते हैं और कारण बस एक ही है

रवीश अब अपने दर्शकों से लगभग ब्रेकअप को उतारू प्रेमिका की तरह ब्लॉक करने लगे हैं, वो कहने लगे हैं कि तुम्हारी ही सब गलती थी, तुमने मुझे TRP नहीं दी, तुमने मेरे एजेंडा को प्राथमिकता नहीं माना। जब मुझे तुम्हारी जरूरत थी, तब तुम देशभक्त हो गए।
स्वरा भास्कर

प्रचार के लिए ब्लाउज़ सिलवाई, 20 साड़ियाँ खरीदी, ताकि बड़े मुद्दों पर बात कर सकूँ: स्वरा भास्कर

स्वरा भास्कर ने स्वीकार करते हुए बताया कि उन्हें प्रचार के लिए बुलाया गया क्योंकि वो हीरोइन हैं और इस वजह से ही उन्हें एक इमेज बनाना आवश्यक था। इसी छवि को बनाने के लिए उन्होंने 20 साड़ियाँ खरीदीं और और कुछ जूलरी खरीदी ताकि ‘बड़े मुद्दों पर’ बात की जा सके।
राहुल गाँधी, बीबीसी

2019 नहीं, अब 2024 में ‘पकेंगे’ राहुल गाँधी: BBC ने अपने ‘लाडले’ की प्रोफाइल में किया बदलाव

इससे भी ज्यादा बीबीसी ने प्रियंका की तारीफ़ों के पुल बांधे हैं। प्रियंका ने आज तक अपनी लोकप्रियता साबित नहीं की है, एक भी चुनाव नहीं जीता है, अपनी देखरेख में पार्टी को भी एक भी चुनाव नहीं जितवाया है, फिर भी बीबीसी उन्हें चमत्कारिक और लोकप्रिय बताता है।
योगेन्द्र यादव

योगेंद्र यादव का दावा: अबकी बार 272 पार, आएगा तो मोदी ही

उन्होंने स्वीकार किया कि बालाकोट एयरस्ट्राइक का बाद स्थिति बदल गई है। आज की स्थिति में अब बीजेपी बढ़त की ओर आगे बढ़ गई है।
ट्रोल प्रोपेगंडाबाज़ ध्रुव राठी

ध्रुव राठी के धैर्य का बाँध टूटा, बोले राहुल गाँधी ने 1 ही झूठ किया रिपीट, हमारा प्रोपेगैंडा पड़ा हल्का

जिस प्रकार से राहुल गाँधी लगातार मोदी सरकार को घोटालों में घिरा हुआ साबित करने के लिए झूठे डाक्यूमेंट्स और बयानों का सहारा लेते रहे, शायद ध्रुव राठी उन्हीं से अपनी निराशा व्यक्त कर रहे थे। ऐसे समय में उन्हें अपने झुंड के साथ रहना चाहिए।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

41,313फैंसलाइक करें
7,863फॉलोवर्सफॉलो करें
63,970सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: