शाबाश जैश-ए-पत्रकारिता, ‘दी लल्लनटॉप’

यह पहली बार नहीं है कि भारतीय मीडिया गिरोह का कोई सदस्य इस तरह की सम्वेदनशील जानकारियाँ अपने पेज पर ट्रैफिक के लिए या टीवी के TRP के लिए बाहर कर रहा हो, और दुश्मन उसका फायदा लेने की फ़िराक़ में हों।

“तुम कौन सा जहाज उड़ा रहे थे?”
पायलट- “यह मैं आपको नहीं बता सकता।”
“तुम किस मिशन पर थे?”
पायलट- “यह मैं आपको नहीं बता सकता।”

ये स्टेटमेंट हैं पाकिस्तानी सेना से घिरे हुए उस पायलट के, जिसके भारतीय होने का दावा कल से पाकिस्तान की सेना कर रही है और साथ ही कह रही है कि पाकिस्तानी सेना उसकी अच्छे से देखभाल कर रही है। (ताज़ा खबरों के अनुसार उन्हें भारत को कल सौंपा जाएगा।)

यह तो है पाकिस्तान की सूचनाओं का हिस्सा। लेकिन अब देखते हैं भारत के ऐसे मीडिया गिरोह की हेडलाइन, जो केजरीवाल की तरह ‘मम्मी कसम’ खाकर ‘एकदम मारक मजा’ देने का वायदा करते हैं-

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लल्लनटॉप हेडलाइन 1 – “पायलट अभिनन्दन की पत्नी तन्वी …”
लल्लनटॉप हेडलाइन 2 – “विंग कमाण्डर अभिनन्दन के पिता और पत्नी भी एयरफोर्स में रह चुके हैं”
इस से भी ज्यादा ‘मारक मजा’ है, तीसरी हेडलाइन में-
लल्लनटॉप हेडलाइन 3 –
“क्षमा करें, पृष्ठ उपलब्ध नहीं है” (जो कि शायद इसलिए डिलीट कर दी गई होगी क्योंकि उसमें मारक मजा कम रहा होगा)

पाकिस्तान द्वारा पकड़े गए पायलट पर डीप रिसर्च करते हुए दी लल्लनटॉप यूट्यूब का भी सहारा ले रहा था

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान द्वारा कल जारी किए गए इस वीडियो की ‘पॉपुलेरिटी’ और ‘रीच क्षमता’ भाँपकर ही शायद ‘दी लल्लनटॉप’ ने अपने पाठकों को ‘मारक मजा’ देने के लिए विदेश मंत्रालय और अन्य आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार ना करते हुए एक कदम जाकर अपनी ‘संवेदनशीलता’ का परिचय दिया और ‘स्वयं सरकार’ बनकर पाकिस्तान द्वारा पकड़े गए पायलट से सम्बंधित सारी जानकारियाँ अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक कर डालीं।

दी लल्लनटॉप’ पायलट से सम्बंधित सभी जानकारियाँ सार्वजानिक कर चुका था
‘मारक मजा ‘देने की अपनी कसम निभाती ‘दी लल्लनटॉप’ की खबर

सूचना के इस समय में, सतर्कता और संवेदनशीलता ही हमारा सबसे बड़ा रक्षाकवच हो सकते हैं। उस पर हमारी जिम्मेदारी तब और ज्यादा बढ़ जाती है, जब हम समाज में अफवाह-साथ भ्रामक और संवेदनशील जानकारी भेजने का माध्यम आसानी से बन सकते हैं। भारत के गृह मंत्रालय ने भी पुलवामा हमले के बाद तमाम मीडिया चैनलों और संस्थानों को संवेदनशील खबर फ़ैलाने से रोकने के दिशा निर्देश दिए थे।

सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों का मानना है कि वर्तमान में ‘दी लल्लनटॉप’ खबरों को ‘जरा हट कर’ पेश करने के कारण बहुत लोकप्रिय है। जिसमें हिटलर के जननाँग की जानकारी से लेकर आसमान से गिरने वाली लैट्रिन के भविष्य से सम्बंधित सभी जानकारियाँ आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। 

देश में लगातार घटने वाली आतंकवादी घटनाओं के कारण देश आज एक प्रकार के अघोषित युद्ध से गुजर रहा है। ऐसे में इस मीडिया पोर्टल का इस प्रकार से, बिना किसी पुख्ता सबूत के ही सेना और किसी भी सैनिक से जुड़ी गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करना यह बताता है कि ये पत्रकारिता के गिद्ध हैं, जिनकी जिम्मेदारी बस अपनी दुकान चलाने और सरकार के खिलाफ गाली-गलौज करने तक ही सीमित है।  

हालाँकि, लोगों के आक्रोश और विरोध के कारण शायद पायलट के परिवार और पिछली जानकारियों से सम्बंधित खबर को वेबसाइट से हटा लिया गया था। लेकिन तब तक यह खबर जरूरत से ज्यादा नुकसान कर चुकी थी। मानवीय स्वभाव के कारण लोगों ने जिज्ञासावश इस खबर को डिलीट किए जाने से पहले ही व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी से लेकर फेसबुक पेजों पर वायरल कर के खूब प्रचारित कर दिया था। यूट्यूब पर डाली गई इस सूचना के वीडियो को करीब 4 लाख से ज्यादा लोग देख चुके थे।

पाठकों के विरोध के बाद आज सुबह इस खबर को डिलीट कर दिया गया, URL में आप देख सकते हैं

कल ही मीडिया में एक रिपोर्ट में बताया गया था कि पाकिस्तान भारतीय सेना से सम्बंधित सूचनाएँ जुटाने के लिए इंटरनेट से लेकर मोबाइल तक पर जानकारी तलाश रही है। जिस पर ग्राम वासियों ने बताया कि वो देश के नागरिक होने के नाते अपनी जिम्मेदारी बखूबी जानते हैं और उन्होंने मोबाइल पर आने वाली कॉल्स को कोई भी जानकारी नहीं बताई।

अब सवाल ये है कि क्या देश का नागरिक होने के नाते एक गाँव में रहने वाले व्यक्ति की संवेदनशीलता और जागरूकता की तुलना शहर में बैठे इन पढ़े-लिखे लोगों से की जा सकती है?

AC कमरों में बैठकर नेताओं के बयानों को तोड़ना-मरोड़ना, अपने ‘प्रेरणास्रोतों’ के कदमों पर चलते हुए भ्रामक जानकारियाँ लिख कर उनके प्रॉपेगैंडा को दिशा देना और MEME बनाने वाले पेजों पर निबंध लिखना ही अगर ‘दी लल्लनटॉप’ गिरोह की पत्रकारिता है, तो वाकई में ये ‘अँधेरे को चीरती हुई सनसनी’ बनकर मारक मजा देने की अपनी कसम पर खरा उतर रहा है। शाबाश जैश-ए-लल्लनटॉप!

पाकिस्तान द्वारा जारी किए गए वीडियो से बढ़ रहे आक्रोश को देखते हुए OpIndia.com संपादक नूपुर शर्मा ने जिम्मेदारी लेते हुए ट्विटर पर घोषणा की थी कि वह पाकिस्तान द्वारा भड़काने और उकसाने के उद्देश्य से जारी की जाने वाली इस प्रकार की किसी भी अफवाह, सूचना और वीडियो को शेयर नहीं करेंगे।

सीमा के उस पार की चुनौतियों को हम सब जानते हैं लेकिन सीमा के भीतर के आतंकवाद के इस स्वरुप से लड़ना हमारी मुख्य चुनौती है। यदि पत्रकारिता से जुड़े हुए सभी लोग समाज के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारियों को वास्तव में समझें और निभाएँ, तो शायद देश की सेवा में इतना योगदान भी हिमालयी योगदान माना जा सकता है।

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