Tuesday, May 18, 2021
Home राजनीति जहाँ से मुश्किल मोर्चे ले रहे अमित शाह, वहीं से मुफ्ती मोहम्मद सईद ने...

जहाँ से मुश्किल मोर्चे ले रहे अमित शाह, वहीं से मुफ्ती मोहम्मद सईद ने टेके थे घुटने!

"मुफ्ती ने जस्टिस भट्ट के मार्फत सूचना क्यों लीक की? मुझे नहीं पता कि इसके पीछे उनका क्या मकसद था। लेकिन जब मैं कश्मीर से लौटा तो भट्ट को मुफ्ती के घर पर देखा। मुझे बताया गया कि वे यहॉं 5-6 दिन से हैं। रूबिया के अगवा होने के अगले दिन वे दिल्ली पहुॅंचे थे और अपहरणकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क में थे।"

नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक भारतीय सत्ता के दो सबसे मह​त्वपूर्ण केंद्र हैं। राष्ट्रपति भवन के दोनों ओर स्थित इन इमारतों में बैठे लोगों के पास सत्ता के तमाम सूत्र होते हैं। नॉर्थ ब्लॉक में ही गृह मंत्रालय है, जिसके मुखिया आजकल अमित शाह हैं। इसी साल मई में मंत्री पद की शपथ लेने वाले शाह ने जब से गृह मंत्रालय का कामकाज सॅंभाला है, यह महकमा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

इसकी वजह है, उन मुद्दों पर फैसला लेना जो सालों से लंबित पड़े थे। मसलन, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करना। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक शरणार्थियों को नागरिकता देने का रास्ता प्रशस्त करना। रोहिंग्या या एनआरसी के मुद्दे पर स्टैंड लेना। वगैरह…।

इन फैसलों ने शाह को आजाद भारत का दूसरा सबसे चर्चित गृह मंत्री बना दिया है। रियासतों का विलय कराने के कारण देश के पहले गृह मंत्री सरदार पटेल आज तक याद किए जाते हैं। पटेल से शाह के बीच दो दर्जन से ज्यादा लोग नॉर्थ ब्लॉक के इस दफ्तर में बैठ चुके हैं, पर शायद ही आपको उनका नाम याद हो। मेरी इस मान्यता की एक बड़ी वजह एक हालिया घटना है। हाल ही में जब मनमोहन सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री न​रसिम्हा राव के गृह मंत्री के कार्यकाल का हवाला देकर 1984 में हुए सिखों के नरसंहार का दोष उनके मत्थे मढ़ा तो कई लोग यह जानकर ही भौंचक रह गए थे कि राव कभी देश के गृह मंत्री भी हुआ करते थे। वैसे यह जिम्मेदारी शास्त्री, इंदिरा, चरण सिंह, मोराराजी जैसे कद्दावर नेता भी सॅंभाल चुके हैं।

शिवराज पाटिल जैसे कुछ लोगों के कार्यकाल की चर्चा भी कभी-कभार होती है। लेकिन, उसका कारण मुंबई हमले के वक्त हर घंटे सूट बदलकर नजर आने का पाटिल का कारनामा रहा है। वीपी सिंह की सरकार में यह मकहमा जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे मुफ्ती मोहम्मद सईद के पास था। लेकिन, यह कार्यकाल उनके दामन पर ऐसे दाग लगा गया जो कभी नहीं धुला।

हुआ कुछ यूॅं था कि दो दिसंबर 1989 को प्रधानमंत्री बनते ही वीपी सिंह ने सईद को गृह मंत्रालय की बागडोर सौंपी। इसके 6 दिन बाद (8 दिसंबर 1989) को जेकेएलफ ने सईद की बेटी रूबिया को अगवा कर लिया। 122 घंटे बाद रूबिया रिहा की गईं। बदले में सरकार ने 13 दिसंबर को 5 आतंकियों को आजाद कर दिया। उसी रात विशेष विमान से रूबिया सईद को दिल्ली लाया गया था। इसके बाद सईद ने कहा था- एक पिता के रूप में मै खुश हूॅं, लेकिन एक राजनेता के रूप में मैं समझता हूॅं कि ऐसा नहीं होना चाहिए था।

पर उस वक्त अंदरखाने क्या चल रहा था इसके संकेत सईद के साथ वीपी सिंह की कैबिनेट में रहे आरिफ मोहम्मद खान के एक इंटरव्यू से लगाया जा सकता है। खान फिलहाल केरल के राज्यपाल हैं। उन्होंने इसी साल अगस्त में संडे गार्डियन को एक इंटरव्यू दिया था। इस साक्षात्कार में खान ने सईद की भूमिका पर सवाल उठाए थे।

इससे संकेत मिलते हैं कि सईद ने न केवल अपनी बेटी रूबिया को अगवा करने वाले आतंकियों को बचाया था, बल्कि उनके दबाव में ही सरकार को पॉंच आतंकी छोड़ने पड़े थे। बकौल खान रूबिया को अगवा करने की खबर मिलने के बाद उन्हें और उस सरकार के एक और मंत्री इंद्र कुमार गुजराल (जो बाद में पीएम भी बने) को श्रीनगर भेजा गया। खान ने बताया कि उस समय जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे फारूक अब्दुल्ला आतंकियों को छोड़े जाने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने केंद्र सरकार को आगाह करते हुए कहा था कि यह भारी भूल साबित होगी। खान के अनुसार अपहरणकर्ताओं में से एक के पिता ने अब्दुल्ला को यकीन दिलाया था कि रूबिया को कुछ नहीं होगा। लेकिन, सईद ने जस्टिस एमएल भट्ट के मार्फत अपहरणकर्ताओं तक संदेशा भिजवाया कि केंद्र सरकार उनकी मॉंग मानकर पॉंच आतंकियों को रिहा करने के लिए तैयार है।

खान ने इंटरव्यू में बताया है, “मुफ्ती ने जस्टिस भट्ट के मार्फत सूचना क्यों लीक की? मुझे नहीं पता कि इसके पीछे उनका क्या मकसद था। लेकिन जब मैं कश्मीर से लौटा तो भट्ट को मुफ्ती के घर पर देखा। मुझे बताया गया कि वे यहॉं 5-6 दिन से हैं। रूबिया के अगवा होने के अगले दिन वे दिल्ली पहुॅंचे थे और अपहरणकर्ताओं के साथ लगातार संपर्क में थे।”

साभार: sundayguardianlive.com

खान के अनुसार उन्होंने सईद को इस घटना के बाद इस्तीफा देने की भी सलाह दी थी। साथ ही उन्होंने बताया कि रूबिया के छोड़े जाने से पहले ही पॉंचों आतंकी रिहा कर दिए गए थे। खान के अनुसार कश्मीर में हर किसी का मानना था कि अपहरणकर्ता रूबिया के साथ कुछ गलत नहीं करेंगे। ऐसा करने पर जनभावनाएँ उनके खिलाफ हो सकती थी। ऐसे में यह मानना है मुश्किल है कि सईद जो खुद कश्मीरी थे और युवावस्था से ही वहॉं की राजनीति में सक्रिय थे उन्हें इस बात का अंदाजा न रहा हो।

इन आतंकियों की रिहाई के बाद कश्मीर के आतंकवाद का कैसा दौर देखा, कश्मीर पंडितों को किस तरीके से पलायन करना पड़ा ये सब आप जानते ही हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत झा
देसिल बयना सब जन मिट्ठा

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

₹50 हजार मुआवजा, 2500 पेंशन, बिना राशन कार्ड भी फ्री राशन: कोरोना को लेकर केजरीवाल सरकार की ‘मुफ्त’ योजना

दिल्‍ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने कोरोना महामारी में माता पिता को खोने वाले बच्‍चों को 2500 रुपए प्रति माह और मुफ्त शिक्षा देने का ऐलान किया है।

ख़लीफ़ा मियाँ… किसाण तो वो हैं जिन्हें हमणे ट्रक की बत्ती के पीछे लगाया है

हमने सब ट्राई कर लिया। भाषण दिया, धमकी दी, ज़बरदस्ती कर ली, ट्रैक्टर रैली की, मसाज करवाया... पर ये गोरमिंट तो सुण ई नई रई।

कॉन्ग्रेस के इशारे पर भारत के खिलाफ विदेशी मीडिया की रिपोर्टिंग, ‘दोस्त पत्रकारों’ का मिला साथ: टूलकिट से खुलासा

भारत में विदेशी मीडिया संस्थानों के कॉरेस्पोंडेंट्स के माध्यम से पीएम मोदी को सभी समस्याओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।

‘केरल मॉडल’ वाली शैलजा को जगह नहीं, दामाद मुहम्मद रियास को बनाया मंत्री: विजयन कैबिनेट में CM को छोड़ सभी चेहरे नए

वामपंथी सरकार की कैबिनेट में सीएम विजयन ने अपने दामाद को भी जगह दी है, जो CPI(M) यूथ विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।

सोनू सूद की फाउंडेशन का कमाल: तेजस्वी सूर्या से मदद माँग खुद खा गए क्रेडिट

बेंगलुरु पुलिस, बेंगलुरु फायर डिपार्टमेंट, ड्रग कंट्रोलिंग डिपार्टमेंट और बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या के ऑफिस के प्रयासों से 12 मई को श्रेयस अस्पताल में संभावित ऑक्सीजन संकट टल गया। लेकिन, सोनू सूद का चैरिटी फाउंडेशन इस नेक काम का श्रेय लेने के लिए खबरों में बना रहा।

इजरायल का Iron Dome वाशिंगटन पोस्ट को खटका… तो आतंकियों के हाथों मर ‘शांति’ लाएँ यहूदी?

सोचिए, अगर ये तकनीक नहीं होती तो पिछले दो हफ़्तों से गाज़ा की तरफ से रॉकेट्स की जो बरसात की गई है उससे एक छोटे से देश में कितनी भीषण तबाही मचती!

प्रचलित ख़बरें

जैश की साजिश, टारगेट महंत नरसिंहानंद: भगवा कपड़ा और पूजा सामग्री के साथ जहाँगीर गिरफ्तार, साधु बन मंदिर में घुसता

कश्मीर के रहने वाले जान मोहम्मद डार उर्फ़ जहाँगीर को साधु के वेश में मंदिर में घुस कर महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की हत्या करनी थी।

अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाती भीड़ का हमला: यहूदी खून से लथपथ, बचाव में उतरी लड़की का यौन शोषण

कनाडा में फिलिस्तीन समर्थक भीड़ ने एक व्यक्ति पर हमला कर दिया जो एक अन्य यहूदी व्यक्ति को बचाने की कोशिश कर रहा था। हिंसक भीड़ अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए उसे लाठियों से पीटा।

विनोद दुआ की बेटी ने ‘भक्तों’ के मरने की माँगी थी दुआ, माँ के इलाज में एक ‘भक्त’ MP ने ही की मदद

मोदी समर्थकों को 'भक्त' बताते हुए मल्लिका उनके मरने की दुआ माँग चुकी हैं। लेकिन, जब वे मुश्किल में पड़ी तो एक 'भक्त' ने ही उनकी मदद की।

भारत में दूसरी लहर नहीं आने की भविष्यवाणी करने वाले वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने सरकारी पैनल से दिया इस्तीफा

वरिष्ठ वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने भारत में कोविड-19 के प्रकोप की गंभीरता की भविष्यवाणी करने में विफल रहने के बाद भारतीय SARS-CoV-2 जीनोम सीक्वेंसिंग कंसोर्टिया (INSACOG) के वैज्ञानिक सलाहकार समूह के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया।

मेवात के आसिफ की हत्या में सांप्रदायिक एंगल नहीं, पुरानी राजनीतिक दुश्मनी: हरियाणा पुलिस

आसिफ की मृत्यु की रिपोर्ट आने के तुरंत बाद, कुछ मीडिया हाउसों ने दावा किया कि उसे मारे जाने से पहले 'जय श्री राम' बोलने के लिए मजबूर किया गया था, जिसकी वजह से घटना ने सांप्रदायिक मोड़ ले लिया।

ओडिशा के DM ने बिगाड़ा सोनू सूद का खेल: जिसके लिए बेड अरेंज करने का लूटा श्रेय, वो होम आइसोलेशन में

मदद के लिए अभिनेता सोनू सूद को किया गया ट्वीट तब से गायब है। सोनू सूद वास्तव में किसी की मदद किए बिना भी कोविड-19 रोगियों के लिए मदद की व्यवस्था करने के लिए क्रेडिट का झूठा दावा कर रहे थे।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,384FansLike
95,935FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe