Saturday, November 28, 2020
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ओबामा के खिलाफ हो FIR वरना सड़कों पर फैलेगी अराजकता: राहुल और मनमोहन सिंह पर टिप्पणी से आहत हुए कॉन्ग्रेसी

शिकायतकर्ता का कहना है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह के ख़िलाफ़ अवांछित बयान देकर भारतीय निर्वाचन प्रणाली की अवहेलना की है और साथ ही निर्वाचन आयोग जैसे नियामक संस्थान के साथ संविधान की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक वकील ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के ख़िलाफ़ लालगंज दीवानी कोर्ट में शिकायत दर्ज करवाई है। वकील का नाम ज्ञान प्रकाश शुक्ल है जो ऑल इंडिया रूरल बार असोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। 

ज्ञान प्रकाश की नाराजगी ओबामा की किताब ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड (A promised Land)’ में राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह पर की गई टिप्पणियों से संबंधित है। इस शिकायत में माँग की गई है कि भारतीय नेताओं के अपमान और उनके समर्थकों की भावना को आहत करने के लिए ओबामा के ख़िलाफ़ एफआईआर होनी चाहिए। अब इस शिकायत पर 1 दिसंबर में सुनवाई होगी ।

शिकायतकर्ता का कहना है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह के ख़िलाफ़ अवांछित बयान देकर भारतीय निर्वाचन प्रणाली की अवहेलना की है और साथ ही निर्वाचन आयोग जैसे नियामक संस्थान के साथ संविधान की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है।

वकील का दावा है कि जिन नेताओं के लिए ओबामा ने अपनी किताब में टिप्पणी की है उनके करोड़ों समर्थक हैं और वह ऐसी टिप्पणी से आहत हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि आहत हुए समर्थक किताब के ख़िलाफ़ सड़कों पर आ गए तो अराजकता फैल सकती है इसलिए ओबामा के ख़िलाफ एफआईआर हो। उनका यह भी कहना है कि अगर यह एफआईआर नहीं हुई तो वह अमेरिकी दूतावास के बाहर उपवास पर चले जाएँगे।

‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ में राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह पर टिप्पणी

17 नवंबर को बाजार में आई ओबामा की ‘ए प्रॉमिस लैंड’ नामक किताब में उन्होंने अपनी भारतीय यात्रा का जिक्र करते हुए यूपीए कार्यकाल पर चर्चा की है। उन्होंने इस किताब में राहुल गाँधी को एक अनगढ़ छात्र लिखा है।

उन्होंने कहा है, “उनमें (राहुल गाँधी) एक ऐसे ‘घबराए हुए और अनगढ़ (Unformed- जो तराशा न गया हो)’ छात्र के गुण हैं, जिसने अपना पूरा पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है और वह अपने शिक्षक को प्रभावित करने की चाहत रखता है, लेकिन उसमें ‘विषय में महारत हासिल’ करने की योग्यता या फिर जूनून की कमी है।”

ऐसे ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई मुलाकात को याद करते हुए उन्होंने लिखा कि मनमोहन सिंह ने 26/11 के बाद पाकिस्तान पर हमला करने की माँग का विरोध किया था, लेकिन उनका यह निर्णय उन्हें राजनीतिक तौर पर महँगा पड़ गया।  उन्होंने मनमोहन सिंह के लिए लिखा, “उन्हें (मनमोहन सिंह) डर था कि मुस्लिमों के ख़िलाफ बन रही भावना ने भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के प्रभाव को मजबूती दी है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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