इन 600 टुटपुंजिया कलाकारों का निशाना भी पुलवामा फिदायीन की तरह हिंदुत्व ही है

इन 600 लोगों ने कहा है कि विकास के वादे के साथ पाँच साल पहले सत्ता में आई बीजेपी ने हिंदुत्व के गुंडों को नफरत और हिंसा की राजनीति करने के लिए स्वतंत्र कर दिया है। हम अपील करते हैं कि लोग कट्टरता, घृणा और सत्ता से बाहर कुछ न सोचने वालों के खिलाफ वोट करें।

लोकसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब कुछ ही दिन बाकी हैं। भाजपा और मोदी सरकार को रोकने के लिए विपक्ष से लेकर अवार्ड वापसी गैंग और नेहरुवियन सभ्यता के तमाम बड़े और छोटे समुदाय मैदान में उतरकर अपनी एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।

इस बार के आम चुनावों की ख़ास बात ये है कि लोकतंत्र के इस त्यौहार में इतनी बड़ी मात्रा में और बढ़-चढ़कर शायद ही आज़ादी के इतने वर्षों तक किसी ने भागीदारी और दिलचस्पी दिखाई हो। यह मोदी सरकार की सबसे बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा सकता है कि तमाम ऐसे लोग, जिनके चेहरे और नाम तक लोग भूल चुके थे, उन्हें भी दोबारा से कैमरा, न्यूज़ और व्यूज में सफलतापूर्वक जगह मिली है, फिर चाहे अपने अस्त हो चुके फ़िल्मी करियर के बाद राजनीति के द्वारा रोजगार ढूँढती हुई उर्मिला मातोंडकर हो या फिर एक के बाद एक फ़्लॉप फिल्मों के कारण बदहवास स्थिति में घूमते नसीरुद्दीन शाह हों।

हिन्दू धर्म को सबसे ज्यादा उग्र बताकर उर्मिला मातोंडकर ने भी राजनीति के खानदान विशेष की नजरों में एक बार में ही अच्छी रैंक हासिल कर ली है, उनके इस बयान के बाद अब और भी TV स्क्रीन पर आने के मौके मीडिया गिरोह द्वारा दिए जाएँगे। इस लिस्ट में सबसे अच्छी पहचान नसीरुद्दीन शाह ने हासिल की है और इस बार मोदी के खिलाफ वोट करने की अपील करने के लिए इन 600 गुमनाम कलाकारों को ढूँढकर लाने की जिम्मेदारी भी विपक्ष ने नसीरुद्दीन शाह को ही सौंपी है।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

अभिव्यक्ति की आजादी को मोहरा बनाकर हर दूसरे दिन खुलेआम हिन्दू धर्म और भारत की सहिष्णुता को बदनाम करने वाले नसीरुद्दीन शाह ने जमकर लहरिया लूटी है। उन्हीं के क़दमों पर चलते हुए इन पिछले 5 सालों में असहिष्णुता के दीवाने कई क्रांतिकारियों ने जन्म लिया, जो किसी ना किसी तरह से बेरोजगारी और गुमनामी की मार झेल रहे थे। इसलिए अभिव्यक्ति और असहिष्णुता का कारोबार खूब बिका है।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर आजकल एक नई सनसनी के जरिए ये गुमनाम कलाकार लोगों का ध्यान खींचने में एक बार दुबारा सफल हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमोल पालेकर, नसीरुद्दीन शाह, गिरीश कर्नाड और उषा गांगुली सहित 600 से अधिक थिएटर हस्तियों ने एक पत्र पर हस्ताक्षर करके लोगों को ‘भाजपा और उसके सहयोगियों’ को सत्ता से बाहर करने के लिए कहा है।

इस पत्र में कहा गया है कि भारत और उसके संविधान का विचार खतरे में है। आर्टिस्ट यूनाइट इंडिया वेबसाइट पर बृहस्पतिवार शाम (मार्च 04,2019) को 12 भाषाओं में यह पत्र जारी किया गया है। इसमें लिखा है कि आगामी लोकसभा चुनाव देश के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण है और बीजेपी ने हिंदुत्व के गुंडों को नफरत और हिंसा की राजनीति करने के लिए स्वतंत्र कर दिया है

पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में शांता गोखले, महेश एलकुंचवार, महेश दत्तानी, अरुंधति नाग, कीर्ति जैन, अभिषेक मजुमदार, कोंकणा सेन शर्मा, रत्ना पाठक शाह, लिलेट दुबे, मीता वशिष्ठ, एम के रैना, मकरंद देशपांडे और अनुराग कश्यप शामिल हैं। इनमें लगभग 600 लोग ऐसे हैं, जिन्हें शायद ही कोई ठीक से जानता होगा।

मजे की बात है कि इन 600 में से 599 नाम के अलावा सिर्फ नसीरुद्दीन शाह ही अकेला ऐसा व्यक्ति है, जो वक़्त-बेवक़्त अपनी उल-जुलूल बयानबाजी और फ़्लॉप फिल्मों के रिकॉर्ड की वजह से चर्चा में बने रहने में सफल रहे हैं।

अगर बारीकी से देखा जाए तो इन 600 कलाकारों की वर्तमान हक़ीक़त भी शायद उसी नयनतारा सहगल जैसी है, जिसके जीवन की कुल अचीवमेंट कश्मीर समस्या के मुख्य अभियुक्त जवाहरलाल नेहरू की बहन विजयालक्ष्मी पंडित की बेटी होना है और दूसरा इसी पहचान के कारण साहित्य अकादमी पुरस्कार पाना है। लेकिन दुखद बात ये कि वो उस पुरस्कार को भी अब लौटा चुकी हैं।

एक संयुक्त बयान में इन गुमनाम और चर्चा में आने के शौक़ीन 600 कलाकारों का मानना है कि आज भारत का विचार खतरे में है। बात सही भी है, हो सकता है कि ‘भारत का विचार’ से उनका तात्पर्य अपने पसंदीदा खानदान के युवराज राहुल गाँधी से हो और उनको सत्ता में देखना हो। वास्तविकता ये है कि ये सदियों से सत्ता में बैठा खानदान इनका आसमान बन चुका है और इसके सरक जाने के कारण ही ये सब गिरोह बौखला रहे हैं।

इन 600 कलाकारों को मनचाहे पद और पुरस्कार देने वाले लोग अब संसद में मात्र 45 की संख्या में सिमट गए हैं। आज सत्तापरस्त और राजनीति के इस खानदान विशेष की हालात ये है कि अपने अस्तित्व को बचाने के लिए ये अपने पारम्परिक अमेठी से दक्षिण की ओर अपना सेफ जोन तलाशने निकले हैं। इसलिए इनके ‘लोकतंत्र  और संविधान ’ का खतरे में होना स्वाभाविक है। मोदी सरकार द्वारा जिन संस्थानों का ‘दम घोंटे’ जाने का जिक्र ये 600 लोगों का बेरोजगार समूह कर रहा है, वो संस्थान, कॉन्ग्रेस कार्यालय और राजमाता सोनिया गाँधी का कार्यालय हो सकता है।

इन सबसे ऊपर इन 600 खलिहर लोगों ने जो बात अपने पत्र में लिखी है वो है ‘हिंदुत्व के गुंडों’ का वर्णन! गुमनामी में जी रहे इन 600 लोगों ने भी सस्ती लोकप्रियता के लिए वही विधि अपनाई है, जो पुलवामा आतंकी हमले में समुदाय विशेष के उस भटके हुए फिदायीन ने अपनाई थी, यानि हिंदुत्व पर हमला! विपक्ष ने हमेशा से ही अल्पसंख्यकों के वोट को रिझाने के लिए हिन्दुओं को आतंकवाद और गुंडागिर्दी से जोड़ने का आसान तरीका अपनाया है। इन 5 सालों में देखा गया है कि कोई ना कोई भटका हुआ व्यक्ति हिंदुत्व को उग्र संगठन और हिंसक धर्म की पहचान देने की पुरजोर कोशिशें करता नजर आया है।

इन 600 लोगों ने कहा है कि विकास के वादे के साथ पाँच साल पहले सत्ता में आई बीजेपी ने हिंदुत्व के गुंडों को नफरत और हिंसा की राजनीति करने के लिए स्वतंत्र कर दिया है। यही वजह है कि हम अपील करते हैं कि लोग संविधान, धर्मनिरपेक्ष लोकाचार की रक्षा करने और कट्टरता, घृणा और सत्ता से बाहर कुछ न सोचने वालों के खिलाफ वोट करें।

शायद इस पत्र को लिखने से पहले इन बेरोजगार कलाकारों को ये ध्यान नहीं रहा कि इनके अन्नदाता राहुल गाँधी जनेऊ और मानसरोवर की फोटोशॉप यात्राओं द्वारा हिन्दुओं के बीच अपनी छवि बनाने का प्रयास कर रहे हैं। या फिर ये भी हो सकता है कि अपने मालिकों द्वारा मुस्लिम लीग के साथ हुई नवीन सांठगांठ ने ही इन कलाकारों को यह बात कहने का हौंसला दिया हो।

पश्चिम बंगाल से लेकर केरल में, सम्पूर्ण उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक में जबरन धर्म परिवर्तन से लेकर हिन्दू नाबालिग लड़कियों के अपहरण और हिन्दूओं के खुलेआम निर्मम हत्या किए जाने तक पर मौन धारण कर लेने वाला मीडिया गिरोह पाकिस्तान जैसे देश के प्रति अपनी ममता और करुणा उड़ेलता देखा गया है। हर दूसरी आतंकवादी घटना, हिंसक गतिविधि, क़त्ल, अपहरण, बलात्कार में हिन्दुओं को शिकार बनाया जाता रहा है, लेकिन फिर भी हिन्दुओं को हिंसक बताना नया फैशन बनकर उभरा है। इन पाकिस्तान परस्तों ने भी इस मामले में पाकिस्तान की ही ‘बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा’ वाली रणनीति को अपनाया है।

अगर देखा जाए तो वास्तव में हिन्दुओं को इस देश में इस तरह के बयान देने चाहिए, लेकिन हक़ीक़त एकदम उलट है। हिन्दुओं को इस देश में एक अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा पीड़ित किया जाता रहा है, उनकी आस्थाओं को हर दूसरे दिन अपमानित करने वाले वो लोग हैं, जिन्हें इस देश ने अल्पसंख्यक होने के नाम पर खुली छूट दी है और अन्य की तुलना में ज्यादा अधिकार दिए हैं। हिन्दुओं के अधिकारों पर बात करना आपको सांप्रदायिक बना देता है, अपनी पहचान हिन्दू बताने पर आपको उग्र घोषित कर दिया जाता है।

खैर, दिल को खुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है। अगर हिन्दुओं को हिंसक बताकर और मोदी के खिलाफ वोट करने की अपील से इन 600 गुमनामी में जी रहे कलाकारों को कुछ पहचान और सस्ती लोकप्रियता मिलती है, तो इन्हें अवश्य इस तरह के दो-चार और बयान देकर अपनी रोजी रोटी का जुगाड़ करना चाहिए। वैसे भी मोदी सरकार के दौरान अभिव्यक्ति की आजादी का जितना फायदा इन भटके हुए कलाकारों ने उठाया है, उतना शायद रोजाना TV चैनल पर आकर बागों में बहार है जैसे सवाल पूछ्कर TRP का रोना रोने वाले और फेसबुक पर TV ना देखने की अपील करने वाले व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी के कुलपति ने भी नहीं उठाया होगा।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

जम्मू कश्मीर पर UN की बैठक बुलाने वाला चीन हॉन्गकॉन्ग पर UN की रिपोर्ट को ग़लत बताता है। लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों को आतंकी बताता है। उन्हें अपनी सेना का धौंस दिखा रहा है। जबकि हॉन्गकॉन्ग की 71% जनता चीनी कहलाने में गर्व महसूस नहीं करती।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

अमानुल्लाह जेहरी

PAk से आज़ादी माँग रहे बलूचिस्तान में बीएनपी नेता और उनके 14 साल के पोते को गोलियों से छलनी किया

पाकिस्तान को अपने स्वतन्त्रता दिवस (14 अगस्त) के दिन तब शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब ट्विटर पर बलूचिस्तान के समर्थन में BalochistanSolidarityDay और 14thAugustBlackDay हैशटैग ट्रेंड करने लगा था। इन ट्रेंडों पर तकरीबन क्रमशः 100,000 और 54,000 ट्वीट्स हुए।

राजस्थान: मुसलमानों के हाथों मारे गए हरीश जाटव के नेत्रहीन पिता के शव के साथ सड़क पर उतरे लोग, पुलिस से झड़प

हरीश जाटव की बाइक से एक मुस्लिम महिला को टक्कर लग गई थी। इसके बाद मुस्लिम महिला के परिजनों ने उसकी जमकर पिटाई की। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस मॉब लिंचिंग के मामले को एक्सीडेंट साबित करने पर तुली हुई है।
चापेकर बंधु

जिसके पिता ने लिखी सत्यनारायण कथा, उसके 3 बेटों ने ‘इज्जत लूटने वाले’ अंग्रेज को मारा और चढ़ गए फाँसी पर

अंग्रेज सिपाही प्लेग नियंत्रण के नाम पर औरतों-मर्दों को नंगा करके जाँचते थे। चापेकर बंधुओं ने इसका आदेश देने वाले अफसर वॉल्टर चार्ल्स रैंड का वध करने की ठानी। प्लान के मुताबिक जैसे ही वो आया, दामोदर ने चिल्लाकर अपने भाइयों से कहा "गुंडया आला रे" और...
गुटखा

सिपाही ने गुटखा खाया लेकिन पैसे नहीं दिए, दुकानदार ने जब 5 रुपए माँगे… तो इतना मारा कि मर गया

उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही ने राहुल की चाय की दुकान से गुटखा लिया। लेकिन उसके पैसे दुकानदार को नहीं दिए। जब राहुल ने गुटखे के पैसे माँगे तो इस पर सिपाही को काफ़ी गुस्सा आ गया। उसने उसे वहीं बड़ी बेरहमी से पीटा और फिर अधमरी हालत में थाने ले जाकर...
कश्मीर

कश्मीरी औरतें (हिंदू-मुसलमान दोनों) जो हवस और जहन्नुम झेलने को मजबूर हैं

दहशतगर्दी के शुरुआती दिनों में आतंकियों को हीरो समझा जाता था। उन्हें मुजाहिद कहकर सम्मान भी दिया जाता था। लोग अपनी बेटियों की शादी इनसे करवाते थे लेकिन जल्दी ही कश्मीरियों को यह एहसास हुआ कि आज़ादी की बंदूक थामे ये लड़ाके असल में जिस्म को नोचने वाले भेड़िये हैं।
शाजिया इल्मी

भारत विरोधी नारे लगा रहे लोगों से सियोल में अकेले भिड़ गईं BJP नेता शाजिया इल्मी

शाजिया इल्मी को भारत विरोधी नारों से आपत्ति हुई तो वह प्रदर्शनकारियों के बीच पहुँच गईं और उन्हें समझाने की कोशिश की। जब प्रदर्शनकारी नहीं माने, तो वे भी इंडिया जिंदाबाद के नारे लगाने लगीं।
कविता कृष्णन

कविता कृष्णन का ईमेल लीक: देश विरोधी एजेंडे के लिए न्यायपालिका, सेना, कला..के लोगों को Recruit करने की योजना

वामपंथियों की जड़ें कितनी गहरी हैं, स्क्रीनशॉट्स में इसकी भी नज़ीर है। कविता कृष्णन पूर्व-सैन्यकर्मी कपिल काक के बारे में बात करतीं नज़र आतीं हैं। वायुसेना के पूर्व उप-प्रमुख यह वामपंथी प्रोपेगंडा फैलाते नज़र आते हैं कि कैसे भारत ने कश्मीर की आशाओं पर खरा उतरने में असफलता पाई है, न कि कश्मीर ने भारत की
अब्दुल सईद गिरफ़्तार

DCP विक्रम कपूर आत्महत्या: ब्लैकमेल करने वाला इंस्पेक्टर अब्दुल सईद गिरफ़्तार, महिला मित्र के लिए…

इंस्पेक्टर अब्दुल सईद का भांजा मुजेसर थाने में एक मामले में नामजद था, उसे वो बाहर निकलवाना चाहता था। उसकी महिला मित्र का उसके ससुर के साथ प्रॉपर्टी को लेकर एक विवाद था, इस मामले में भी इंस्पेक्टर अब्दुल ने डीसीपी विक्रम कपूर पर...
'द वायर', बेगूसराय महादलित

‘मुस्लिम गुंडे नहाते समय मेरी माँ को घूरते’ – पीड़ित से The Wire के पत्रकार ने पूछा – तुम्हें बजरंग दल ने सिखाया?

द वायर' का पत्रकार यह जानना चाहता था कि क्या पीड़ित ने बजरंग दल के कहने पर पुलिस में मामला दर्ज कराया है? हालाँकि, पीड़ित ने पत्रकार द्वारा बार-बार बात घुमाने के बाद भी अपने बयान पर कायम रहते हुए बताया कि पुलिस को उसने जो बयान दिया है, वह उसका ख़ुद का है।
कपिल काक

370 पर सरकार के फैसले के खिलाफ SC पहुॅंचे पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक, कविता कृष्णन के लीक ईमेल में था नाम

वामपंथी एक्टिविस्ट कविता कृष्णन ने सोशल मीडिया में वायरल हुए अपने लीक ईमेल में भी कपिल काक, जस्टिस शाह के बारे में बात की है। लीक मेल में जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मिला विशेष दर्जा हटने के विरोध की रणनीति का ब्यौरा मौजूद है।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

82,168फैंसलाइक करें
11,554फॉलोवर्सफॉलो करें
89,344सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: