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फडणवीस सरकार ने महाराष्ट्र में 5% मुस्लिम आरक्षण किया रद्द, 2014 में कॉन्ग्रेस- NCP सरकार ने अध्यादेश लाकर दिया था कोटा

देवेन्द्र फडणवीस सरकार ने महाराष्ट्र में 5 फीसदी मुस्लिम आरक्षण पर फुल स्टॉप लगा दिया है। अब न प्रवेश मिलेंगे और न ही प्रमाणपत्र जारी होंगे। इसके अलावा अल्पसंख्यक विभाग के उपसचिव मिलिंद शेनॉय का ट्रांसफर कर अल्पसंख्यक संस्थानों को अजित पवार के निधन के तुरंत बाद मिले धड़ाधड़ मान्यता को रद्द कर दी है और जाँच शुरू कर दिया है।

महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से कमजोर माने जाने वाले मुस्लिमों को दिए जा रहे 5 फीसदी आरक्षण को खत्म कर दिया है। 2014 में ये व्यवस्था लागू की गई थी लेकिन देवेन्द्र फडणवीस सरकार ने 17 फरवरी 2026 को इस आदेश को रद्द कर दिया।

सरकारी आदेश के मुताबिक, 2014 में जिन सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिमों को विशेष पिछड़ा वर्ग-ए (SBC-A) के तहत आरक्षण दिया गया था, वह आदेश अब समाप्त कर दिया गया है। इसमें सरकारी और अर्ध सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के दौरान आरक्षण मिलता था। इसपर रोक लग गई है। नए आदेश के बाद मुस्लिमों को जारी किया जाने वाला जाति प्रमाणपत्र और वैधता प्रमाणपत्र पर भी रोक लग गई है। 2014 का यह आदेश अनिश्चित स्थिति में था, जिसे सरकार ने रद्द कर स्थिति साफ कर दी है।

महाराष्ट्र में जुलाई 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की अगुवाई वाली कॉन्ग्रेस-एनसीपी गठबंधन की सरकार ने मुस्लिमों और मराठा आरक्षण को अध्यादेश के जरिए लागू किया था। मराठा समुदाय को 16 फीसदी आरक्षण और मुस्लिम समुदाय को 5 फीसदी आरक्षण दिया गया था। इससे राज्य में आरक्षण कुल 73 फीसदी हो गया था। दोनों आरक्षण का प्रस्ताव तत्कालीन अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री नसीम खान ने कैबिनेट के सामने रखा था, जिसे मंजूरी मिल गई थी। इसके बाद मुस्लिमों में पात्रता प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए।

बॉम्बे हाईकोर्ट में दी गई चुनौती

हालाँकि 2014 में ही इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने 14 नवंबर 2014 को अंतरिम आदेश जारी कर 16 फीसदी मराठा आरक्षण पर रोक लगा दी, क्योंकि इससे 50 फीसदी आरक्षण की सीमा का उल्लंघन हो रहा था, लेकिन मुस्लिम आरक्षण को बरकरार रखा था। 2019 में हाईकोर्ट ने मराठा आरक्षण को वैध ठहराया, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में रद्द कर दिया।

अध्यादेश की अवधि समाप्त हो चुकी है

फडणवीस सरकार का कहना है कि जिस अध्यादेश के जरिेए मुस्लिम आरक्षण लागू किया गया, उसकी अवधि खत्म हो चुकी है। ये कानून में तब्दील नहीं हुआ है इसलिए अवधि समाप्त होते ही अध्यादेश के आदेश भी खत्म हो जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने संबंधित आदेश को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया है।

सरकार के मुताबिक, ये आदेश सरकारी रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के लिए दिया गया है। हालाँकि जानकार बता रहे हैं कि मुस्लिम आरक्षण राज्य का संवेदनशील मुद्दा है इसको लेकर राज्य में प्रतिक्रिया हो सकती है।

उपसचिव का भी तबादला

अल्पसंख्यक विभाग के उप सचिव मिलिंद शेनॉय का ट्रांसफर कर दिया गया है। माना जा रहा है कि ये कार्रवाई 28 जनवरी से 2 फरवरी 2026 के बीच 75 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों को रिकॉर्ड समय में अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने को लेकर हुए विवाद के बाद लिया गया। कई फाइलों पर पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद डिजिटल हस्ताक्षर मिले, इसके बाद कहा गया कि मंत्री के निधन के बाद इतनी जल्दी इतनी फाइल क्लियर कैसे हुई। विवाद के बाद सीएम फडणवीस ने सारी मंजूरियाँ रद्द कर दी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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