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‘#@ला सत्यनारायण भगवान का नाम भी नहीं सुने थे, ब्राह्मण ह₹!मी आकर माँगते हैं पैसा’: पूर्व CM जीतन राम माँझी का वीडियो वायरल

माँझी ने आगे कहा, "इतना भी शर्म-लाज नहीं लगता हमलोगों का कि पंडित 'ह₹मी' आते हैं और कहते हैं कि हम खाना नहीं खाएँगे, हमें नकद दक्षि

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी ने सत्यनारायण कथा को भला-बुरा कहते हुए ब्राह्मणों के लिए गालियों का प्रयोग किया है। बता दें कि ‘हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM)’ के संस्थापक जीतन राम माँझी की पार्टी बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राज्य सरकार में साझीदार है। माँझी के बेटे संतोष सुमन बिहार सरकार में सिंचाई के साथ-साथ SC-ST कल्याण विभाग में मंत्री हैं। बिहार में उनकी पार्टी के 4 विधायक हैं, जिसमें खुद माँझी ने इमामगंज से जीत दर्ज की थी।

अब उनका वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है, जिस पर लोग कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसमें वो कहते हैं, “1956 में मरने से पहले बाबा आंबेडकर मरने से पहले हिन्दू धर्म में नहीं थे। वो बौद्ध धर्म में गए, फिर उनकी मृत्यु हुई। उन्होंने कहा था कि हिन्दू धर्म कई खराब धर्म है। माफ़ कीजिएगा, आजकल हमारे गरीब तबके में भी धर्म की परायणता ज्यादा आ रही है। सत्यनारायण पूजा का नाम हमलोग नहीं जानते थे, लेकिन आजकल ‘%%ला’ हमारे टोले में हर जगह सत्यनारायण भगवान की पूजा होती है।”

माँझी ने आगे कहा, “इतना भी शर्म-लाज नहीं लगता हमलोगों का कि पंडित ‘ह₹!मी’ आते हैं और कहते हैं कि हम खाना नहीं खाएँगे, हमें नकद दक्षिणा ही दे दीजिए।” उन्होंने एक कार्यक्रम में सार्वजनिक मंच से इस तरह की भाषा का प्रयोग किया। जबकि वहाँ मौजूद लोग उनके इस भाषण पर आपत्ति जताने की बजाए तालियाँ बजाते रहे। जीतन राम माँझी की पार्टी बिहार में सत्ताधारी राजग गठबंधन का हिस्सा है। हाल ही में शराबबंदी को लेकर भी उन्होंने कहा था कि दलित समाज को इसका दंश झेलना पड़ रहा, जबकि 60% बड़े लोग रात में शराब पीते हैं।

HAM पार्टी भी अब डैमेज कंट्रोल में जुट गई है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दानिश रिजवान का कहना है कि माँझी के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जीतन राम माँझी का वो मतलब नहीं था, बल्कि वो तो ये कहना चाह रहे थे कि ब्राह्मण दलित के घर में जाते हैं और उनके यहाँ खाना नहीं खाते, लेकिन पैसे लेते हैं। भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक मिथिलेश तिवारी ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि माँझी सठिया गए हैं।

उन्होंने HAM सुप्रीमो से इस बयान को लेकर तत्काल सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगने की माँग करते हुए कहा कि ऐसा न होने पर ब्राह्मण समाज आगे आंदोलन करेगा और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी इस बयान को दुखद बताते हुए कहा कि ये भारतीय संविधान के मूल से बिलकुल अलग है और किसी समाज को इस तरह से आहत करना गलत है। इससे पहले माँझी श्रीराम को काल्पनिक और वाल्मीकि को उनसे ‘कई गुना बड़ा संत’ बता चुके हैं।

हालाँकि, बयान पर विवाद और वीडियो वायरल होने के बाद जीतन राम माँझी ने माफ़ी माँगते हुए कहा है कि उन्होंने उस शब्द का प्रयोग अपने समाज के लिए किया था, ब्राह्मणों के लिए नहीं। बिहार के सड़क एवं परिवहन मंत्री और भाजपा नेता नितिन नबीन सिन्हा ने माँझी को वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि वो ऐसे विवादित बयान न दें। राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि भाजपा-RSS की गोद में बैठ कर उनकी भाषा ऐसी हो गई है। ‘राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा, परशुराम सेवा संस्थान’ के प्रवक्ता रजनीश कुमार तिवारी ने इस बयान के खिलाफ कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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