Wednesday, June 19, 2024
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क्या ‘शीशमहल’ की फाइलें दिल्ली सचिवालय से हुईं इधर-उधर?: CCTV फुटेज में दिखे 3 लोग, IAS ने AAP मंत्री पर लगाया आरोप

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इस तरह से किसी अधिकारी के दफ्तर में रात को जाना अपराध है। भाजपा प्रवक्ता आशीष सूद ने कहा, "दिल्ली सीएम को अब तक तो इस्तीफा दे देना चाहिए था। वे तो कहते थे कि आरोप लगते ही इस्तीफा होना चाहिए। कट्टर ईमानदार का सच सामने आ गया है।"

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार को लेकर एक और खुलासा हुआ है। कहा जा रहा है कि सतर्कता विभाग के IAS अधिकारी राजशेखर के कक्ष में घुसकर कुछ लोग फाइलों को इधर-उधर करते नजर आए हैं। इसको लेकर दिल्ली सचिवालय का CCTV फुटेज के सामने आने की बात कही जा रही है।

अरविंद केजरीवाल के खिलाफ कई स्टिंग ऑपरेशन कर चुके टाइम्स नाऊ नवभारत ने गुरुवार (25 मई 2023) को ऑपरेशन ‘शीशमहल’ Part-8 में दावा किया कि रात में करीब 2 बजे कुछ लोग IAS अधिकारी राजशेखर के कक्ष में घुसकर फाइलों के बंडल को इधर से उधर करते दिखाई दे रहे हैं।

सामने आए वीडियो में तीन व्यक्ति सतर्कता विभाग के अधिकारी एवं IAS राजशेखर के केबिन (कमरा नंबर 403) से निकलते दिखे। ये लोग रात 2 बजे से लेकर 2:36 बजे के बीच उनके केबिन में घुसकर कुछ फाइलें लेकर निकले। हालाँकि, ऑपरेशन शीशमहल में ये स्पष्ट नहीं किया गया कि ये लोग फाइलें लेकर कहाँ गए?

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इस तरह से किसी अधिकारी के दफ्तर में रात को जाना अपराध है। उधर, भाजपा प्रवक्ता आशीष सूद ने कहा, “दिल्ली सीएम को अब तक तो इस्तीफा दे देना चाहिए था। वे तो कहते थे कि आरोप लगते ही इस्तीफा होना चाहिए। कट्टर ईमानदार का सच सामने आ गया है।” हालाँकि, इस संबंध में अभी तक किसी तरह की FIR दर्ज कराने की बात भी सामने नहीं आई है।

बता दें कि सतर्कता (Vigilance) के विशेष सचिव वाईवीवीजे राजशेखर ने 16 मई 2023 को केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली के भ्रष्टाचार निरोधक शाखा और उपराज्यपाल कार्यालय को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि आम आदमी पार्टी (AAP) के मंत्री सौरभ भारद्वाज के इशारे पर उनके कार्यालय में रात में तोड़फोड़ की गई, आबकारी नीति की जाँच एवं सीएम आवास के नवीनीकरण जैसे संवेदनशील फाइलों की फोटोकॉपी की गई।

दरअसल, अरविंद केजरीवाल के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने पिछले सप्ताह राजशेखर को हटा दिया था। इसके बाद 15-16 मई की रात 3 बजे के करीब दिल्ली सचिवालय में विशेष सचिव (सतर्कता) के कमरा नंबर 403 को तोड़ दिया गया था। पत्र में यह भी आशंका व्यक्त की गई है कि उनके कार्यालय की जासूसी की गई हो सकती है।

अपने पत्र में राजशेखर ने कहा कि दिल्ली सरकार के मंत्री (सतर्कता) सौरभ भारद्वाज ने सहायक निदेशकों को भ्रष्टाचार के मामलों से संबंधित फाइलों को सतर्कता अधिकारी को जमा नहीं करने का निर्देश दिया था। यह पत्र उनके पुरानी रिपोर्ट का अगला हिस्सा है।

पत्र में कहा गया है, “माननीय मंत्री के ये निर्देश जब दिनांक 15.05.2023 को पूर्वाह्न 11.30 बजे प्राप्त हुए, उस समय अधोहस्ताक्षरी के गोपनीय खंड में लगभग 76 फाइलें थीं। इन फाइलों को माननीय मंत्री (सतर्कता) के निर्देशानुसार जाँच किए बिना केवल रिकॉर्ड करने के लिए सचिव (सतर्कता) को भेज दिया गया था। ये ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि माननीय मंत्री ने अधोहस्ताक्षरी को फाइलों की जाँच नहीं करने का निर्देश दिया।”

राजशेखर का कहना है कि ‘principle of arms length’ के तहत किसी भी परिस्थिति में मंत्री को फाइलें स्थानांतरित करने का मानदंड नहीं है। इसका अनिवार्य रूप से मतलब है कि मंत्री को सतर्कता अधिकारी की जाँच से दूरी बनाए रखनी चाहिए, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। हालाँकि, अपने-अपने काम को पूरा करने के सिद्धांत का उल्लंघन किया गया।

राजशेखर को हटाने के बाद दिल्ली सरकार ने कहा था, “राजशेखर के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं कि वह प्रोटेक्शन मनी की माँग करते हैं। आधिकारिक तौर पर 13 मई को उनसे काम छीन लिया गया…। अगर उनसे आधिकारिक तौर पर काम वापस ले लिया गया है तो फिर भी उनके पास सभी फाइलें कैसे हैं? जब उसका काम अन्य अधिकारियों को सौंपा जाता है तो कार्यालय प्रक्रिया की माँग होती है कि उसे आधिकारिक रूप से सभी फाइलों को नए अधिकारियों को सौंप देना चाहिए।”

कहा जाता है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नौकरशाही पर नियंत्रण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा दिल्ली सरकार के पक्ष में फैसला सुनाए जाने के बाद AAP की सरकार नौकरशाहों और DANICS अधिकारियों को परेशान करने लगी थी। इसको लेकर 8 IAS, IPS, IFS और DANICS अधिकारियों ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना से दिल्ली सरकार और उनके मंत्री सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bharadwaj) की शिकायत की थी।

इन अधिकारियों की शिकायतों को देखते हुए और आम आदमी पार्टी के मंत्री सौरभ भारद्वाज की कार्यप्रणाली के देखते हुए केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया। इस अध्यादेश में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग एवं सेवाओं का अधिकार फिर से उपराज्यपाल को दिया गया। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट के पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पुलिस, भूमि और सार्वजनिक व्यवस्था को छोड़कर सेवाओं के प्रशासन में नौकरशाहों पर दिल्ली सरकार का नियंत्रण दे दिया था।

उपराज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों ने 20 मई 2023 को कहा था कि दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (MCD) में तैनात कम-से-कम आठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejariwal) की सरकार पर ‘घोर उत्पीड़न’ का आरोप लगाया था। रिपब्लिक के अनुसार, मुख्य सचिव नरेश कुमार ने अपनी शिकायत में लिखा कि AAP के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने उनसे कहा, “ऐसे कैसे साइन नहीं करेगा… तेरे को करना ही पड़ेगा। इसके बाद तेरा करियर खत्म। तेरी तो जिंदगी बर्बाद करके रखूँगा।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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