समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार (12 मार्च 2026) को लखनऊ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। करीब एक घंटे चली इस मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि शंकराचार्य का आशीर्वाद मिलना उनके लिए सम्मान की बात है।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि देश में नकली संतों का दौर खत्म होने वाला है और असली संत समाज को सही दिशा दिखाते हैं। हालाँकि इसी के साथ समाजवादी पार्टी और यादव परिवार के पुराने फैसलों और बयानों की भी याद ताजा हो गई है। यही समाजवादी पार्टी है जिस पर लंबे समय से हिंदू आस्था, मंदिरों और संतों का अपमान करने के आरोप लगते रहे हैं।
जिनके ध्यान मात्र से मिलता आशीर्वाद है
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) March 12, 2026
उनके साक्षात् दर्शन का मिला सौभाग्य है!
सच्चे संत का सम्मान ही सनातन का सम्मान है। pic.twitter.com/zV3tQrArRX
मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाने का फैसला हो या फिर अखिलेश यादव के मंदिरों, संतों और हिंदू परंपराओं को लेकर दिए गए विवादित बयान, ये घटनाएँ आज भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनती रहती हैं।
दीपोत्सव, मंदिर और हिंदू परंपराओं पर विवादित टिप्पणियाँ
अखिलेश यादव पहले भी कई बार अपने बयानों को लेकर विवादों में घिर चुके हैं। अयोध्या में दीपोत्सव के दौरान दीपक और मोमबत्ती जलाने पर होने वाले खर्च को लेकर उन्होंने सवाल उठाया था।
उन्होंने कहा था कि दुनिया भर में क्रिसमस के दौरान शहर महीनों तक रोशनी से जगमगाते हैं और हमें उनसे सीखना चाहिए कि दीयों और मोमबत्तियों पर इतना पैसा क्यों खर्च किया जाए।
इसी दौरान उन्होंने हिंदू धर्म को लेकर एक टिप्पणी करते हुए कहा था कि हिंदू धर्म में कहीं भी पत्थर रखकर, लाल झंडा लगा देने से मंदिर बन जाता है। उनके इस बयान को लेकर भाजपा और कई हिंदू संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे हिंदू आस्था का अपमान बताया। इसके अलावा उन्होंने अयोध्या में राम जन्मभूमि से जुड़े विवाद पर यह भी कहा था कि एक समय रात के अंधेरे में मूर्तियाँ रखी गई थीं।
भगवा और संतों पर उठाते रहे हैं सवाल
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए एक बार कहा था कि सिर्फ भगवा कपड़े पहन लेने से कोई बाबा नहीं बन जाता। उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा था कि रावण भी साधु का वेश बनाकर माता सीता के पास पहुँचा था। इस बयान को लेकर भी कई संगठनों ने कहा कि इस तरह की तुलना साधु-संत परंपरा का अपमान है।
इन्हीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सिर से बही थी खून की धारा
साल 2015 में वाराणसी में गणेश प्रतिमा विसर्जन को लेकर संतों के विरोध के दौरान उनकी सरकार में पुलिस ने लाठीचार्ज किया था, जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद समेत कई संत घायल हुए थे। जिसके बाद हरिद्वार में संतों से मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने उस घटना को अपनी सरकार की गलती बताते हुए माफी माँगी।
समाजवादी पार्टी के शासनकाल में कई संतों और धार्मिक नेताओं के साथ टकराव की घटनाएँ भी सामने आई थीं। कई मामलों में प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए और यह आरोप लगाया गया कि संतों को सम्मान देने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश की गई।
कारसेवकों का खून बहाने का रहा है पिता मुलायम का इतिहास
समाजवादी पार्टी के इतिहास में सबसे बड़ा विवाद 1990 की उस घटना से जुड़ा माना जाता है जब अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया था। उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे।
30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को अयोध्या में बड़ी संख्या में कारसेवक राम मंदिर आंदोलन के समर्थन में पहुँचे थे। उस दौरान पुलिस और कारसेवकों के बीच टकराव हुआ और पुलिस ने गोलीबारी की। आधिकारिक आंकड़ों में 17 लोगों की मौत बताई गई थी, जबकि आंदोलन से जुड़े संगठनों ने इससे ज्यादा संख्या होने का दावा किया था।
इस घटना के बाद राजनीतिक विरोधियों ने मुलायम सिंह यादव पर रामभक्तों के खिलाफ कार्रवाई का आरोप लगाया। यही वजह रही कि लंबे समय तक उन्हें ‘मुल्ला मुलायम’ कहाँ जाता था।
मुलायम सिंह यादव अपने विवादित बयानों को लेकर भी आलोचना का सामना कर चुके हैं। एक भाषण में उन्होंने कहा था कि “लड़कों से गलती हो जाती है” और बलात्कार के मामलों में मौत की सजा नहीं होनी चाहिए। एक अन्य बयान में उन्होंने कहा था कि चार लोग किसी महिला के साथ रेप कर दें, यह प्रैक्टिकल नहीं लगता।


