Thursday, April 18, 2024
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बस नाम में शीत, गरमी भरपूर: संसद के इस सत्र में पश्मीना शॉल के अलावा और क्या-क्या होगा, सब कुछ एक साथ

यदि संसद को चलने दिया गया तो हम बढ़िया शीतकालीन सत्र देख सकते हैं।

सर्दी का मौसम अन्य चीजों के अलावा संसद का शीतकालीन सत्र भी लेकर आता है। सेमिनार, टीवी के पैनल डिस्कशन और सामाजिक जमावड़े में अच्छी-अच्छी बातें करके बोर हो गए सांसदों के लिए शीतकालीन सत्र कुछ कठोर बोल बोलने के मौके लेकर आता है। साथ ही कुछ सांसदों को मौका मिलता है संसद की कार्रवाई में बाधा डालते हुए अपने पराक्रम दिखाने का। कुछ संसद सदस्य कड़ी मेहनत के नए-नए तरीके निकालते हैं ताकि संसद की कार्रवाई में बाधा उत्पन्न कर लोकतंत्र की रक्षा की जा सके। लोकसभा अध्यक्ष को भी सदन की कार्रवाई को चलाते रहने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और कई बार वे सफल भी होते हैं। इसके अलावा शीतकालीन सत्र अच्छे कपड़े और सुन्दर पश्मीना शॉल की नई डिजाइनों की नुमाइश का भी कारण बनता है।

इस वर्ष शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से आरंभ होकर 23 दिसंबर तक चलेगा। संसद के हर सत्र से पहले ‘सत्र के हंगामेदार होने की उम्मीद की जा रही है’ जैसी भविष्यवाणी पिछले लगभग ढाई दशकों में भारतीय राजनीति के विशेषज्ञों और मीडिया का सबसे बासी क्लीशे है। ऐसे में आगामी शीतकालीन सत्र कैसा रहेगा?

क्रिप्टोकरेंसी के नियमन पर बिल

जहाँ तक सरकार की बात है, सरकार इस सत्र में देश में क्रिप्टोकरेंसी के नियमन के लिए बिल पेश करने की घोषणा कर चुकी है। द क्रिप्टोकरेंसी एंड रेगुलेशन ऑफ ऑफिसियल डिजिटल करेंसी एक्ट 2021 के रूप में सरकार संसद में बिल पेश करेगी। बिल का उद्देश्य भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रस्तावित आधिकारिक डिजिटल करेंसी के चलन से संबंधी नियम बनाना और अन्य क्रिप्टोकरेंसी के चलन, उनमें निवेश या ट्रेडिंग पर बैन लगाना या उन्हें रेगुलेट करना होगा।

सरकार द्वारा प्रस्तावित इस बिल का स्वागत होना चाहिए। लंबे समय से देश में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश और ट्रेडिंग पर सरकार के आधिकारिक दृष्टिकोण को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। ऐसे में आवश्यक था कि सरकार जल्द ही कोई कानून लाकर इस विषय पर अपना पक्ष स्पष्ट करें। एक अनुमान के अनुसार भारत में क्रिप्टोकरेंसी में 1.5 करोड़ से लेकर 2 करोड़ तक निवेशक हैं और उनके 40 हजार करोड़ रुपए तक लगे हुए हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण यह है कि पिछले डेढ़ वर्षों से अधिक समय तक कोरोना महामारी से परेशान अर्थव्यवस्था जब पटरी आ रही है तब उसे कोई नया धक्का न लगे।

कृषि कानूनों की वापसी और पॉवर सेक्टर

क्रिप्टोकरेंसी पर प्रस्तावित बिल के पेश किए जाने के अलावा सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए आवश्यक संसदीय कार्रवाई सरकार के एजेंडा पर है। कृषि कानूनों को रद्द करने की प्रक्रिया में सरकार और विपक्ष के बीच गरमागरम बहस होने की उम्मीद है। कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की प्रक्रिया सरकार को भी यह मौका देगी कि वह अपना पक्ष देश के सामने रखे।

इसके अलावा सरकार द्वारा इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2021 पेश किए जाने की उम्मीद है। जानकारों के अनुसार यह बिल पॉवर सेक्टर में अभी तक किया गया सबसे बड़ा सुधार होगा। यह बिल में ऊर्जा वितरण में सुधार के अलावा निजी कंपनियों और सरकारी कंपनियों के बीच न केवल कम्पटीशन को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि बिजली के आम ग्राहकों को यह सुविधा भी देगा कि वे जिस कंपनी से चाहें उससे बिजली खरीद सकेंगे।

कोरोना वैक्सीनेशन की सफलता

इसके अलावा सत्र में सरकार कोरोना महामारी से लड़ने में अपनी सफलता को पेश करने का मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहेगी। कोरोना से बचाव के लिए टीकाकरण सरकार की बड़ी उपलब्धियों में से एक रहा है। ऐसे में सौ करोड़ से अधिक टीके के डोज की उपलब्धि को सरकार संसद में पेश करना चाहेगी, क्योंकि संसद में होने वाली बहस के दौरान दिया गया भाषण एक तरह से देश के साथ सीधे संवाद का मौका देता है।

संसदीय कार्रवाई के दौरान दिए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पहले भी यह साबित करते रहे हैं कि पिछले कई वर्षों में वे सरकार की ओर से सबसे प्रभावी वक्ता साबित हुए हैं और वे संसदीय मंच को इस बार भी देश से सीधे संवाद के लिए इस्तेमाल करेंगे। उनके समर्थक भी यह चाहेंगे कि वे कृषि कानूनों को रद्द किए जाने के फैसले और टीकाकरण तथा महामारी से लड़ने की सरकार की उपलब्धि पर न केवल अपना पक्ष रखें, बल्कि इस प्रक्रिया में विपक्ष की ऐसी-तैसी कर दें।

विपक्ष से क्या रखें उम्मीद?

विपक्ष से इस सत्र में क्या उम्मीद है? विपक्ष से विरोध की उम्मीद है। विपक्षी दलों में से एक भारतीय किसान यूनियन ने संसद की ओर ट्रैक्टर मार्च का ऐलान पहले ही कर रखा है। इसके अलावा शीतकालीन सत्र के आरंभ से पहले सरकार की विपक्षी दलों के साथ प्रस्तावित बैठक में प्रधानमंत्री मोदी चाहें जो कहें या विपक्ष चाहे जो माने, सत्र के दौरान विपक्ष विरोध ही करेगा और चाहेगा कि सामूहिक प्रयास करके किसी न किसी बहाने संसद की कार्यवाही रोकी जाए। ऐसा बढ़ती महँगाई को आगे रख कर किया जाए, पेगासस के मामले में सर्वोंच्च न्यायालय के फैसले को लेकर किया जाए या फिर कृषि कानूनों को रद्द किए जाने को लेकर, विपक्ष का प्रयास रहेगा कि वह लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर संसद का यह सत्र भी चलने न दे। लखीमपुर खीरी में जो कुछ हुआ उसे लेकर गृह राज्य मंत्री के इस्तीफे की माँग कर विपक्ष शीतकालीन सत्र को न चलने देने की पूरी कोशिश करेगा।

बीएसएफ और सहकारिता

सामूहिक प्रयासों के अलावा तृणमूल कॉन्ग्रेस केंद्र सरकार द्वारा बीएसएफ को दिए गए नए अधिकारों को लेकर हंगामा कर सकती है। इसके अतिरिक्त पार्टी द्वारा त्रिपुरा की घटनाओं को आगे रखकर भी संसद में भरपूर विरोध करने के आसार हैं। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद जो कुछ हुआ उसे पीछे फेंक कर पार्टी देश को बताना चाहेगी कि भाजपा की राज्य सरकार ने त्रिपुरा में लोकतंत्र की हत्या कर दी। महाविकास अगाड़ी में शामिल दल केंद्र सरकार द्वारा गठित सहकारिता मंत्रालय का विरोध करते हुए बरामद हो सकते हैं। शरद पवार की पार्टी यह जरूर बताना चाहेगी कि कैसे ऐसा मंत्रालय गठित करने का अधिकार केवल राज्य सरकारों का है और केंद्र सरकार ऐसा नहीं कर सकती। ऐसा करते हुए वे महाराष्ट्र से संबंधित बाकी मुद्दों को पीछे फेंकने की कोशिश करेंगे क्योंकि उनके पूर्व मंत्रियों और पुलिस अफसरों की भूमिका पर चर्चा होने का भय रहेगा।

राहुल गाँधी का ‘राजनीतिक दर्शन’

जहाँ तक सांसदों की बात है, लोग देखना चाहेंगे कि विदेश में लंबी छुट्टियाँ बिताने के बाद लौटे फ्रेश राहुल गाँधी संसद में कौन सा नया राजनीतिक दर्शन प्रस्तुत करते हैं? डॉक्टर शशि थरूर से आशा रहेगी कि वे अंग्रेजी के कुछ ऐसे शब्द और मुहावरे प्रस्तुत करें जो पहले न सुने गए हों। डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी से आशा रहेगी कि वे ममता बनर्जी को वर्तमान भारतीय राजनीति का सर्वश्रेष्ठ लीडर बताएँ और साथ ही उन्हें सबसे ईमानदार, लोकतंत्र की रक्षा में सदा तत्पर और जनता की समझ रखने वाली सर्वश्रेष्ठ नेत्री बताएँगे। इसके एवज़ में हम डेरेक ओ’ ब्रायन द्वारा डॉक्टर स्वामी को धन्यवाद देते हुए देख सकते हैं। कई लोगों को रामदास अठावले से उनकी नई कविता प्रस्तुत करने की उम्मीद रहेगी। हो सकता है कोई भाजपा सांसद इलाहबाद उच्च न्यायलय द्वारा समान नागरिक संहिता को लेकर केंद्र सरकार को दी गई सलाह की चर्चा करते हुए सलमान खुर्शीद द्वारा हिंदुत्व को बोको हराम और ISIS जैसा बताने की चर्चा भी करे। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यदि संसद को चलने दिया गया तो हम बढ़िया शीतकालीन सत्र देख सकते हैं।

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