Sunday, July 5, 2020
Home विचार राजनैतिक मुद्दे लेबर पार्टी और ईसाई संस्थाओं के टट्टुओं का समूह है 'स्टॉप फंडिंग हेट': भारत-विरोधी...

लेबर पार्टी और ईसाई संस्थाओं के टट्टुओं का समूह है ‘स्टॉप फंडिंग हेट’: भारत-विरोधी जेरेमी कोर्बिन से है सम्बन्ध

पश्चिमी देशों ने इतने सारे 'सिविल सोसाइटी' संस्थाएँ कुकुरमुत्तों की तरह पैदा कर रखी हैं कि वो हर उस देश में दखल देते हैं, जिसके पश्चिमी देशों से भविष्य में बराबरी करने की सम्भावना है या जो तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे एनजीओ का काम ही यही होता है कि वो ये सुनिश्चित करें कि उनके नैरेटिव के अनुसार चीजें चलती रहें। ऐसा न होने पर वो सीधा राजनीतिक और सामाजिक हस्तक्षेप पर उतर आती हैं।

ये भी पढ़ें

Nupur J Sharma
Editor, OpIndia.com since October 2017

हाल के दिनों में विदेशी ताक़तों व मीडिया द्वारा विभिन्न चुनावों में हस्तक्षेप किए जाने को लेकर काफ़ी कुछ कहा-सुना जा चुका है। इसी तरह का कुछ अमेरिका में हुआ, जहाँ वामपंथियों की हार और डोनाल्ड ट्रम्प की जीत को रूस से जोड़ दिया गया और रूस द्वारा चुनावों में हस्तक्षेप की बात दुष्प्रचारित की गई। जहाँ भी जनता ने अपने लोकतान्त्रिक अधिकारों का प्रयोग कर फैसला लिया, वामपंथियों ने रूस को दोष दे दिया। यहाँ तक कि ब्रेक्सिट में भी। यहाँ, हम ‘स्टॉप फंडिंग हेट’ की बात कर रहे हैं।

हालाँकि, विदेशी हस्तक्षेप कोई नई बात नहीं है लेकिन यहाँ हम चर्चा करेंगे ‘स्टॉप फंडिंग हेट’ नामक संस्था की। दरअसल, विदेशी हस्तक्षेप का मकसद ही होता है कि किसी देश में अपने फायदे के लिए दखल देना। अपने हित के लिए किसी अन्य देश के राजनीतिक क्रियाकलापों में अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी। ये उसके उलट है, जो पश्चिमी देश हल्ला मचाते रहते हैं। चुनावी हस्तक्षेप से कहीं ज्यादा बड़ी चीज है राजनीतिक हस्तक्षेप। ये सबसे सामान्य हथियार है, किसी देश में अपना दखल मजबूत करने का।

पश्चिमी देशों ने इतने सारे ‘सिविल सोसाइटी’ संस्थाएँ कुकुरमुत्तों की तरह पैदा कर रखी हैं कि वो हर उस देश में दखल देते हैं, जिसके पश्चिमी देशों से भविष्य में बराबरी करने की सम्भावना है या जो तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे एनजीओ का काम ही यही होता है कि वो ये सुनिश्चित करें कि उनके नैरेटिव के अनुसार चीजें चलती रहें। ऐसा न होने पर वो सीधा राजनीतिक और सामाजिक हस्तक्षेप पर उतर आती हैं।

ऑपइंडिया के खिलाफ़ ‘स्टॉप फंडिंग हेट’ का दुष्प्रचार अभियान

‘स्टॉप फंडिंग हेट’ इसी तरह की एक संस्था है। ये एक कम्युनिटी है, जो यूके में एक कम्पनी के रूप में रजिस्टर्ड है। हाल ही में उन्होंने ऑपइंडिया के खिलाफ एक दुष्प्रचार अभियान चलाया, जो अभी भी बदस्तूर जारी है। उनका प्रमुख उद्देश्य है कि ऑपइंडिया के रेवेन्यु पर वार किया जाए। वो चाहते हैं कि हमें कम्पनियों द्वारा एडवरटाईजमेंट न मिले, ताकि ऑपइंडिया के पास वित्त की कमी हो जाए। वो हमें कंगाल करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

इसका कारण एकदम स्पष्ट है। ऑपइंडिया एक दक्षिणपंथी मीडिया प्लेटफार्म है, जो अक्सर वामपंथी मीडिया के बने-बनाए ढाँचे को चुनौती देता है और वो ये चीज बर्दाश्त नहीं कर पाते। वो नैरेटिव कुछ इस तरह से गढ़ता है कि लोग हर चीज को वामपंथ के चश्मे से पढ़ने को विवश हो जाएँ। जो भी उनके द्वारा बनाए गए नियमों पर नहीं चलता, ये ठेकेदार उन्हें नुकसान पहुँचाने के लिए उसकी फंडिंग और रेवेन्यु पर वार करते हैं। वो उसके सञ्चालन को रोकने में पूरी ताक़त झोंक देते हैं ताकि वो इनके विरुद्ध खड़ा भी न रह सके।

अगर वो इसमें सफल रहते हैं तो मीडिया में दक्षिणपंथ का नामोंनिशान मिट जाएगा और उन्होंने जो धारणाएँ और अपने नियम-कायदे बना रखे हैं, उसे चुनौती देने वाला कोई नहीं रह जाएगा। वो ऐसा कर सकते हैं या नहीं, इस सम्बन्ध में हम जवाब दे चुके हैं। लेकिन हाँ, वो हमेशा अपने इस उद्देश्य की पूर्ति में प्रयासरत रहते हैं। अगर वो सफल रहते हैं तो भारत की राजनीति पर उसका क्या दुष्प्रभाव होगा, ये छिपा नहीं है।

भारत में वामपंथी मीडिया संस्थानों का सबसे प्रमुख कार्य है हिन्दू संस्थाओं के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाना और उनके बारे में फेक न्यूज़ फैलाना। ऑपइंडिया ऐसी कई हरकतों को रंगे हाथों पकड़ कर उसका खुलासा कर चुका है। जहाँ तक ”स्टॉप फंडिंग हेट’ की बात है, ये अर्नब गोस्वामी के चैनल ‘रिपब्लिक टीवी से भी चिढ़ता है और उस पर एडवरटाईजमेंट देने वाली कम्पनियों को धमकाता रहता है, दबाव बनाता है।

दुनिया भर में कुख्यात है ‘स्टॉप फंडिंग हेट’

इसने ‘द सन’, ‘द डेली मेल’ और ‘द डेली एक्सप्रेस’ जैसे अख़बारों को भी धमकाने की कोशिश की, जो यूके में सक्रिय हैं। वहाँ उन्हें वामपंथियों का खूब समर्थन मिला, जिन्हें ऐसे संस्थानों की प्रताड़ना पर मजा आता है जो उनके विरोधी हैं। इसकी वेबसाइट कहती है कि ये प्रचार सामग्री मुहैया कराने वाली कम्पनियों को उन प्रकाशनों से दूर रहने के लिए कहता है, जो घृणा फैलाते हैं।इसके नाम पर ये केवल दक्षिणपंथी पोर्टलों को निशाना बनाता है, इस्लामी और कट्टरपंथियों को नहीं।

उसका कहना है कि कुछ लोगों ने आगे आकर इसकी स्थापना तब की, जब अख़बारों द्वारा लगातार घृणा फैलाई जा रही थी और उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था। उनका कहना है कि इन इन अख़बारों की कमाई का प्रमुख जरिया कम्पनियाँ हैं जो इन्हें प्रचार सामग्री देती है और इसीलिए जैसे ही इनकी कमाई घटेगी, ये घृणा फैलाना बंद कर देंगे। साथ ही वो ये भी दावा करता है कि अल्पसंख्यकों को मीडिया में लम्बे समय से घृणा का शिकार बनाया जा रहा है।

इसके पीछे कौन लोग हैं?

दरअसल, ‘स्टॉप फंडिंग हेट’ के बोर्ड सदस्यों में जितने भी लोग हैं, वो सब के सब किसी न किसी घोर वामपंथी संगठनों से ताल्लुक रखते हैं। जैसे, रिचर्ड विल्सन ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल‘ का सदस्य है। ये एक ऐसा एनजीओ है, जो जम्मू कश्मीर से लेकर अन्य मुद्दों पर भारत को बदनाम करने में पूरी ताक़त लगा देता है। उसका सीधा कहना है कि उसके संस्था का उद्देश्य है कि मीडिया वैसे ही काम करे, जैसा वो चाहता है।

वो कहता है कि वही चीजें प्रकाशित करो, जो उसकी संस्था या उसके लोग चाहते हैं। वो कहता है कि वो लिखो, जैसा वो चाहता है नहीं तो वो हर उस मीडिया संस्थान के खिलाफ जाएगा, जो इससे इनकार कर देंगे। यानी वो राजनीतिक पक्षपात के छत्र तले मीडिया पर लगाम लगाना चाहता है। एक अन्य एनजीओ की सदस्य रोजी इलम भी इसके बोर्ड में बैठी हुई हैं। वो फिलिस्तीन की समर्थक हैं। साथ ही वो इजरायल पर जबरन फिलिस्तीन की जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाती हैं।

साथ ही उन्होंने ब्रिटेन के चुनाव में कोर्बिन का समर्थन किया था, जिसकी इतनी बुरी हार हुई कि लेबर पार्टी की लुटिया ही डूब गई। कैथरिन टेलर इस अभियान की डायरेक्टर थीं, जिन्होंने 2019 में इस्तीफा दे दिया था। वो लेबर पार्टी से लम्बे समय तक जुडी रही हैं। इसके अलावा इमाम आत्ता का भी नाम आता है, जिसके बारे में बताया गया है कि वो मुसलमानों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों पर नज़र रखता है।

भारत को क्यों सावधान रहना चाहिए?

हर ओर से देखने पर लगता है कि ये संस्था और इसका अभियान लेबर पार्टी से जुड़ा हुआ है, जिसका भारत विरोधी इतिहास रहा है। इसके बोर्ड के सदस्य अपनी इच्छा के अनुसार राजनीति को ढालना चाहते हैं। ये ऑक्सफेम इंडिया से अलग नहीं है, जो कॉन्ग्रेस को भारत के सिविल सोसाइटी संगठनों के साथ गठबंधन करने को कहता है। साथ ही ये एमनेस्टी वगैरह जैसी संस्थानों की तरह दूसरे देशों की राजनीति और क्रियाकलाप में दखल देने का भी काम करता है।

SFH की वेबसाइट

भारत में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा खम्भा माना जाता है, ऐसे में कोई विदेशी ताकत आकर ये तय करने लगे कि क्या छ्पेगा और क्या नहीं, ये हमारे लिए सतर्क रहने वाली बात होनी चाहिए। अगर विदेशी संस्थाएँ भारतीय मीडिया को डिक्टेट करने लगे तो फिर भारत के लिए ये चिंताजनक है, यहाँ की राजनीति के लिए भी सही नहीं है। हालाँकि, अभी तक हमे ये स्पष्ट नहीं पता चला है कि कौन-कौन इस अभियान को फंड कर रहे हैं।

जिस तरह से इसके जेरेमी कोर्बिन के साथ सम्बन्ध हैं, इसाई संस्थाओं के साथ सम्बन्ध हैं और लेबर पार्टी के साथ जुड़ाव है, ये भारत के लिए किसी भी स्थिति में एक आदर्श स्थिति नहीं है और विपरीत प्रभाव डालने वाला है। अन्य मीडिया संस्थानों को भी इससे सतर्क रहना चाहिए और इसके प्रोपगंडा के आगे झुकना नहीं चाहिए।

नोट: यह OPINDIA की संपादक नूपुर जे शर्मा द्वारा मूलरूप से इंग्लिश में लिखे इस लेख का संक्षिप्त अनुवाद है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Nupur J Sharma
Editor, OpIndia.com since October 2017

ख़ास ख़बरें

हॉस्पिटल से ₹4.21 लाख का बिल, इंश्योरेंस कंपनी ने चुकाए सिर्फ ₹1.2 लाख: मनोज इलाज की जगह ‘कैद’

मनोज कोठारी पर यह परेशानी अकेले नहीं आई। उनके परिवार के 2 और लोग कोरोना संक्रमित हैं। दोनों का इलाज भी इसी हॉस्पिटल में। उनके बिल को लेकर...

CARA को बनाया ईसाई मिशनरियों का अड्डा, विदेश भेजे बच्चे: दीपक कुमार को स्मृति ईरानी ने दिखाया बाहर का रास्ता

CARA सीईओ रहते दीपक कुमार ने बच्चों के एडॉप्शन प्रक्रिया में धाँधली की। ईसाई मिशनरियों से साँठगाँठ कर अपने लोगों की नियुक्तियाँ की।

नक्सलियों की तरह DSP का काटा सर-पाँव, सभी 8 लाशों को चौराहे पर जलाने का था प्लान: विकास दुबे की दरिंदगी

विकास दुबे और उसके साथी बदमाशों ने माओवादियों की तरह पुलिस पर हमला किया था। लगभग 60 लोग थे। जिस तरह से उन लोगों ने...

बकरीद के पहले बकरे से प्यार वाले पोस्टर पर बवाल: मौलवियों की आपत्ति, लखनऊ में हटाना पड़ा पोस्टर

"मैं जीव हूँ मांस नहीं, मेरे प्रति नज़रिया बदलें, वीगन बनें" - इस्लामी कट्टरपंथियों को अब पोस्टर से भी दिक्कत। जबकि इसमें कहीं भी बकरीद या...

उनकी ही संतानें थी कौरव और पांडव: जानिए कौन हैं कृष्ण द्वैपायन, जिनका जन्मदिन बन गया ‘गुरु पूर्णिमा’

वो कौरवों और पांडवों के पितामह थे। महाभारत में उनकी ही संतानों ने युद्ध किया। वो भीष्म के भाई थे। कृष्ण द्वैपायन ने ही वेदों का विभाजन किया। जानिए कौन थे वो?

‘…कभी नहीं मानेंगे कि हिन्दू खराब हैं’ – जब मानेकशॉ के कदमों में 5 Pak फौजियों के अब्बू ने रख दी थी अपनी पगड़ी

"साहब, आपने हम सबको बचा लिया। हम ये कभी नहीं मान सकते कि हिन्दू ख़राब होते हैं।" - सैम मानेकशॉ की पाकिस्तान यात्रा से जुड़ा एक किस्सा।

प्रचलित ख़बरें

जातिवाद के लिए मनुस्मृति को दोष देना, हिरोशिमा बमबारी के लिए आइंस्टाइन को जिम्मेदार बताने जैसा

महर्षि मनु हर रचनाकार की तरह अपनी मनुस्मृति के माध्यम से जीवित हैं, किंतु दुर्भाग्य से रामायण-महाभारत-पुराण आदि की तरह मनुस्मृति भी बेशुमार प्रक्षेपों का शिकार हुई है।

गणित शिक्षक रियाज नायकू की मौत से हुआ भयावह नुकसान, अनुराग कश्यप भूले गणित

यूनेस्को ने अनुराग कश्यप की गणित को विश्व की बेस्ट गणित घोषित कर दिया है और कहा है कि फासिज़्म और पैट्रीआर्की के समूल विनाश से पहले ही इसे विश्व धरोहर में सूचीबद्द किया जाएगा।

काफिरों को देश से निकालेंगे, हिन्दुओं की लड़कियों को उठा कर ले जाएँगे: दिल्ली दंगों की चार्ज शीट में चश्मदीद

भीड़ में शामिल सभी सभी दंगाई हिंदुओं के खिलाफ नारे लगा रहे और कह रहे थे कि इन काफिरों को देश से निकाल देंगे, मारेंगे और हिंदुओं की लड़कियों को.......

‘…कभी नहीं मानेंगे कि हिन्दू खराब हैं’ – जब मानेकशॉ के कदमों में 5 Pak फौजियों के अब्बू ने रख दी थी अपनी पगड़ी

"साहब, आपने हम सबको बचा लिया। हम ये कभी नहीं मान सकते कि हिन्दू ख़राब होते हैं।" - सैम मानेकशॉ की पाकिस्तान यात्रा से जुड़ा एक किस्सा।

इजरायल ने बर्बाद किया ईरानी परमाणु ठिकाना: घातक F-35 विमानों ने मिसाइल अड्डे पर ग‍िराए बम

इजरायल ने जोरदार साइबर हमला करके ईरान के परमाणु ठिकानों में दो विस्‍फोट करा दिए। इनमें से एक यूरेनियम संवर्धन केंद्र है और दूसरा मिसाइल निर्माण केंद्र।

नेपाल के कोने-कोने में होऊ यांगी की घुसपैठ, सेक्स टेप की चर्चा के बीच आज जा सकती है PM ओली की कुर्सी

हनीट्रैप में नेपाल के पीएम ओली के फँसे होने की अफवाहों के बीच उनकी कुर्सी बचाने के लिए चीन और पाकिस्तान सक्रिय हैं। हालॉंकि कुर्सी बचने के आसार कम बताए जा रहे हैं।

हॉस्पिटल से ₹4.21 लाख का बिल, इंश्योरेंस कंपनी ने चुकाए सिर्फ ₹1.2 लाख: मनोज इलाज की जगह ‘कैद’

मनोज कोठारी पर यह परेशानी अकेले नहीं आई। उनके परिवार के 2 और लोग कोरोना संक्रमित हैं। दोनों का इलाज भी इसी हॉस्पिटल में। उनके बिल को लेकर...

उत्तराखंड: रात में 15 साल की बच्ची को घर से उठाया, जुनैद और सुहैब ने किया दुष्कर्म

रेप की यह घटना उत्तराखंड के लक्सर की है। आरोपित एक दारोगा के सगे भाई बताए जा रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

उस रात विकास दुबे के घर दबिश देने गई पुलिस के साथ क्या-क्या हुआ: घायल SO ने सब कुछ बताया

बताया जा रहा है कि विकास दुबे भेष बदलने में माहिर है और अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखता। राजस्थान के एक नेता के साथ उसके बेहद अच्छे संबंध की भी बात कही जा रही है।

अपने रुख पर कायम प्रचंड, जनता भी आक्रोशित: भारत विरोधी एजेंडे से फँसे नेपाल के चीनपरस्त PM ओली

नेपाल के PM ओली ने चीन के इशारे पर नाचते हुए भारत-विरोधी बयान तो दे दिया लेकिन अब उनके साथी नेताओं के कारण उनकी अपनी कुर्सी जाने ही वाली है।

काली नागिन के काटने से जैसे मौत होती है उसी तरह निर्मला सीतारमण के कारण लोग मर रहे: TMC सांसद कल्याण बनर्जी

टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लेकर विवादित बयान दिया है। उनकी तुलना 'काली नागिन' से की है।

‘अल्लाह ने अपने बच्चों को तनहा नहीं छोड़ा’: श्रीकृष्ण मंदिर में मालिक ने की तोड़फोड़, ‘हीरो’ बता रहे पाकिस्तानी

पाकिस्तान के स्थानीय मुसलमानों ने इस्लामाबाद में बन रहे श्रीकृष्ण मंदिर में तोड़फोड़ मचाने वाले मलिक को एक 'नायक' के रूप में पेश किया है।

रोती-बिलखती रही अम्मी, आतंकी बेटे ने नहीं किया सरेंडर, सुरक्षा बलों पर करता रहा फायरिंग, मारा गया

कुलगाम में ढेर किए गए आतंकी से उसकी अम्मी सरेंडर करने की गुहार लगाती रही, लेकिन वह तैयार नहीं हुआ।

CARA को बनाया ईसाई मिशनरियों का अड्डा, विदेश भेजे बच्चे: दीपक कुमार को स्मृति ईरानी ने दिखाया बाहर का रास्ता

CARA सीईओ रहते दीपक कुमार ने बच्चों के एडॉप्शन प्रक्रिया में धाँधली की। ईसाई मिशनरियों से साँठगाँठ कर अपने लोगों की नियुक्तियाँ की।

पाकिस्तानी घोटाले से जुड़े हैं हुर्रियत से गिलानी के इस्तीफे के तार, अलगाववादी संगठन में अंदरुनी कलह हुई उजागर

सैयद अली शाह गिलानी के इस्तीफ को पाकिस्तान के मेडिकल कॉलेज में एडमिशन को लेकर गड़बड़ियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

सुरक्षाबलों ने ओडिशा के कंधमाल में 4 नक्सलियों को किया ढेर, सर्च ऑपरेशन जारी

ओडिशा के कंधमाल जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ में चार नक्सलियों के मारे जाने की खबर है।

हमसे जुड़ें

234,622FansLike
63,120FollowersFollow
269,000SubscribersSubscribe