HomeराजनीतिEVM को फुटबॉल बना कर रख दिया है: मुख्य चुनाव आयुक्त

EVM को फुटबॉल बना कर रख दिया है: मुख्य चुनाव आयुक्त

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि EVM वोटिंग नहीं करता, बल्कि मतदाता करते हैं। इसलिए EVM की विश्वसनीयता पर संदेह करने का कोई कारण ही नहीं है। जब भी चुनाव आते हैं तो EVM को लेकर राजनीतिक दल सवाल उठाने लगते हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) सुनील अरोड़ा ने चुनाव नतीजों के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को जिम्मेदार बताए जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। मंगलवार (मार्च 05, 2019) को चुनाव आयोग की टीम के साथ जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर गए सुनील अरोड़ा ने कहा कि राजनीतिक दलों ने EVM मशीन को फुटबॉल बना कर रख दिया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “अभी कुछ महीने पहले कर्नाटक के अलावा 5 अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। जहाँ हर जगह अलग-अलग नतीजे देखने को मिले। मैं यह कहने के लिए क्षमा माँगता हूँ कि EVM को राजनीतिक दलों नें फुटबॉल बना कर रख दिया है। अगर रिजल्ट X आता है तो EVM अच्छा है और अगर Y आता है तो बुरा बता दिया जाता है।”

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि EVM वोटिंग नहीं करता, बल्कि मतदाता करते हैं। इसलिए EVM की विश्वसनीयता पर संदेह करने का कोई कारण ही नहीं है। जब भी चुनाव आते हैं तो EVM को लेकर राजनीतिक दल सवाल उठाने लगते हैं।

कॉन्ग्रेस समेत अनेक विपक्ष दल EVM द्वारा चुनाव कराए जाने पर अपना विरोध जाहिर कर चुके हैं। ये दल अक्सर आरोप लगाते हुए पाए जाते हैं कि EVM के साथ छेड़छाड़ की जाती है, जिससे केंद्र में सत्‍तारूढ़ BJP सरकार को फायदा मिलता है। चुनाव आयोग कई मौकों पर EVM को लेकर अपनी राय जाहिर कर चुका है कि इससे छेड़छाड़ संभव नहीं है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

मुफ्त इलाज का ढकोसला और महँगे मेडिकल बिल: कहाँ खर्च हो रहा है आम आदमी का पैसा?

सरकार ने उन दवाओं को इस प्राइस कंट्रोल से बाहर रखा है जिन्हें कंपनियाँ 'पेशेंट असिस्टेंस प्रोग्राम' (PAPs) के तहत भारी छूट पर देती हैं।

आर्कबिशप पीटर मचाडो कौन हैं, जो चाहता है धर्मांतरण विरोधी कानून और गोहत्या कानून में बदलाव: कर्नाटक में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे से क्या...

आर्कबिशप की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खड़गे से मुलाकात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। बैंगलुरु में हुई इस मुलाकात के बाद आर्कबिशप ने खुद अपनी माँगों को सार्वजनिक किया।
- विज्ञापन -