Homeराजनीतिशास्त्री भवन में लगी आग, राहुल गाँधी ने कहा: मोदी फाइल जला रहे हैं

शास्त्री भवन में लगी आग, राहुल गाँधी ने कहा: मोदी फाइल जला रहे हैं

राहुल गाँधी को सामने आकर यह साफ़ करना चाहिए कि आखिर कौन से ‘घोटाले’ की फाइलें शास्त्री भवन में रहीं होंगी, जिन्हें मोदी सरकार उनके आरोप के मुताबिक जला रही थी?

दिल्ली के शास्त्री भवन में आज दोपहर यकायक आग भड़क उठी। कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों के दफ्तर वाले इस भवन की आग बुझाने में दमकल विभाग की गाड़ियाँ जुट गईं। पर अभी वह इमारत पूरी तरह से ठंडी भी नहीं हो पाई होगी कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी उस पर रोटियाँ सेंकने में जुट गए। उन्होंने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि मोदी सरकार फाइलें जला रही है।

निराधार आरोप

राहुल गाँधी का यह आरोप कितना निराधार है, इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह साल भर से ज्यादा समय से देश भर में घूम-घूम कर आरोप रक्षा मंत्रालय-प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा राफेल सौदे में घोटाले का लगा रहे हैं, और उन्हें जलती फाइलें कानून, सूचना एवं प्रसारण, कॉर्पोरेट मामले, केमिकल और पेट्रोकेमिकल, व मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय वाले शास्त्री भवन में दिख रहीं हैं। जबकि इनमें से किसी मंत्रालय का मोदी सरकार पर उनके द्वारा लगाए गए इकलौते आरोप राफ़ेल मामले से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।

राहुल गाँधी को सामने आकर यह साफ़ करना चाहिए कि आखिर कौन से ‘घोटाले’ की फाइलें शास्त्री भवन में रहीं होंगी, जिन्हें मोदी सरकार उनके आरोप के मुताबिक जला रही थी?

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -