ऑपइंडिया EXCLUSIVE इंटरव्यू: मध्यम वर्ग को ₹90,000 करोड़ का सीधा लाभ; UP में 72 लेंगे – गोयल

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा चुनावों के आलोक में, कार्यवाहक वित्त मंत्री के रूप में बजट के ज़रिए मध्यम वर्ग को 'लुभाने' की बात से लेकर, भारतीय रेल में आए (और आने वाले) सुधारों, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और दक्षिण भारत में भाजपा की बेहतरी सहित कई मुद्दों पर बातचीत की।

(मंत्री पीयूष गोयल के साथ यह साक्षात्कार पुलवामा आतंकी हमले से पहले लिया गया था। उस हमले में वीरगति को प्राप्त हुए हमारे देश के जवानों के सम्मानस्वरूप हमने इस साक्षात्कार को देर से प्रकाशित किया।)

लोकसभा चुनाव आने वाले हैं और इसके साथ ही देश में राजनीतिक सरगर्मी भी परवान चढ़ रही है। हाल ही में पेश हुए अंतरिम बजट में सरकार द्वारा कई बड़ी घोषणाएँ की गई, ख़ासकर मध्यम वर्ग के लिए। चूँकि उस दौरान अरुण जेटली अस्वस्थ थे, पीयूष गोयल ने ही बजट पेश किया। हमने गोयल से मुलाकात कर आगामी चुनाव में भाजपा की रणनीति से लेकर देश की अर्थव्यवस्था और रेलवे सेक्टर के बारे में चर्चा किया। नीचे पढ़िए हमारे सवाल और उनके जवाब।

अंतरिम बजट में सरकार का ध्यान मध्यम वर्ग पर केंद्रित था। क्या यह शुरुआत से ही योजनाबद्ध था या फिर पार्टी ने मध्यम वर्ग के बीच पल रहे असंतोष को भाँपने के बाद यह निर्णय लिया था?

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(गोयल ने इस बात को नकार दिया कि अंतरिम बजट में मध्यम वर्ग और आयकरदाताओं को दिए गए बड़े लाभ के पीछे वो मीडिया रिपोर्ट्स थे जिनमे कहा गया था कि मध्यम वर्ग भाजपा से असंतुष्ट है।) उन्होंने कहा:

”हमने पिछले 4 वर्षों में इस पर काफ़ी कार्य किया था। मैंने सरकार द्वारा पिछले बजटों में उठाए गए क़दमों को सूचीबद्ध किया है, यह इस श्रृंखला में सिर्फ़ एक अगला क़दम है। सामूहिक रूप से, हमने पहले ही पिछले 4 वर्षों में मध्यम वर्ग को ₹80-90 हजार करोड़ का लाभ दिया है और इस वर्ष ₹25 हजार करोड़ का, इसलिए हमने बस एक निरंतरता बनाए रखी है।”

“अगर इन सभी चीजों को एक साथ रखा जाए तो पता चलता है कि आयकर सम्बन्धी लाभ 6, 7, 8 लाख रुपए तक की आय वाले लोगों की मदद करते हैं और कभी-कभी 9 लाख रुपए की सालाना आमदनी वाले लोग भी लगभग कर मुक्त हो जाते हैं।”

(गोयल ने नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान मुद्रास्फीति की कम दरों पर भी टिप्पणी की जो मध्यम वर्ग को सबसे अधिक लाभ पहुँचाती है) उन्होंने कहा:

“यह अभी 2% है। इससे पहले कभी भी मुद्रास्फीति 5 साल लगातार निचले स्तर पर नहीं रही है। आप भारत के इतिहास में किसी भी 5 साल में देखें, हमारे पास कभी भी ऐसा समय नहीं था जहाँ हमने 5 साल लगातार कम मुद्रास्फीति देखी हो। हमें यह 9-10% पर विरासत में मिला। यूपीए शासन के दौरान तो एक समय पर यह 12% से भी अधिक हो गया था। हम इसे 2% तक ले कर आए हैं। मुझे लगता है कि यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।”

मध्यम वर्ग को मुद्रास्फीति, कर और भ्रष्टाचार की चिंता है। राहुल गाँधी भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि उनके आरोपों में दम है?

“भारत के लोग जानते हैं कि उनके लिए क्या अच्छा है।” उन्हें नरेंद्र मोदी पर भरोसा है। अब, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ, कैग रिपोर्ट सामने आई है, फ्रांसीसी सरकार और भारत सरकार ने मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया है। मुझे लगता है कि मुद्दा सुलझा लिया गया है और किसी भी तरह की छेड़छाड़ का कोई असर नहीं पड़ेगा।

भारत के लोग जानते हैं कि उनके लिए क्या अच्छा है। उन्हें नरेंद्र मोदी पर भरोसा है। अब, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के साथ, कैग रिपोर्ट सामने आई है। फ्रांसीसी सरकार और भारत सरकार ने मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया है। मुझे लगता है कि मुद्दा सुलझा लिया गया है और इस से किसी भी तरह की छेड़छाड़ का कोई असर नहीं पड़ेगा।”

भाजपा के सत्ता में आने के बाद से बाजार में नौकरियों की कमी के बारे में बहुत सारी बातें हुई हैं। आपके अनुसार जॉब क्रिएशन असली मुद्दा है या इस मामले में डेटा की कमी असली मुद्दा है?

हमें नौकरियों पर डेटा एकत्र करने के लिए बेहतर उपायों की आवश्यकता है। पूरी दुनिया में नौकरियों की प्रकृति बदल रही है। ऐसे कई क्षेत्र हैं जहाँ नौकरियों की गिनती नहीं की जा रही है क्योंकि हमारे डेटा संग्रह का तरीका अभी भी पुराने समय पर आधारित है।

जॉब क्रिएशन (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष) पर एक समेकित डेटाबेस क्यों नहीं जारी किया जा रहा है?

अब नौकरियों की प्रकृति बदल रही हैं और इसी आधार पर समेकित सूची को संकलित किया जा रहा है। जल्द ही आधिकारिक डेटा जारी किया जाएगा।

भाजपा सरकार पर पर आरोप लगाए गए हैं पहले 4 वर्षों के दौरान भ्रष्टाचार के मामलों पर कार्रवाई करने में सरकार धीमी थी और पिछले कुछ महीनों में ही इसमें गति आई है (क्रिस्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण और अन्य भ्रष्टाचार आरोपितों पर कार्रवाई के साथ)?

ऐसे लोगों को प्रत्यर्पित करने के हमारे प्रयास सबसे सुसंगत रहे हैं। हमने कभी भी गति को धीमा नहीं किया है। ये सभी कार्य एक तय प्रक्रिया के बाद ही पूरे होते हैं। आप इसे रात भर नहीं कर सकते। ऐसी प्रक्रियाएँ अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर आधारित होतीं हैं और मुझे इस बात की खुशी है कि हमारी सरकार एक ऐसी सरकार रही है जो इस तरह के भगोड़ों पर कार्रवाई करने और उन्हें वापस लाने के लिए सतत प्रयासरत रही है।

मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा के अंतिम सत्र के दौरान प्रधान मंत्री मोदी का समर्थन किया। आपको क्या लगता है कि कौन-सी चीजें बदल गईं? क्या आपको लगता है कि उनका बयान ज़मीनी हक़ीक़त या हृदय परिवर्तन पर आधारित है?

मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश के लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के पक्ष में अपना मन बना लिया है। वर्षों से उन्होंने एक निर्णायक सरकार को इस तरह से कानून व्यवस्था स्थापित करते हुए नहीं देखा। उत्तर प्रदेश के एक बड़े हिस्से को वर्षों से सुविधाओं की कमी के कारण नुक़सान उठाना पड़ा है। हमने उन्हें वो सुविधाएँ प्रदान करने का कार्य किया है। कई पीढ़ियों से उत्तर प्रदेश में लोग जिस तरह की परिस्थिति में जीने को विवश थे, वो अब बदल गई है।

मेरा मानना ​​है कि कैराना चुनाव के नतीजों से बेहतर कोई उदाहरण नहीं हो सकता है। वो भी तब, जबकि वह राष्ट्रीय चुनाव भी नहीं था। पूरा विपक्ष एकजुट था। कैराना भाजपा का पारम्परिक गढ़ भी नहीं रहा है। इन सबके बावजूद हमने 46% से अधिक वोट हासिल किए। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। मुझे लगता है कि भाजपा के पक्ष में पूरी लहर है। हमारी कोशिश है कि हम 2014 में 1 सीट अधिक जीतें, कम नहीं।

क्या सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की टिप्पणी (जिसमें उन्होंने नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री के रूप में देखने की इच्छा व्यक्त की) उनका व्यक्तिगत विचार था? या फिर वह ज़मीनी हक़ीक़त का संकेत था?

मेरी राय में ये दोनों ही बातें सही है। यह जमीनी हक़ीक़त तो है ही और साथ ही यह एक अच्छी सरकार है जिसने ग़रीबों के कल्याण के लिए काम किया है। इसके अलावा, उनकी पारंपरिक सोच रही है कि हमें देश में एक अच्छी सरकार की जरूरत है।

तमिलनाडु के लिए क्या योजनाएँ हैं? आपको पार्टी ने वहाँ लोकसभा चुनाव प्रभारी बना कर भेजा है?

भाजपा विभिन्न दलों के साथ बातचीत कर रही है। दलों ने कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन किया है, उनका पूरी तरह से सफ़ाया हो गया है। अभिनेता रजनीकांत एक “अच्छे दोस्त” हैं और हम उनसे भी मिलने की कोशिश करेंगे।

मोदी सरकार को विरासत में एक जर्जर रेल व्यवस्था मिली। आपने रेलवे सेक्टर को कैसे चमकाया?

अतीत में झाँकने पर आपको पता चलेगा कि मोदी सरकार के सत्ता संभालने के वक़्त फण्ड की कमी थी। किसी भी कार्यक्रम के बारे में सोचने या उसकी रूप-रेखा तैयार करने से पहले हमें सबसे जिस के बारे में सोचना था, वह थी- धन की कमी। मानसिकता कुछ इस प्रकार की बन गई थी- ‘हमारे पास फण्ड नहीं है। इसीलिए, हम अधिक कुछ नहीं कर सकते।’

लेकिन, आज मानसिकता बदल गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने सुनिश्चित किया है कि रेलवे को पर्याप्त धनराशि मिले। हम आधुनिक तकनीकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हमने स्वच्छता के स्तर में क्रांति ला दी है। रेलवे स्टेशन पहले से ज्यादा साफ-सुथरे हैं। अब, हम पूरे यात्री अनुभव को और अधिक सुखद बनाने के लिए ट्रेनों के नवीनीकरण की कोशिश कर रहे हैं।

पहले, समय-पालन (Punctuality) के आँकड़े सटीक नहीं थे। काग़ज़ों पर समय-निष्ठा हमेशा से अच्छी थी। लेकिन, लोगों ने हमेशा रेलवे की समय-निष्ठा के बारे में शिकायत की है। जब इस से जुड़े एक मूल कारण का विश्लेषण किया गया था, तो महसूस किया गया कि समय-निष्ठा (Punctuality) स्टेशन मास्टर्स के रिपोर्टों पर आधारित थी, जो ग़लत थे। अब, देश भर की सभी इंटर-जंक्शंस पर डेटा लॉगर्स को रखा गया है। जिस दिन नई प्रणाली चालू की गई, समय-निष्ठा (Punctuality) 20% तक गिर गई। इसलिए, जब तक डेटा अधिक मजबूत नहीं होता है और वास्तविक स्थिति का बयान नहीं करता है, तब तक समस्या का समाधान कभी नहीं हो सकता है।

एंजेल टैक्स को लेकर काफ़ी विवाद रहा है। जबकि सरकार ने जोर देकर कहा है कि कोई जबरदस्त कार्रवाई नहीं होगी, मोदी सरकार के ‘स्टैंड अप, स्टार्टअप’ पर विचार करते हुए इस प्रावधान को पूरी तरह से वापस लेने की माँग की गई है। इसके बारे में आपका क्या कहना है?

सबसे पहले आपको बता दें कि एंजेल टैक्स जैसी कोई चीज है ही नहीं। यह समस्या इसलिए शुरू हुई क्योंकि पहले कई लोगों के पास शेल कम्पनियाँ हुआ करती थीं। ये शेल कम्पनियाँ एक बड़े प्रीमियम पर शेयर जारी करती थीं और उस पद्धति का उपयोग करके धन को लूटती थीं। इसलिए, प्रतिबंध लाना पड़ा। जैसा कि आप जानते हैं, हमने लगभग 300,000 कंपनियों को हटा दिया है और इस तरह की हेराफेरी में लिप्त लोगों पर कार्रवाई भी की गई है।

अब, जब तक कि किसी कंपनी के पास कुछ अस्पष्ट मूल्यांकन या मूल्य नहीं है और शेयर अत्यधिक प्रीमियम पर जारी किए जाते हैं, यह इसके पीछे की मंशा पर संदेह पैदा करता है। अब अगर किसी कम्पनी द्वारा शेयर अत्यधिक प्रीमियम पर जारी किए जाते हैं, तो वह संदेह के घेरे में आ जाती है। अब, ईमानदार करदाताओं और वास्तविक उद्यम पूंजीपतियों को अलग करने ज़रूरत है।

वर्तमान में जो टैक्स लगाया जा रहा है, वह उन ऑपरेशन्स पर है, जहाँ भारी प्रीमियम पर शेयर जारी करके मनी लॉन्ड्रिंग की जा रही है। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि इसके परिणामस्वरूप ईमानदार स्टार्ट-अप और पूँजीपति पीड़ित न हों। मुझे पूरा विश्वास है कि हम जल्द ही इस मुद्दे को हल कर पाएँगे और कोई भी ईमानदार व्यक्ति पीड़ित नहीं होगा। यदि आवश्यक हो, तो 2019 में जीत कर आने के बाद हम उन उपायों को लागू करेंगे जो इस मुद्दे को हल करने के लिए आवश्यक हैं।

(ये साक्षात्कार नुपुर शर्मा और राहुल रौशन के द्वारा किया गया।)


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