Homeराजनीतिकारगिल के 8 नेता BJP में शामिल, महबूबा की पार्टी से हैं अधिकतर मुस्लिम...

कारगिल के 8 नेता BJP में शामिल, महबूबा की पार्टी से हैं अधिकतर मुस्लिम चेहरे

"मुस्लिम बहुल जिले कारगिल के लोगों ने भले ही लद्दाख के लिए केंद्र शासित क्षेत्र का दर्जा नहीं माँगा हो, लेकिन घोषणा के बाद वे खुश हैं क्योंकि इससे केंद्र मामलों को सीधे तौर पर देखेगा, जिसमें विकास परियोजनाएँ भी..."

जम्मू-कश्मीर विधान परिषद् के सभापति हाजी अनायत अली सहित कारगिल के कई प्रमुख नेता सोमवार (अगस्त 26, 2019) को भाजपा में शामिल हो गए।

अनायत अली के अलावा, लद्दाख स्वायत्तशासी पर्वतीय विकास परिषद, कारगिल के कार्यकारी पार्षद मोहम्मद अली हसन और 6 अन्य नेताओं ने भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात की और पार्टी में शामिल हो गए। अनायत अली सहित अधिकतर नेता महबूबा मुफ़्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) से हैं।

उनका स्वागत करते हुए लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने कहा कि केंद्र शासित क्षेत्र बनाए जाने के निर्णय से लेह और कारगिल जिलों सहित पूरा क्षेत्र खुश है।

अनायत अली ने संवाददाताओं से कहा कि मुस्लिम बहुल जिले कारगिल के लोगों ने भले ही लद्दाख के लिए केंद्र शासित क्षेत्र का दर्जा नहीं माँगा हो, लेकिन घोषणा के बाद वे खुश हैं क्योंकि इससे केंद्र मामलों को सीधे तौर पर देखेगा, जिसमें विकास परियोजनाएँ भी शामिल हैं।

भाजपा ने बताया कि पार्टी में शामिल अन्य नेताओं में मोहसीन अली, जहीर हुसैन बाबर, काचो गुलजार हुसैन, असदुल्ला मुंशी, मोहम्मद इब्राहिम और ताशी सेरिंग शामिल हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -