Saturday, June 15, 2024
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कैप्टन अमरिंदर की पाकिस्तानी दोस्त अरूसा आलम के ISI लिंक की होगी जाँच: बीजेपी से जुड़ने की खबरों के बीच चन्नी सरकार का ऐलान

“कैप्टन पिछले साढ़े चार साल से पाकिस्तान से ड्रोन आने के मुद्दे पर तंज कस रहे हैं। इसलिए कैप्टन (साहब) ने पहले इस मुद्दे को उठाया और बाद में पंजाब में बीएसएफ को तैनात किया गया। इसलिए यह एक बड़ी साजिश लगती है जिसकी जाँच की जरूरत है।”

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा कॉन्ग्रेस से किनारा करने और उसके साथ उनकी तीखी सियासी नोकझोंक के बाद अब पंजाब के गृह मंत्री सुखजिंदर रंधावा ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की पाकिस्तानी दोस्त अरूसा आलम की पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंधों की जाँच की माँग की है। यह सब तब सामने आया है जब हाल ही में कैप्टेन के नई पार्टी बनाने और बीजेपी से जुड़ने की खबरें मीडिया में आई हैं।

रंधावा ने एक साक्षात्कार में एनडीटीवी को बताया, “चूँकि कैप्टन का दावा है कि पंजाब को आईएसआई से खतरा है, इसलिए हम उनकी दोस्त अरूसा आलम के आईएसआई के साथ संबंधों की जाँच करेंगे।” आलम एक रक्षा पत्रकार हैं और उन्हें व्यापक रूप से कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी दोस्त माना जाता है।

रंधावा ने कहा कि उन्होंने पंजाब पुलिस प्रमुख से आलम के पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों और आईएसआई के साथ संबंधों के आरोपों की जाँच करने को कहा है। रंधावा ने आगे कहा,
“कैप्टन पिछले साढ़े चार साल से पाकिस्तान से ड्रोन आने के मुद्दे पर तंज कस रहे हैं। इसलिए कैप्टन (साहब) ने पहले इस मुद्दे को उठाया और बाद में पंजाब में बीएसएफ को तैनात किया गया। इसलिए यह एक बड़ी साजिश लगती है जिसकी जाँच की जरूरत है।”

इसके साथ ही रंधावा ने अमरिंदर सिंह पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने जनवरी 2017 के मौर बम विस्फोट मामले की जाँच को रोक दिया था। उन्होंने उस जाँच को फिर से शुरू करने का वादा किया। उन्होंने कहा, “हम मामले की फिर से जाँच का आदेश देने के लिए तैयार हैं और निश्चित रूप से दोषियों को जेल भेजेंगे।”

गौरतलब है कि 2017 में हुआ वह धमाका कॉन्ग्रेस नेता हरमिंदर सिंह जस्सी की एक चुनावी सभा स्थल के पास हुआ था। घटना में दो जाँच के आदेश दिए गए थे, जिसमें डेरा सच्चा सौदा की संलिप्तता की ओर इशारा किया गया था। जस्सी की बेटी की शादी डेरा प्रमुख के बेटे से हुई है।

सिंह के खिलाफ वह हमला एक दिन बाद हुआ जब उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन करने की अपनी योजनाओं के बीच कॉन्ग्रेस पार्टी के दोहरेपन के लिए उसकी आलोचना की। सिंह ने यह कहते हुए कॉन्ग्रेस की खिंचाई की थी कि महाराष्ट्र में शिवसेना से हाथ मिलाने और नवजोत सिंह सिद्धू समेत कई भाजपा नेताओं को पार्टी में शामिल करने के बाद अब उसके पास धर्मनिरपेक्षता पर दूसरों को उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।

कैप्टन ने यह टिप्पणी कॉन्ग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत के उस बयान के जबाव में दिया था, जिसमें उन्होंने अमरिंदर सिंह की की घोषणा को ‘चौंकाने वाला’ कहा था और कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने ‘अपने भीतर के धर्मनिरपेक्ष अमरिंदर को मार डाला’। फिर भी सिंह की पाकिस्तानी दोस्त के आईएसआई के साथ संबंधों की जाँच का आदेश देने का आह्वान पूर्व कॉन्ग्रेस नेता पर अब तक का सबसे तीखा हमला है।

कौन हैं अरूसा आलम?

अरूसा आलम पेशे से पाकिस्तानी रक्षा मामलों की पूर्व पत्रकार हैं और पाकिस्तानी सेना के तंत्र में अच्छी पकड़ रखती हैं। अरूसा, अकलीन अख्तर की बेटी हैं जो कि जनरल रानी के नाम से मशहूर हैं। एक ऐसी प्रभावशाली शख्सियत जिन्हें पाकिस्तानी मीडिया, पाकिस्तानी नेता याहया खान (yahya khan) की ‘लवर और सोर्स ऑफ़ इंस्पिरेशन’ (muse and mistress) कहता था। जनरल रानी के लिए ऐसा माना जाता था कि याहया खान के पीछे सारी अभिप्रेरणा उनकी ही है। इसी क्रम में वह जनरल तक जाने का रास्ता बनीं और और पाकिस्तानी सेना के तंत्र में उनकी अहमियत को नई ऊँचाइयाँ मिली। अरूसा आलम को यह बना बनाया नेटवर्क अपनी माँ से विरासत में मिला।

अरूसा आलम को अगस्ता 90 बी सबमरीन (Agosta-90B submarine) समझौते से सम्बन्धित खोजी पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। इस रिपोर्ट की वजह से ही पाकिस्तानी नौसेना के मुखिया मनसुरुल हक़ को 1997 में गिरफ्तार किया गया था। साउथ एशिया फ्री मीडिया एसोसिएशन (SAFMA) में शामिल होने के बाद इनकी प्रसिद्धि और बढ़ी, इस संस्था का मूल काम भारत और पाकिस्तानी पत्रकारों के बीच रिश्ते सुधारना था। कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरह अरूसा आलम भी शादीशुदा थीं, उनके दो बेटे थे और उनके पति व्यक्तित्व के लिहाज़ से निष्क्रिय थे इसलिए लोगों को याद भी नहीं हैं। अरूसा के मन में भारत को लेकर अलग ही रोमांच था, उनका भारत आना-जाना लगा रहता था और इस दौरान यहाँ के लोगों से भी मिलती थीं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह की महिला मित्र अरूसा आलम

अरूसा आलम की कैप्टन अमरिंदर सिंह से पहली मुलाक़ात उनके पाकिस्तान के दौरे पर हुई थी। दोनों को 2007 से एक दूसरे से जोड़ा जाने लगा था जब वह कई बार साथ नज़र आए थे। हालाँकि, पाकिस्तानी पत्रकार ने तत्काल प्रभाव से स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था वह ‘सिर्फ दोस्त’ हैं। बाद में उन्होंने इस भाव को दूर करने का प्रयास किया और तब से वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ अपने रिश्तों को लेकर काफी स्पष्ट हैं।

पंजाब में अरूसा आलम को पटियाला के पूर्व महाराजा कैप्टन अमरिंदर सिंह की बेहद ख़ास और करीबी दोस्त माना जाता है। चंडीगढ़ में बतौर मेहमान उनकी स्वीकार्यता उल्लेखनीय है, वह शहर के उच्च वर्ग के साथ योग और कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रति अपने लगाव के बहाने काफी समय बिताती हैं।

आलम 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए एक प्रमुख चेहरा थीं। उन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए प्रचार करते हुए भी देखा गया था। कैप्टन अमरिंदर सिंह के शपथ ग्रहण समारोह में वीवीआईपी के तौर पर वह उपस्थित थीं। हालाँकि, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री आलम के साथ अपने संबंधों के बारे में अभी भी चुप्पी साधे हुए हैं। हालाँकि, आलम ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को संबोधित करते हुए महाराज साहब के साथ अपने संबंधों पर भी बात की थी।

आलम फरवरी 2020 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की जीवनी ‘द पीपल्स महाराजा’ के विमोचन के मौके पर भी मौजूद थीं। ध्यान देने वाली बात यह है कि किताब में अरूसा के साथ सिंह के संबंधों पर एक समर्पित अध्याय है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उनकी दोस्ती खूबसूरत है और उन्हें इस पर गर्व है। कैप्टन अमरिंदर सिंह से रिश्तों की वजह से पैदा होने वाले अवरोध के बारे में अरूसा आलम की जानकारी बहुत कम है। फरवरी 2018 में चंडीगढ़ में उन्होंने कहा था, “मेरा रिश्ता मेरे घर पर भी एक संवेदनशील मसला है। मैं एक मुस्लिम महिला हूँ और आप जानते हैं कि हमारे घर पर लोग कैसे सोचते हैं।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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