Friday, May 7, 2021
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Exclusive: महाराष्ट्र में हजारों टन दाल बर्बाद, ठाकरे सरकार की बड़ी लापरवाही – केंद्र ने भेजा, रखे-रखे सड़ गया

कोरोना संकट में भी महाराष्ट्र सरकार की लापरवाही से पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत मिली हजारों टन दालें बर्बाद हो गईं, जिन्हें जरूरतमंदों की मदद में इस्तेमाल किया जा सकता था।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा शासित महाराष्ट्र कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा त्रस्त है। महामारी की शुरुआत से अब तक राज्य में संक्रमितों की संख्या 3 मिलियन पर पहुँच गई है। कोविड की पहली लहर के बाद दूसरी लहर में भी देश में सबसे अधिक संक्रमित महाराष्ट्र से हैं। ऐसे हालात में केंद्र और राज्य को मिलकर काम करने की जरूरत थी, ताकि मुश्किल वक्त में जनता की मदद की जा सके। लेकिन, उद्धव सरकार ऐसा करने में असफल रही है।

इसकी पोल खोलते हुए मुलुंड के विधायक मिहिर कोटेचा ने एक वीडियो शेयर किया है। इसमें यह दिखाया गया है कि राज्य की खराब नीतियों के कारण चना दाल और अन्य दालों की भारी बर्बादी हो रही है। जिन दालों की आपूर्ति केंद्र ने की थी, अब उसमें कीड़े पड़ गए हैं। बता दें कि छगन भुजबल महाराष्ट्र सरकार में खाद्य और नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामलों के कैबिनेट मंत्री हैं।

कोटेचा वीडियो में कहते हैं कि अगस्त-सितंबर से दालें गोदामों में पड़ी हुई हैं, जो खराब हो गई हैं। उनके मुताबिक, अक्टूबर में ही एक दुकान में 1,800 किलो दाल खराब हो चुकी थी। दूसरी जगहों पर 3,00,000 किलो चना दाल खराब हुई है। विधायक ने कहा कि पिछले तीन महीने से महाराष्ट्र सरकार, खासकर छगन भुजबल इतने व्यस्त हैं कि जवाब नहीं दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार की गलत नीतियों के कारण अब तक 180 करोड़ रुपए की दाल बर्बाद हो गई है।

ऑपइंडिया को भारत सरकार का एक नोट मिला है, जिसमें दिखाया गया है कि महाराष्ट्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत दी गई दालों के बचे होने की जानकारी केंद्र सरकार को देने में देरी की। जबकि, दूसरे राज्यों में दालों को बर्बादी से बचाने के लिए केंद्र ने इजाजत दे दी थी।

नोट में यह विस्तार से बताया गया है कि दालों के वितरण की शुरुआत में ही उपभोक्ता मामलों के विभाग ने राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के साथ विभिन्न वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दालों को बर्बादी से बचाने के लिए अग्रलिखित निर्देश दिए थे। 22 जुलाई 2020 को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में यह निर्णय लिया गया था कि PMGKAY-1 के तहत बचे हुए दालों/चना को राज्यों को आत्मनिर्भर भारत योजना बढ़ावा देने के लिए PMGKAY-2 के तहत वितरित किया जाना चाहिए।

2 सितंबर 2020 को आयोजित संयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंस में यह निर्णय लिया गया था कि जो भी खाद्यान्न/दालें बाँटे जाने के बाद बची रहेंगी, उन्हें बाद में PMGKAY-2 के तहत उसका आवंटन या उसे उठाया जाएगा। 22 सितंबर को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में एक बार फिर से राज्यों को बताया गया था कि वो आवंटन के अनुसार NAFED को इसकी जानकारी दें ताकि अन्न की बर्बादी से बचा जा सके।

नोट के अनुसार, 26 नवंबर 2020 को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को जानकारी दी थी कि उसके पास PMGKAY-1 के तहत 910 MT और आत्मनिर्भर भारत के तहत 804 MT खाद्यान्न बचा हुआ था। इसलिए केंद्र सरकार को PMGKAY-2 के तहत दालों को एडजस्ट करना चाहिए। इतना ही नहीं PMGKAY-2 के तहत दालों के आवंटन के लिए महाराष्ट्र सरकार ने विशेष अनुरोध में भी देरी की थी। महाराष्ट्र ने प्रसंस्कृत चना दाल वितरित करने का अनुरोध किया था। इस कारण आवंटन में थोड़ा विलंब हुआ।

PMGKAY-2 के तहत दालों के आवंटन के बाद राज्यों को 18 दिसंबर 2020 को जानकारी दी गई थी कि वे केंद्र को वितरण और राज्य के पास बचे हुए दालों की ऑडिट रिपोर्ट दें। बार-बार कहने के बाद दूसरे राज्यों ने ऑडिट रिपोर्ट भेजने के बाद बची हुई दालों के उपयोग की अनुमति भी माँग ली थी।

यहाँ वो लिस्ट है, जिसमें राज्यों ने बचे हुए दालों के उपयोग के लिए अनुरोध किया था।

केंद्र सरकार द्वारा जारी नोट का एक भाग

केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों को बची हुई दालों के उपयोग के लिए अपनी मंजूरी दे दी थी, लेकिन महाराष्ट्र इसमें पीछे रह गया। केंद्र ने 18 दिसंबर 2020 को राज्यों को सूचित कर उनसे ऑडिट रिपोर्ट माँगा था। इस दौरान दूसरे राज्य मार्च 2021 तक की बची दालों की ऑडिट रिपोर्ट देने के बाद उसके इस्तेमाल का अनुरोध भी कर लिया था। केवल महाराष्ट्र ने ही इसमें देरी की।

दिसंबर में माँगी ऑडिट रिपोर्ट अप्रैल में दिया जवाब

भारत सरकार के नोट के मुताबिक, महाराष्ट्र ने 6 अप्रैल 2021 को केंद्र सरकार को पत्र लिखा था, जिसमें यह बताया गया था कि 6441.922 मीट्रिक टन दाल/चना PMGKAY I-II और आत्मनिर्भर भारत के तहत पूरा बचा हुआ है। उद्धव सरकार का ये पत्र 8 अप्रैल केंद्र को मिला। 13 अप्रैल को केंद्र सरकार ने इसका अनुमोदन कर दिया, जिसके बाद 15 अप्रैल 2021 को महाराष्ट्र सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया भेजी। केंद्र की अनुमति के मुताबिक महाराष्ट्र को सूचित किया गया था कि वह 6441.922 मीट्रिक टन बची हुई दालों का उपयोग कर सकता है।

इस मामले में अहम बात यह है कि केंद्र ने 18 दिसंबर 2020 को महाराष्ट्र को बचे हुए दालों की जानकारी देने को कहा था, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने 6 अप्रैल 2021 तक केंद्र सरकार को बची दालों की जानकारी देने में समय लिया। वीडियो में यह बात स्पष्ट हो गई है जिन दालों का उपयोग जरूरमंदों की मदद के लिए किया जा सकता था, वो हजारों मीट्रिक टन दालें बर्बाद हो गईं।

महाराष्ट्र सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि महामारी के समय में भी हजारों टन दालें क्यों बर्बाद हो गईं। आखिर महाराष्ट्र सरकार ने बची दालों की जानकारी देने के लिए दिसंबर से अप्रैल तक का समय क्यों लिया?

इस लेख के मूल इंग्लिश स्वरूप को आप यहाँ पढ़ सकते हैं।

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Nupur J Sharma
Editor, OpIndia.com since October 2017

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