Tuesday, April 20, 2021
Home राजनीति दिल्ली में क्यों नहीं खिल पाया कमल, क्या सचमुच विकास ही था मुद्दा?: ऑपइंडिया...

दिल्ली में क्यों नहीं खिल पाया कमल, क्या सचमुच विकास ही था मुद्दा?: ऑपइंडिया का वीडियो विश्लेषण

दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों में ध्रुवीकरण हुआ और मुस्लिम बहुल इलाक़ों में भाजपा के ख़िलाफ़ वोट गए और मुस्लिमों ने AAP पर भरोसा जताया। जहाँ तक कॉन्ग्रेस की बात है, उसने अगर 2015 वाला परफॉरमेंस ही बरक़रार रखा होता तो शायद नतीजे कुछ और होते।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आख़िर कमल क्यों नहीं खिल पाया? 38% से अधिक वोटिंग प्रतिशत रहने के बावजूद भाजपा सत्ता क्यों नहीं ले पाई? इस बारे में ऑपइंडिया के डिप्टी न्यूज़ एडिटर अजीत झा का कहना है कि कुछ महीनों पहले तक चुनाव को एकतरफा माना जा रहा था। उन्होंने बताया कि मनीष सिसोदिया काफ़ी देर तक पीछे चल रहे थे। अगर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया होता तो पटपड़गंज से सिसोदिया और कालकाजी आतिशी मर्लेना को जीतने के लिए इतना संघर्ष न करना होता।

मुफ्त में चीजें देने के बल पर राजनीति हर जगह नहीं चल सकती। ये ट्रेंड दक्षिण भारत से चला लेकिन आज वहीं फेल हो रहा है। ये चुनाव विकास के मुद्दे पर नहीं लड़ा गया, ये स्पष्ट है। फिर मुद्दे क्या थे? चेहरा एक ऐसा ट्रेंड है, जो दिल्ली को प्रभावित करता है। जब चुनाव में कोई बड़ा चेहरा आता है, तो दिल्ली उस पर भरोसा जताती है। शीला दीक्षित और अरविन्द केजरीवाल पर दिल्ली ने लगातार भरोसा जताया। लोकसभा चुनावों में भाजपा के पास मोदी के रूप में बड़ा चेहरा था, तो दिल्ली ने भाजपा को भारी मतों से विजयी बनाया।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्लिमों में ध्रुवीकरण हुआ और मुस्लिम बहुल इलाक़ों में भाजपा के ख़िलाफ़ वोट गए और मुस्लिमों ने AAP पर भरोसा जताया। जहाँ तक कॉन्ग्रेस की बात है, उसने अगर 2015 वाला परफॉरमेंस ही बरक़रार रखा होता तो शायद नतीजे कुछ और होते। कॉन्ग्रेस हर जगह भाजपा को रोकने के लिए कोशिश कर रही है, जिस चक्कर में वो चौथे नंबर की पार्टी बनने या राजद जैसे दलों का पिछलग्गू बनने में नहीं हिंचकती।

दिल्ली में क्यों नहीं खिला कमल: अजीत भारती और अजीत झा की चर्चा

शीला दीक्षित के निधन के बाद कॉन्ग्रेस को घाटा हुआ क्योंकि उनके नेतृत्व में पार्टी के वोटर लौट रहे थे। कॉन्ग्रेस लगभग 10 सीटों पर मजबूती से लड़ रही थी लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने पूरी तरह समर्पण कर दिया। दिल्ली के खेल से कॉन्ग्रेस अब बाहर जा चुकी है। कॉन्ग्रेस ने जो भी राजनीति की, वो सोशल मीडिया पर की। पीसी चाको कॉन्ग्रेस के प्रभारी थे, जिनके शीला दीक्षित से मतभेद रहे हैं। सुभाष चोपड़ा को अध्यक्ष बनाया गया और कीर्ति झा आज़ाद को कैम्पेन कमिटी का अध्यक्ष बना दिया गया। दोनों ही लगभग निष्क्रिय रहे।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

काशी की 400 साल पुरानी परंपरा: बाबा मसाननाथ मंदिर में मोक्ष की आकांक्षा में धधकती चिताओं के बीच नृत्य करती हैं नगरवधुएँ

काशी की महाशिवरात्रि, रंगभरी एकादशी, चिता भस्म की होली के बाद एक और ऐसी प्राचीन परंपरा जो अपने आप में अनूठी है वह है मणिकर्णिका घाट महाश्मशान में बाबा मसाननाथ के दर पर नगरवधुओं का नृत्य।

सुबह का ‘प्रोपेगेंडाबाज’ शाम को ‘पलटी मारे’ तो उसे शेखर गुप्ता कहते हैं: कोरोना वैक्सीन में ‘दाल-भात मूसलचंद’ का क्या काम

स्वदेशी वैक्सीन पर दिन-रात अफवाह फैलाने वाले आज पूछ रहे हैं कि सब को वैक्सीन पहले क्यों नहीं दिया? क्या कोरोना वॉरियर्स और बुजुर्गों को प्राथमिकता देना 'भूल' थी?

बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से होएः दिल्ली में CM केजरीवाल के ‘मैं हूॅं ना’ पर मजदूरों की बेबस भीड़ क्यों भारी

केजरीवाल ने मज़दूरों से अपील करते हुए 'मैं हूॅं ना' के शाहरुख़ खान स्टाइल में कहा: सरकार आपका पूरा ख़याल रखेगी। फिर भी वही भीड़ क्यों?

‘भारत में कोरोना के डबल म्यूटेशन ने दुनिया को चिंता में डाला’: मीडिया द्वारा बनाए जा रहे ‘डर के माहौल’ का FactCheck

'ब्लूमबर्ग' की रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत के इस डबल म्यूटेशन ने दुनिया को चिंता में डाल दिया है। जानिए क्या है इसके पीछे की सच्चाई।

‘सरकार पर विश्वास नहीं’: मजदूरों ने केजरीवाल की नहीं सुनी, 5 लाख ने पकड़ी ट्रेन-बस टर्मिनल पर 50000; दिल्ली से घर लौटने की मारामारी

घर वापसी की यह होड़ केजरीवाल सरकार की साख पर सवाल है। यह बताती है कि दिल्ली के सीएम की बातों पर मजदूरों को भरोसा नहीं है।

कोरोना से लड़ाई में मजबूत कदम बढ़ाती मोदी सरकार: फर्जी प्रश्नों के सहारे फिर बेपटरी करने निकली गिद्धों की पाँत

गिद्धों की पाँत फिर से वैसे ही बैठ गई है। फिर से हेडलाइन के आगे प्रश्नवाचक चिन्ह के सहारे वक्तव्य दिए जा रहे हैं। नेताओं द्वारा फ़र्ज़ी प्रश्न उठाए जा रहे हैं। शायद फिर उसी आकाँक्षा के साथ कि भारत कोरोना के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई हार जाएगा।

प्रचलित ख़बरें

‘वाइन की बोतल, पाजामा और मेरा शौहर सैफ’: करीना कपूर खान ने बताया बिस्तर पर उन्हें क्या-क्या चाहिए

करीना कपूर ने कहा है कि वे जब भी बिस्तर पर जाती हैं तो उन्हें 3 चीजें चाहिए होती हैं- पाजामा, वाइन की एक बोतल और शौहर सैफ अली खान।

‘छोटा सा लॉकडाउन, दिल्ली छोड़कर न जाएँ’: इधर केजरीवाल ने किया 26 अप्रैल तक कर्फ्यू का ऐलान, उधर ठेकों पर लगी कतार

केजरीवाल सरकार ने 26 अप्रैल की सुबह 5 बजे तक तक दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा की है। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त कर लेने का भरोसा दिलाया है।

‘मैं इसे किस करूँगी, हाथ लगा कर दिखा’: मास्क के लिए टोका तो पुलिस पर भड़की महिला, खुद को बताया SI की बेटी-UPSC टॉपर

महिला ने धमकी देते हुए कहा कि उसका बाप पुलिस में SI के पद पर है। साथ ही दिल्ली पुलिस को 'भिखमंगा' कह कर सम्बोधित किया।

नासिर ने बीड़ी सुलगाने के लिए माचिस जलाई, जलती तीली से लाइब्रेरी में आगः 3000 भगवद्गीता समेत 11 हजार पुस्तकें राख

कर्नाटक के मैसूर की एक लाइब्रेरी में आग लगने से 3000 भगवद्गीता समेत 11 हजार पुस्तकें राख हो गई थी। पुलिस ने सैयद नासिर को गिरफ्तार किया है।

पुलिस अधिकारियों को अगवा कर मस्जिद में ले गए, DSP को किया टॉर्चरः सरकार से मोलभाव के बाद पाकिस्तान में छोड़े गए बंधक

पाकिस्तान की पंजाब प्रांत की सरकार के साथ मोलभाव के बाद प्रतिबंधित इस्लामी संगठन TLP ने अगवा किए गए 11 पुलिसकर्मियों को रिहा कर दिया है।

‘F@#k Bhakts!… तुम्हारे पापा और अक्षय कुमार सुंदर सा मंदिर बनवा रहे हैं’: कोरोना पर घृणा की कॉमेडी, जानलेवा दवाई की काटी पर्ची

"Fuck Bhakts! इस परिस्थिति के लिए सीधे वही जिम्मेदार हैं। मैं अब भी देख रहा हूँ कि उनमें से अधिकतर अभी भी उनका (पीएम मोदी) बचाव कर रहे हैं।"
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,232FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe