Wednesday, September 22, 2021
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दामाद के परिवार का दिवालिया कॉलेज खरीदेगी भूपेश बघेल सरकार: ₹125 करोड़ का कर्ज, मान्यता भी नहीं

MCI ने इस कॉलेज को धोखाधड़ी में लिप्त पाया था। 2017 के बाद से इस कॉलेज के पास कोई मान्यता ही नहीं है। CCMH पर फ़िलहाल 125 करोड़ रुपए का कर्ज है।

छत्तीसगढ़ में एक मेडिकल कॉलेज को राज्य सरकार द्वारा खरीदने के फैसले को लेकर बवाल मचा हुआ है। कॉन्ग्रेस सरकार ने एक असामान्य फैसला लेते हुए कानून बना कर एक ऐसे मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण की तैयारी शुरू कर दी है, जो वित्तीय रूप से लगभग दिवालिया हो चुका है। सबसे बड़ी बात तो ये कि ये मेडिकल कॉलेज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दामाद के परिवार से जुड़ा हुआ है।

इस कॉलेज के मालिकाना हक़ उस परिवार के पास हैं, जिसमें भूपेश बघेल की बेटी की शादी हुई है। ये मामला दुर्ग में स्थित चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है। इस कॉलेज का स्वामित्व चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल हॉस्पिटल (CCMH) के पास है, जो एक ग़ैर-सूचीबद्ध कंपनी है। इस कंपनी का रजिस्ट्रेशन मार्च 1997 में हुआ था। दुर्ग से 5 बार सांसद रहे कॉन्ग्रेस नेता चंदूलाल चंद्राकर का निधन 1995 में 74 वर्ष की अवस्था में हुआ था।

वो एक बड़े पत्रकार भी रहे थे। साथ ही वो केंद्रीय मंत्री भी रहे थे। छत्तीसगढ़ राज्य के गठन हेतु आंदोलन चलाने के लिए भी उन्हें जाना जाता है। CCMH के निदेशक मंगल प्रसाद चंद्राकर और चंद्राकर समुदाय की माँग के बाद इस अस्पताल को विकसित किया गया था। मंगल प्रसाद चंद्राकर इस अस्पताल के 5% शेयर्स के मालिक हैं। इसके कुल 59 शेयरधारक हैं। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ड्राफ्ट किए गए बिल में इस अस्पातल के अधिग्रहण की योजना है, क्योंकि ये वित्तीय रूप से कमजोर हो चुका है।

बिल में बताया गया है कि जनहित में इस मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण आवश्यक है। छत्तीसगढ़ सरकार कॉलेज की चल-अचल संपत्तियों का अधिग्रहण करेगी और बदले में रुपए CCMH को देगी। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के अनुसार, इस ड्राफ्ट को तैयार कर रहे अधिकारी भी असहज हैं, क्योंकि सीएम भूपेश बघेल की बेटी दिव्या की शादी मंगल प्रसाद चंद्राकर के भतीजे से हुई है। क्षितिज के पिता विजय, मंगल प्रसाद के छोटे भाई हैं।

भूपेश बघेल ने इस मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण करने की घोषणा फरवरी में ही सोशल मीडिया पर कर दी थी। CCMH पर फ़िलहाल 125 करोड़ रुपए का कर्ज है, जिसमें एक बड़ा हिस्सा अनसिक्योर्ड है। अप्रैल 2018 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने इस कॉलेज को धोखाधड़ी में लिप्त पाया था। 2017 के बाद से इस कॉलेज के पास कोई मान्यता ही नहीं है। अधिकारीगण कह रहे हैं कि बिल के विधानसभा में आने से पहले वो कुछ नहीं कह सकते।

भूपेश बघेल के दामाद क्षितिज चंद्राकर ‘ऑल इंडिया प्रोफेसनल कॉन्ग्रेस’ की छत्तीसगढ़ यूनिट के अध्यक्ष भी हैं। वो कहते हैं कि उनके पिता और चाचा 6-7 वर्ष पहले ही सौहार्दपूर्ण तरीके से अलग हो गए हैं। लेकिन, फिर वो भी कॉलेज के अभिग्रहण का समर्थन करते हैं। उनका कहना है कि इससे 300 छात्रों का भला होगा। साथ ही ये भी मानना है कि सरकार को नए कॉलेज बनाने में जितने रुपए लगेंगे, उससे काफी कम में एक बना-बनाया कॉलेज मिलना अच्छी बात है।

CCMH के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर लक्ष्मण चंद्राकर के पास इस मेडिकल कॉलेज के 3.75% शेयर्स हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय समास्याओं के बाद बोर्ड ने सरकार से हस्तक्षेप की माँग की थी। उन्होंने कहा कि ये किसी से छिपा नहीं है कि कॉलेज कर्ज में डूबा है, इसीलिए हमने सरकार से इसे बचाने का निवेदन किया। बिल की मानें तो एक विशेष अधिकारी को कॉलेज की संपत्ति का अनुमान लगाने के लिए नियुक्त किया जाएगा।

कॉन्ग्रेस में भी इसे लेकर विरोध के स्वर उठ रहे हैं। चंदूलाल चंद्राकर के बड़े भाई चुन्नीलाल चंद्राकर के पोते और छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस के जॉइंट सेक्रेटरी अमित ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने दामाद को इस बिल के जरिए फायदा पहुँचाना चाहते हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इसे लेकर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भूपेश बघेल अपने दामाद का निजी महाविद्यालय बचाने के लिए उसे सरकारी कोष से खरीदने की कोशिश में हैं।

सिंधिया ने आरोप लगाया कि प्रदेश की राशि का उपयोग अपने दामाद के लिए किया जा रहा है, वो भी एक ऐसा मेडिकल कॉलेज जिस पर धोखाधड़ी के आरोप MCI द्वारा लगाए गए थे। साथ ही उन्होंने कहा कि कौन बिकाऊ है और कौन टिकाऊ, इसकी परिभाषा अब साफ है! मुख्यमंत्री बघेल ने इसे छात्रों का भविष्य बचाने वाला फैसला करार देते हुए आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने दावा किया कि इससे प्रदेश में नया मेडिकल कॉलेज बनाने का खर्च बचेगा और हर साल 150 नए डॉक्टर मिलेंगे।

उन्होंने कहा, “जहाँ तक रिश्तेदारी और निहित स्वार्थ का सवाल है तो मैं अपने प्रदेश की जनता को यह बताना चाहता हूँ कि भूपेश बघेल उसके प्रति उत्तरदायी है और उसने हमेशा पारदर्शिता के साथ राजनीति की है, सरकार में भी हमेशा पारदर्शिता ही होगी। सौदा होगा तो सब कुछ साफ हो जाएगा। यह खबर कल्पनाशीलता की पराकाष्ठा से उपजा विवाद है, जिसे मैं चुनौती देता हूँ। जनहित का सवाल होगा तो सरकार निजी मेडिकल कॉलेज भी ख़रीदेगी और नगरनार का संयंत्र भी।”

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हम सार्वजनिक क्षेत्र के पक्षधर लोग हैं और रहेंगे, साथ ही ये भी दावा किया कि हम ‘उनकी’ तरह जनता की संपत्ति बेच नहीं रहे हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज इसे लेकर हंगामा भी होने की उम्मीद है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव अपनी ही सरकार से नाराज़ होकर एक दिन पहले सदन से वॉकआउट कर गए थे। उन पर एक अन्य विधायक ने जान से मारने की कोशिश का आरोप लगाया है। छत्तीसगढ़ में भी कॉन्ग्रेस कलह से जूझ रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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