Thursday, September 24, 2020
Home राजनीति रिजर्व बैंक ने मोदी को क्यों दिया ₹1.76 लाख करोड़? राहुल गाँधी इसे डकैती...

रिजर्व बैंक ने मोदी को क्यों दिया ₹1.76 लाख करोड़? राहुल गाँधी इसे डकैती क्यों कह रहा है?

घोटालों के खानदान में पले-बढ़े लोग अगर घोटाले होने की बातें करने लगते हैं तो आदमी को लगता है कि यार इसके तो बाप, माँ, परनाना तक घोटालेबाज रहे हैं, इसको तो आयडिया होगा ही! नैसर्गिक तौर पर राहुल गाँधी के साथ भी...

कल भारतीय रिजर्व बैंक ने, पूर्व गवर्नर बिमल जालान के नेतृत्व में बनी समिति के सुझावों पर अमल करते हुए, भारत सरकार को ₹1.76 लाख करोड़ दिए। इस पर दो तरह की प्रतिक्रियाएँ आईं। एक तरफ के लोगों ने इसे अच्छा कदम बताते हुए कहा कि सरकार को इसकी आवश्यकता थी और इसे सरकार कहाँ खर्च करती है इससे पता चलेगा कि अर्थव्यवस्था पर इसका कैसा असर पड़ेगा। वहीं दूसरी तरफ वाले लोगों ने कहा है कि ये डकैती है, मोदी रिजर्व बैंक से पैसा चुरा रहा है, लूट हो रही है।

फिर बीबीसी जैसे प्रोपेगेंडा गिरोह ने कनाडा में बैठे अर्थशास्त्रियों के बयान लेते हुए बताना शुरू किया कि यह रिजर्व बैंक की स्वायत्तता पर हमला है, और भारत सरकार ज्यादती कर रही है। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और पैसों के हेर-फेर के मामलों में फँसे राहुल गाँधी ने मोदी पर करारा हमला बोलते हुए बताया कि सरकार ने फंड चुरा लिया और ये गलत है। उन्होंने उदाहरण दिया कि मोदी सरकार बंदूक की गोली का घाव रोकने के लिए दवाखाने से बैंड-एड चुरा कर भागी है। यह बात अलग है कि जिन्हें रिजर्व बैंक के बारे में थोड़ी भी जानकारी है, और मोदी से घृणा न करते हों, वे जानते हैं कि न तो रिजर्व बैंक ने, और न ही सरकार ने कुछ भी गलत किया है।

पहली बात तो यह है कि रिजर्व बैंक है क्या?

सरल शब्दों में, भारतीय रिजर्व बैंक भारत सरकार की संपत्ति है। 1949 से यह बैंक भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व में आया। फिर स्वायत्तता का क्या संदर्भ है? स्वायत्त होने का मतलब यह नहीं होता कि आप सरकार के दायरे से बाहर हो जाते हैं, या एक स्वतंत्र कम्पनी बन जाते हैं। स्वायत्त होने का मतलब है कि पॉलिसी-संबंधित बातों पर बैंक के पास अपने अधिकार हैं कि वो अपने दायरे में संचालित होने वाले बैंकों, वित्तीय नीति आदि पर स्वयं निर्णय ले सके।

रिजर्व बैंक हमेशा सरकार के वित्त मंत्रालय के साथ मिल कर ही काम करता है। दोनों की नीतियाँ अलग हो सकतीं हैं, लेकिन विपरीत नहीं। कहने का अर्थ यह है कि दोनों ही संस्थाओं का लक्ष्य भारतीय अर्थव्यवस्था की बेहतरी है। दोनों के देखने का नजरिया अलग हो सकता है, लेकिन स्वायत्त होने के बावजूद रिजर्व बैंक भारतीय अर्थ-तंत्र का ही हिस्सा है, और वो सरकार के साथ मिल कर ही काम करता है।

रिजर्व बैंक का पैसा कहाँ से आता है, उसके लाभ का क्या होता है?

- विज्ञापन -

रिजर्व बैंक के पास देश का सोना है, भारत के विभिन्न बैंकों को पैसे देता है, सरकारी बॉन्ड में पैसा लगाती है, विदेशी मुद्रा की खरीद-बिक्री करती है। ये उसके आय के स्रोत हैं। जाहिर है कि अगर बैंक व्यवसाय करेगा तो उसे लाभ भी हो सकता है, हानि भी। सोने के दाम में अगर साल के शुरुआत से साल के अंत में अंतर आएगा, तो वो रिजर्व बैंक की आमदनी में जुड़ेगा (या घटेगा)। वैसे ही, अगर रिजर्व बैंक ने सरकारी बॉन्ड को बेचा और उससे पैसे आए तो वे पैसे भी आमदनी का हिस्सा बनेंगे। अगर रिजर्व बैंक ने अपने पास के विदेशी मुद्रा रिजर्व से डॉलर को कम दाम पर खरीदा, और ज्यादा दाम पर बेचा, तो भी उसे आमदनी होगी।

यह आमदनी आम तौर पर एक स्तर तक की होती है, जिससे वित्तीय वर्ष के अंत में रिजर्व बैंक अपने लाभ का एक हिस्सा अपने पास रख कर बाकी पैसे सरकार को दे देता है। जो हिस्सा बैंक अपने पास रखता है, वो पैसे वो अपने बुरे दिनों को लिए रखता है- जैसे कि कभी बैंकिंग सिस्टम में पैसे की कमी हो जाए, अर्थव्यवस्था पर वैश्विक मंदी का असर पड़ने लगे, या ऐसी समस्या आ जाए कि देश की इकॉनमी खतरे में पड़ जाए। ऐसे समय पर, जब सरकार के पास पैसों की कमी हो जाएगी, लोगों के हाथों में पैसा न होने के कारण खरीददारी करने की क्षमता कम होने लगेगी, तब रिजर्व बैंक बाजार और अर्थव्यवस्था की मदद के लिए कई कदम उठाता है।

जब आमदनी अच्छी होती है, लाभ होता है, और लाभ में से खतरे के समय के लिए बैंक के पास एक तय पैसा अलग रख लिया जाता है (contigency fund, कंटिंजेंसी फंड), तब उसके बाद जो पैसा बचता है, उसे सरप्लस कहते हैं। यह हर कम्पनी के साथ होता है, हर व्यक्ति के साथ होता है। आपकी जितनी सैलरी है, उसमें से आप अपने सारे खर्च और निवेश के बाद कुछ पैसा जो बचा पाते हैं, वो सरप्लस होता है। इसका उपयोग आप घर के किसी ऐसे कार्य को करने के लिए करते हैं, जो आपके सामान्य जरूरतों से शायद अलग होता है।

पिछले कुछ सालों में रिजर्व बैंक ने भारत सरकार को अपना सरप्लस लगातार दिया है। कई साल सारा सरप्लस सरकार को दिया है। ये बात और है कि सामान्य तौर पर यह सरप्लस लगभग ₹40-50,000 करोड़ के आस-पास रहा है। इस बार यह सरप्लस असामान्य है क्योंकि इस साल का सरप्लस उस संख्या का लगभग तीन गुना है।

इस साल सरप्लस इतना ज्यादा कैसे हो गया?

रिजर्व बैंक ने पिछले साल अप्रत्याशित कारोबार किया, जिसमें अच्छे फायदे पर डॉलर और सरकारी बॉन्ड को बेचना शामिल है। ऐसा कार्य रिजर्व बैंक ने पिछले कई सालों से नहीं किया था, इसलिए लाभ हमेशा एक नियत संख्या के आस-पास ही दिखता था।

इसी बिक्री के कारण बैंक ने अप्रत्याशित मुनाफा कमाया। इस मुनाफे से बुरे दिनों के लिए बचाए गए फंड का हर समस्या से जूझने की स्थिति का आकलन करने के बाद, बिमल जालान समिति ने सुझाव दिया कि इस लाभ को सरकार को दे देना चाहिए क्योंकि राष्ट्र को अभी इस फंड की आवश्यकता है। आप सब जानते हैं कि बजट में सरकार देश पर हुए खर्च और टैक्स से हुई आमदनी का लेखा-जोखा रखने के बाद, अगले साल में खर्च होने वाले आँकड़े रखती है।

अगर यह आँकड़े आमदनी से कम होते हैं, तो उसे वित्तीय घाटा या फिस्कल डेफिसिट कहा जाता है। यह घाटा अगर बहुत ज्यादा हो जाएगा तो सरकार को कहीं से कर्ज लेना होगा। लेकिन सरकार के पास रिजर्व बैंक है, जिसके पास कुछ पैसा है। वह पैसा, जिसका अगर कहीं पड़े रहने से ज्यादा उपयोग नहीं है, तो वह पैसा सरकार को बैंक दे सकता है। इसलिए दे सकता है क्योंकि अंततः बैंक का स्वामित्व सरकार के पास ही होता है। यही बिमल जालान इंदिरा गाँधी से लेकर मनमोहन के समय तक महान अर्थशास्त्री माने जाते थे, और अब यही जालान “मोदी के गुलाम” हो गए हैं।

जालान समिति ने सुझाव दिया कि रिजर्व बैंक अपने बुरे दिनों के लिए लाभ का एक हिस्सा रखने के बाद पूरा सरप्लस सरकार को दे दे। इस सुझाव तक पहुँचने से पहले समिति ने बैंक के ऊपर आने वाले खतरों, पहले के समय के सबसे बुरे दौर आदि को संदर्भ में रखते हुए निर्णय लिया कि उसके अपने बचाव के लिए कम-से-कम कितने पैसों की ज़रूरत है। उसके बाद जो बचा, वो सरकार को दे देने की सिफारिश समिति ने की।

रिजर्व बैंक के लिए रिस्क क्या है? खतरे वाले दिनों से क्या मतलब है?

रिजर्व बैंक को विदेशी या अप्रत्याशित कारणों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए उसके अपने पास एक प्रक्रिया होनी चाहिए- जैसे कि अगर डॉलर के मुकाबले रुपए का दाम बढ़ने लगे, या अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव गिरने लगे। इससे रिजर्व बैंक की संपत्ति पर सीधा असर पड़ता है। इसका मतलब है कि आमदनी घटेगी। आमदनी अगर घटेगी तो उसका असर सीधा देश के बैंकों और वित्तीय व्यवस्था पर पड़ेगा। लेकिन यह असर वित्तीय तंत्र पर न पड़े, उसके लिए रिजर्व बैंक एक फंड रखता है।

मान लीजिए कि अमेरिका ने अचानक से भारत पर कुछ वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए। या ऐसा हो कि एक ऐसी सरकार आ जाए जिसकी नीतियों के कारण अर्थव्यवस्था हिल जाए। ऐसे समय में भी तंत्र को सुचारू रूप से चलाते रहने के लिए रिजर्व बैंक के पास कुछ अलग फंड होना चाहिए, ताकि इस तरह की स्थिति में वित्तीय तंत्र में अपने पास के पैसे लगा कर उसे गिरने से बचाया जा सके।

जहाँ तक बात स्वायत्तता की आती है तो उसमें रिजर्व बैंक के पास अपने लिए काम करने वाले लोगों और अपने कार्य को सही तरह से चलाने के लिए होने वाले खर्च के मामले में स्वतंत्रता है। लेकिन स्वायत्त होने का मतलब यह बिलकुल नहीं कि भले ही हमारा स्वामित्व भारत सरकार के पास है, लेकिन अर्थव्यवस्था को जब ज़रूरत पड़े तो हम अपनी मर्जी से सरप्लस फंड रोक लेंगे।

कुछ लोग रिजर्व बैंक के संपत्ति के आधार पर रखे जा रहे रिजर्व के प्रतिशत पर आ कर अटक गए हैं। इसे अंग्रेजी में ‘असेट-टू-रिजर्व रेशियो’ कहा जाता है। अगर अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर चलें तो इस रिजर्व का मीडियन प्रतिशत 16 है जबकि भारतीय रिजर्व बैंक उससे बहुत ऊपर 26% का रिजर्व रखता है। ये अनुपात भी अर्थव्यवस्था के हिसाब से रखा जाता है ताकि बुरे-से-बुरे दौर में भी आपके पास इतना पैसा हो कि इकॉनमी पूरी तरह से गिर न जाए।

राहुल गाँधी रो क्यों रहे हैं? कॉन्ग्रेस इसे डकैती क्यों कह रही है?

राहुल गाँधी समेत पूरे कॉन्ग्रेस के पास सिवाय फर्जीवाड़े के कुछ बचा नहीं। इन्होंने राफेल के मुद्दे पर भारतीय आम जनता की अनभिज्ञता का लाभ उठाते हुए हर जिले में प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने से लेकर हर रैली में राफेल-राफेल चिल्लाने की योजना बनाई थी, वह योजना काफी हद तक सफल रही क्योंकि अचानक से जो लोग मोदी को भ्रष्टाचार से बिलकुल अलग मानते थे, उन्हों रवीश वाला रोग लग गया और वो भी रवीश टाइप कहने लगे: जाँच करवाने में क्या जाता है?

हालाँकि रवीश भी जानते थे और राहुल भी कि रक्षा मामलों में उसकी पूरी जानकारी पब्लिक में नहीं दी जा सकती क्योंकि उसमें उस कम्पनी द्वारा विकसित तकनीकों के पब्लिक हो जाने का खतरा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में मोदी सरकार को सही पाया। फिर भी, मीडिया और कॉन्ग्रेस लगातार राफेल-राफेल करते रहे। यह सब सिर्फ इसलिए संभव हो पाया क्योंकि लोगों को इतनी डीटेल्स पता नहीं होतीं कि रक्षा सौदों में क्या शर्तें होती हैं। साथ ही, अगर घोटालों के खानदान में पले-बढ़े लोग अगर घोटाले होने की बातें करने लगते हैं तो आदमी को लगता है कि यार इसके तो बाप, माँ, परनाना तक घोटालेबाज रहे हैं, इसको तो आयडिया होगा ही!

तो रिजर्व बैंक को लेकर भी इन्होंने यही रणनीति अपनाई है। आम आदमी को रिजर्व बैंक या उसी कार्यशैली का कुछ पता नहीं होता। इसलिए, उसे मूर्ख बनाना आसान होता है कि देखो मोदी रिजर्व बैंक को लूट रहा है। जबकि राहुल गाँधी ये नहीं बता पाएँगे कि 2013-14, 14-15, 15-16 और उसके पहले भी रिजर्व बैंक ने सरप्लस भारत सरकार को दिया या नहीं। दिया तो कितने प्रतिशत दिया। वो इसलिए नहीं बता पाएँगे क्योंकि आम आदमी को मूर्ख समझना एक बात है, और रिजर्व बैंक के बारे में पता लगाना बिलकुल अलग। वो राहुल के वश का तो नहीं लगता।

आपकी कम्पनी है। उसने लाभ कमाया है। लाभ का एक हिस्सा अपने पास रखने के बाद, बाकी का पैसा परिवार पर खर्च के लिए घर के मुखिया को दे दिया है। कम्पनी ने अपने बचाव का भी पूरा ध्यान रखा, और परिवार को भी जरूरत के समय में मदद की। इसमें गलत क्या है? वो भी तब, जब कम्पनी का स्वामित्व परिवार के पास ही है।

राहुल गाँधी, अपने दावे के अनुसार, कैम्ब्रिज से पढ़े हैं। उनकी चुनावी टीम में अभिजीत बनर्जी जैसे MIT के अर्थशास्त्री थे। हाल ही में जेल चले जाने से पहले तक चिदंबरम के रूप में एक और अर्थशास्त्री था उनके पास। RBI गवर्नर रहे मनमोहन सिंह (पूर्व प्रधानमंत्री भी रहे हैं) आज भी उनका फ़ोन उठा ही लेंगे, ऐसी उम्मीद की जा सकती है। तो राहुल गाँधी ऐसे हास्यास्पद दावे करने के पहले कम-से-कम इन लोगों से ही पूछ लेते, तो पता चल जाता कितनी मूर्खता भरी बातें वे कर आए हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारतीhttp://www.ajeetbharti.com
सम्पादक (ऑपइंडिया) | लेखक (बकर पुराण, घर वापसी, There Will Be No Love)

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘PM मोदी को हिन्दुओं के अलावा कुछ और दिखता ही नहीं’: भारत के लिए क्यों अच्छा है ‘Time’ का बिलबिलाना

'Time' ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी की शुरुआत में ही लिख दिया है कि लोकतंत्र की चाभी स्वतंत्र चुनावों के पास नहीं होती।

टाइम्स में शामिल ‘दादी’ की सराहना जरूर कीजिए, आखिर उनको क्या पता था शाहीन बाग का अंजाम, वो तो देश बचाने निकली थीं!

आज उन्हें टाइम्स ने साल 2020 की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों की सूची में शामिल कर लिया है। खास बात यह है कि टाइम्स पर बिलकिस को लेकर टिप्पणी करने वाली राणा अय्यूब स्वयं हैं।

मेरी झोरा-बोरा की औकात, मौका मिले तो चुनाव लड़ने का निर्णय लूँगा, लोगों की सेवा के लिए राजनीति में आऊँगा: पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय

मैंने अभी कोई पार्टी ज्वाइन करने का ऐलान तो नहीं किया। मैं चुनाव लड़ूँगा, यह भी कहीं नहीं कहा। इस्तीफा तो दे दिया। चुनाव लड़ना कोई पाप है?

‘बोतल डॉन’ खान मुबारक की 20 दुकान वाले कॉम्प्लेक्स पर चला योगी सरकार का बुलडोजर: करोड़ों की स्कॉर्पियो, जेसीबी, डंपर भी जब्त

माफिया सरगना के नेटवर्क को ध्वस्त करने के क्रम में फरार चल रहे खान मुबारक के करीबी शातिर बदमाश परवेज की मखदूमपुर गाँव स्थित करीब 50 लाख की संपत्ति को अंबेडकर नगर पुलिस द्वारा ध्वस्त कर दिया गया।

विदेशी लेखक वीजा पर यहाँ आता है और भारत के ही खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाता है: वीजा रद्द करने की माँग

मोनिका अरोड़ा ने आरोप लगाया है कि स्कॉटिश लेखक विलयम डेलरिम्पल लगातार जानबूझ कर यहाँ के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं।

‘सुशांत को थी ड्रग्स की लत, अपने करीबी लोगों का फायदा उठाता था’ – बेल के लिए रिया चक्रवर्ती ने कहा

"सुशांत सिंह राजपूत ड्रग्स लेते थे। वह अपने स्टाफ को ड्रग्स खरीद कर लाने के लिए कहते थे। वो जीवित होते, तो उन पर ड्रग्स लेने का आरोप..."

प्रचलित ख़बरें

नेपाल में 2 km भीतर तक घुसा चीन, उखाड़ फेंके पिलर: स्थानीय लोग और जाँच करने गई टीम को भगाया

चीन द्वारा नेपाल की जमीन पर कब्जा करने का ताजा मामला हुमला जिले में स्थित नामखा-6 के लाप्चा गाँव का है। ये कर्णाली प्रान्त का हिस्सा है।

शो नहीं देखना चाहते तो उपन्यास पढ़ें या फिर टीवी कर लें बंद: ‘UPSC जिहाद’ पर सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़

'UPSC जिहाद' पर रोक को लेकर हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि जिनलोगों को परेशानी है, वे टीवी को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं।

‘ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे’: मौत से 5 दिन पहले सुशांत का परिवार को SOS

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मौत से 5 दिन पहले सुशांत ने अपनी बहन को एसओएस भेजकर जान का खतरा बताया था।

आफ़ताब दोस्तों के साथ सोने के लिए बनाता था दबाव, भगवान भी आलमारी में रखने पड़ते थे: प्रताड़ना से तंग आकर हिंदू महिला ने...

“कई बार मेरे पति आफ़ताब के द्वारा मुझपर अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने का दबाव बनाया गया लेकिन मैं अडिग रहीं। हर रोज मेरे साथ मारपीट हुई। मैं अपना नाम तक भूल गई थी। मेरा नाम तो हरामी और कुतिया पड़ गया था।"

‘शिव भी तो लेते हैं ड्रग्स, फिल्मी सितारों ने लिया तो कौन सी बड़ी बात?’ – लेखिका का तंज, संबित पात्रा ने लताड़ा

मेघना का कहना था कि जब हिन्दुओं के भगवान ड्रग्स लेते हैं तो फिर बॉलीवुड सेलेब्स के लेने में कौन सी बड़ी बात हो गई? संबित पात्रा ने इसे घृणित करार दिया।

पूनम पांडे का पति है सैम अहमद, 11 दिन पहले ही दोनों ने की शादी… अब मोलेस्टेशन, मारपीट करने में गिरफ्तार

पूनम पांडे की शिकायत के बाद उनके पति सैम अहमद बॉम्बे को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनका अब मेडिकल टेस्‍ट होना है, जिसके बाद सैम को...

‘PM मोदी को हिन्दुओं के अलावा कुछ और दिखता ही नहीं’: भारत के लिए क्यों अच्छा है ‘Time’ का बिलबिलाना

'Time' ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी की शुरुआत में ही लिख दिया है कि लोकतंत्र की चाभी स्वतंत्र चुनावों के पास नहीं होती।

यूपी में माफियाओं पर ताबड़तोड़ एक्शन जारी: अब मुख्तार अंसारी गिरोह के नजदीकी रजनीश सिंह की 39 लाख की संपत्ति जब्त

योगी सरकार ने मुख्तार अंसारी गिरोह आईएस 191 के नजदीकी व मन्ना सिंह हत्याकांड में नामजद हिस्ट्रीशीटर एवं पूर्व सभासद रजनीश सिंह की 39 लाख रुपए की सम्पत्ति गैंगेस्टर एक्ट के तहत जब्त की है।

जम्मू कश्मीर में नहीं थम रहा बीजेपी नेताओं की हत्या का सिलसिला: अब BDC चेयरमैन की आतंकियों ने की गोली मार कर हत्या

मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में बीजेपी बीडीसी खग के चेयरमैन भूपेंद्र सिंह को कथित तौर पर आतंकियों ने उनके घर पर ही हमला करके जान से मार दिया।

बनारस की शिवांगी बनी राफेल की पहली महिला फाइटर पायलट: अम्बाला में ले रही हैं ट्रेंनिंग, पिता ने जताई ख़ुशी

शिवांगी की सफलता पर न केवल घरवालों, बल्कि पूरे शहर को नाज हो रहा है। काशी में पली-बढ़ीं और BHU से पढ़ीं शिवांगी राफेल की पहली फीमेल फाइटर पायलट बनी हैं।

दिल्ली दंगा केस में राज्य विधानसभा पैनल को झटका: SC ने दिया फेसबुक को राहत, कहा- 15 अक्टूबर तक कोई कार्रवाई नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने फेसबुक के वाइस प्रेसिडेंट अजित मोहन के खिलाफ 15 अक्टूबर तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने का आदेश दिया है।

प्रभावी टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट, सर्विलांस, स्पष्ट मैसेजिंग पर फोकस और बढ़ाना होगा: खास 7 राज्यों के CM के साथ बैठक में PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि देश में 700 से अधिक जिले हैं, लेकिन कोरोना के जो बड़े आँकड़े हैं वो सिर्फ 60 जिलों में हैं, वो भी 7 राज्यों में। मुख्यमंत्रियों को सुझाव है कि एक 7 दिन का कार्यक्रम बनाएँ और प्रतिदिन 1 घंटा दें।

टाइम्स में शामिल ‘दादी’ की सराहना जरूर कीजिए, आखिर उनको क्या पता था शाहीन बाग का अंजाम, वो तो देश बचाने निकली थीं!

आज उन्हें टाइम्स ने साल 2020 की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियतों की सूची में शामिल कर लिया है। खास बात यह है कि टाइम्स पर बिलकिस को लेकर टिप्पणी करने वाली राणा अय्यूब स्वयं हैं।

मेरी झोरा-बोरा की औकात, मौका मिले तो चुनाव लड़ने का निर्णय लूँगा, लोगों की सेवा के लिए राजनीति में आऊँगा: पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय

मैंने अभी कोई पार्टी ज्वाइन करने का ऐलान तो नहीं किया। मैं चुनाव लड़ूँगा, यह भी कहीं नहीं कहा। इस्तीफा तो दे दिया। चुनाव लड़ना कोई पाप है?

दिल्ली बार काउंसिल ने वकील प्रशांत भूषण को भेजा नोटिस: 23 अक्टूबर को पेश होने का निर्देश, हो सकती है बड़ी कार्रवाई

दिल्ली बार काउंसिल (BCD) ने विवादास्पद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के मद्देनजर 23 अक्टूबर को उसके सामने पेश होने का निर्देश दिया है।

NCB ने ड्रग्स मामले में दीपिका, सारा अली खान, श्रद्धा समेत टॉप 4 हीरोइन को भेजा समन, जल्द होगी पूछताछ

रिया चक्रवर्ती से पूछताछ के दौरान दीपिका, दीया, सारा अली खान, रकुलप्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर का नाम सामने आया था। दीया का नाम पूछताछ के दौरान ड्रग तस्कर अनुज केशवानी ने लिया था।

हमसे जुड़ें

264,935FansLike
77,874FollowersFollow
323,000SubscribersSubscribe
Advertisements