Homeराजनीतिजहाँ हुए बलिदान मुखर्जी, वहीं अमित शाह ने रखी 'बलिदान स्तंभ' की नींव: वीरगति...

जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी, वहीं अमित शाह ने रखी ‘बलिदान स्तंभ’ की नींव: वीरगति प्राप्त करने वाले जवानों के परिजनों को सौंपा नौकरी का लेटर

गृहमंत्री अमित शाह ने श्रीनगर में बलिदानियों के परिवारों से मुलाकात की और बलिदानियों के सबसे करीबी परिजनों को जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से सरकारी नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र दिया।

जम्मू-कश्मीर यात्रा के श्रीनगर में आज (24 जून) केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने श्रीनगर के प्रताप पार्क में ‘बलिदान स्तंभ’ का शिलान्यास किया। यह प्रताप पार्क लाल चौक के पास स्थित है। इसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी की याद में देश के बलिदानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए बनवाया गया है। इस स्मारक का निर्माण श्रीनगर स्मार्ट सिटी के तहत किया जा रहा है।

गृहमंत्री ने श्रीनगर में बलिदानियों के परिवारों से मुलाकात की और बलिदानियों के सबसे करीबी परिजनों को जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से नियुक्ति पत्र दिया।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, आतंकवादियों से लड़ते हुए और निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले जम्मू कश्मीर के कई जवानों की शहादत इस बात का प्रमाण है कि कश्मीर और उसके लोग किसके लिए खड़े हैं।

अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में अपने 2 दिवसीय दौरे के दौरान जम्मू में रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा ये डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान दिवस है। उनके कारण ही आज बंगाल भारत का हिस्सा है। उन्होंने आर्टिकल 370 का विरोध किया था। उन्हीं के शब्द थे कि एक देश में 2 विधान, 2 प्रधान, 2 निशान नहीं चलेंगे।

शाह ने कहा कि जब अनुच्छेद 370 के खिलाफ श्यामा प्रसाद मुखर्जी 1953 में जम्मू-कश्मीर आए तो उन्हें धोखे से गिरफ्तार किया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। आज जब आर्टिकल 370 खत्म हो गया है तो उनकी आत्मा को शांति मिली होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नया कश्मीर बन रहा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -