Saturday, February 27, 2021
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CAA-विरोधियों द्वारा मार दिए गए नीरज की मृत्यु में शादाब नाम वाला सेकुलर ग्लैमर नहीं है

नीरज प्रजापति को निर्ममता से मार दिए जाने के बावजूद भी मेनस्ट्रीम मीडिया की बहस बनने तक का अधिकार नहीं है क्योंकि नीरज का नाम शादाब नहीं है और ना ही नीरज शाहीन बाग़ वालों की तरह फैज़ की नज़्म पढता था।

ऐसे समय में, जब कि शाहीन बाग़ का मास्टर माइंड शरजील इमाम गिरफ्तारी के बाद भारत को एक इस्लामी राज्य बनाने का सपना देखने की बात स्वीकार कर चुका है, लिबरल मीडिया गिरोह अपना एक नया सिपाही मैदान में लेकर आती है। मीडिया में अचानक कहीं से बन्दूक लहराते हुए किसी ‘रामभक्त गुलशन’ (बदला हुआ नाम) की बहस छिड़ जाती है। इंटरनेट लिबरल्स को मानो अपना मुख्य मुद्दा देर-सबेर किसी ने लाकर उनके हाथ में थमा दिया।

आज ही एक युवक ने तब गोली चला दी जब जामिया में मार्च निकाला जा रहा था। गोली चलते ही मार्च में अफरा-तफरी मच गई। हालाँकि गोली चलने से पहले उसका पीछा करते हुए कुछ रिपोर्टर वीडियो में उसका नाम पूछते सुने गए, इसके बाद गोली चलने की एक आवाज भी सुनाई दी।

इस फायरिंग में शादाब नाम के एक युवक को गोली लगी है, जिसे अस्पताल भी भर्ती करवा लिया गया है। लेकिन नीरज को इतना मौका नहीं मिल पाया। वही नीरज प्रजापति, जिन्हें झारखंड में मुस्लिम भीड़ ने मार डाला। नीरज प्रजापति को निर्ममता से मार दिए जाने के बावजूद भी मेनस्ट्रीम मीडिया की बहस बनने तक का अधिकार नहीं है क्योंकि नीरज का नाम शादाब नहीं है और ना ही नीरज शाहीन बाग़ वालों की तरह फैज़ की नज़्म पढता था।

नीरज मूर्तियाँ बनाते थे और CAA के मुद्दे पर सरकार के समर्थन में खड़े थे। CAA समर्थन में निकाली जा रही रैली में नीरज के सर पर पीछे से लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। नीरज प्रजापति JNU से नहीं थे, वो मूर्तियाँ बनाते थे और उसी से अपने घर का पेट पालते थे। लेकिन मृतक नीरज का परिवार आज भी आतंकवादी अफजल गुरु की यादों में खून रोने वाली मीडिया और लिबरल गिरोह की संवेदनाओं के इन्तजार में है।

लेकिन बौड़म लिबरल नीरज प्रजापति की बात नहीं करता है, उसी तरह से जिस तरह से ठीक एक साल पहले लाल चौक पर तिरंगा फहराने गए चंदन गुप्ता के बारे में बात नहीं की जाती है। लिबरल गिरोह का नया शगल आज बन्दूक लहराते हुए फायरिंग करने वाला ‘रामभक्त गुलशन’ है। रामभक्त गुलशन के नाटकीय तरीके से बन्दूक लहराते ही CAA और NRC के मुद्दे अनाथ हो गए हैं। क्योंकि अनुराग कश्यप, ध्रुव राठी और पूरे गिरोह ने लौटकर मोदी-शाह के मुद्दे को पकड़ लिया है।

कथित रामभक्त गुलशन की सोशल मीडिया की हकीकत संदेहास्पद है। लड़के के हाथ में पिस्टल है और कैमरा लिए पत्रकार उसके पीछे भागते हुए उससे पूछते हैं “नाम क्या है तुम्हारा?”
लड़का फायर कर के जवाब देता है- “रामभक्त गुलशन”
तुरंत एक गोली जाकर ‘शादाब’ को लगती है।

पूरा प्रकरण शांत होते ही एक बार सोचने पर मजबूर होता है कि इससे ज्यादा स्क्रिप्ट तो सलमान खान की फिल्मों में हुआ करती है। अभी इस पूरे घटनाक्रम की पोल खुल जाने तक हम और आप बैठकर लिबरल गिरोह को स्खलित होते देख सकते हैं। हम सभी जानते हैं कि इस गिरोह और मीडिया के लिए गुरमेहर कौर और ताजातरीन इस्लामिक जिहादन लदिदा फरजाना जैसों को रातों रात अपना नायक बना देना कितना आसान है। इसी तरह अभी सिर्फ क्रोनोलॉजी समझने का इन्तजार किया जाना चाहिए।

लेफ्ट लिबरल गिरोह की सबसे अच्छी बात यह है कि इनके को एक्सपोज करते आए हैं और वो अपने बनाने वालों को इतना भी मौका नहीं देते कि वो इस पर दो मिनट आराम से जश्न मना सकें। अनुराग कश्यप, स्वरा भास्कर और शेहला रशीद जैसे हिन्दू आतंकवाद शब्द को स्थापित करने के लिए छटपटाने वाले लोग बिलों से बाहर निकलकर कथित रामभक्त गुलशन पर अपनी कैलोरी खर्च कर रहे हैं। शाहीन बाग़ के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है, पहले यह काम शरजील इमाम ने किया और अब यह बंदूकधारी कर चुका है।

अपडेट: नई सूचनाओं के आने से हमें पता चला है कि जामिया में गोली चलाने का आरोपित नाबालिग है, अतः सम्बद्ध कानूनों के अनुसार उसका नाम बदल दिया गया है।

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आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

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