पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर में शनिवार (30 मई 2026) को तृणमूल कॉन्ग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी पर नाराज स्थानीय लोगों ने अंडे फेंके और उनका विरोध किया। ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी, जिन्होंने चुनाव परिणाम आने से पहले BJP कार्यकर्ताओं को चुनाव बाद हिंसा की धमकी दी थी, लोगों द्वारा फेंके जा रहे अंडों से बचने के लिए हेलमेट पहने हुए दिखाई दिए।
सड़क पर नाटकीय विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक ड्रामे के जरिए अपना राजनीतिक करियर बनाने वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कोलकाता के बेल व्यू अस्पताल में हंगामा खड़ा कर दिया, जब अस्पताल ने अभिषेक बनर्जी को भर्ती करने से इनकार कर दिया।
दरअसल डॉक्टरों ने साफ कर दिया था कि उन्हें किसी तरह की गंभीर शारीरिक चोट नहीं लगी है। डॉक्टरों ने बताया कि TMC नेता पूरी तरह होश में थे, उनकी स्थिति सामान्य थी और उनकी छाती पर केवल मामूली चोट के निशान थे।
There is no serious physical sign of injury except for bruises on the chest. Patient is talking and is full conscious and oriented. Hence, the patient does no require any admission: Belle Vue Hospital https://t.co/TVD35kEFoa
— ANI (@ANI) May 30, 2026
ममता बनर्जी और TMC ने इस घटना को भुनाने की कोशिश करते हुए पहले नाराज स्थानीय लोगों को ‘भाजपा समर्थित उपद्रवी’ बताया और दावा किया कि शासक ही हत्यारे बन गए हैं।
RULERS BECAME KILLERS- shame on you BJP https://t.co/DHNsnDAc9a
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) May 30, 2026
इसके बाद TMC सुप्रीमो ने यह विवादित दावा किया कि अगर अभिषेक बनर्जी ने हेलमेट नहीं पहना होता तो अंडे लगने से उनकी मौत भी हो सकती थी। उन्होंने कहा, “एक स्थानीय व्यक्ति ने उन्हें हेलमेट दिया था, नहीं तो वह मौके पर ही मर जाते।”
"Abhishek Banerjee would have been spot dead": Mamata Banerjee pic.twitter.com/OS95EWehUy
— The Edge News (@TheEdgeNewsIN) May 30, 2026
उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में भाजपा सरकार ने एक निजी अस्पताल को उनके भतीजे को भर्ती करने की अनुमति नहीं दी, जबकि उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं लगी थी।
जानिए 2021 के चुनाव के बाद हिंसा पर ममता बनर्जी ने क्या दिया था बयान
जहाँ ममता बनर्जी अपने भ्रष्ट भतीजे के खिलाफ जनता के गुस्से के इस मामले को एक ‘बड़ी घटना’ के रूप में पेश करने में व्यस्त हैं, वहीं TMC सुप्रीमो ने 2021 में बंगाल में हुई चुनाव बाद हिंसा को ‘छोटो छोटो घटना’ यानी छोटी-मोटी घटनाएँ बताकर खारिज कर दिया था।
जो लोग इस मामले से परिचित नहीं हैं, उन्हें बता दें कि 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद एक दर्जन से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई थी, महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएँ हुई थीं और हजारों लोगों को TMC के गुंडों के डर से पलायन करना पड़ा था, लेकिन प्रतिद्वंद्वी दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ हुई ये हिंसा और अत्याचार ममता बनर्जी को मामूली लगे थे।
उन्होंने सुझाव दिया था कि ये केवल छोटी-मोटी घटनाएँ थीं, जो चुनाव के बाद हर जगह होती रहती हैं। अप्रैल 2023 में उन्होंने कहा था, “कोयेकटा छोटो छोटो घटना घोटे छिलो इलेक्शनर पर, सामान्यो घोटे थाके सोब जाइगाइ (चुनाव के बाद कुछ छोटी-मोटी घटनाएँ हुई थीं। ऐसी घटनाएँ हर जगह होती रहती हैं)।”
उन्होंने यह भी दुख जताया था कि केंद्र सरकार ने राज्य में कई तथ्य-जाँच समितियाँ भेजीं, जिसके कारण कथित तौर पर TMC के कई कार्यकर्ताओं को झूठे मामलों में गिरफ्तार किया गया। ममता बनर्जी ने जवाबदेही स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा था, “अगर बंगाल में कुछ होता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार जिम्मेदार है।”
उन्होंने आगे कहा था, “चुनाव के बाद कुछ छोटी-छोटी घटनाएँ हुई थीं, लेकिन केंद्र ने दिल्ली से सारी टीमें भेज दीं। उन्होंने CBI, ED और आयोगों जैसी एजेंसियों के जरिए हमारे लड़के-लड़कियों को गिरफ्तार कर लिया।”
2021 में ममता बनर्जी ने चुनाव बाद TMC समर्थकों द्वारा की गई हिंसा को भाजपा और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) द्वारा कथित अत्याचार का बदला बताते हुए उसका बचाव करने की कोशिश की थी।
उन्होंने कहा था, “बंगाल एक शांतिप्रिय जगह है। चुनाव के दौरान थोड़ी गर्मी, धूल और तनाव रहा। भाजपा ने बहुत अत्याचार किया, CAPF ने भी।” यह बयान उन्होंने राज्य में शांति बनाए रखने की औपचारिक अपील करते हुए दिया था।
(मूल रुप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)


