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फुटपाथ पर सब्जी बेचने वाले पिता को मंच पर देख फूट-फूट कर रो पड़े BJP उम्मीदवार विजय राजभर

....जब उन्हें भाजपा उम्मीदवार बनाने की ख़बर आई थी, तभी उनके पिता ख़ुशी से झूम उठे थे। राजभर ने संगठन में भी ख़ूब काम किया है। वह मऊ में भाजपा के नगर अध्यक्ष रहे हैं।

आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए जिन सीटों पर मतदान होना है, उनमें एक उत्तर प्रदेश का घोसी भी शामिल है। यहाँ से भाजपा ने विजय राजभर को टिकट दिया है। उनके बारे में ख़ास बात यह है कि उन्होंने काफ़ी संघर्ष कर के यहाँ तक का सफर तय किया है और बहुत नीचे से ऊपर उठे हैं। विजय राजभर के पिता फुटपाथ पर सब्जी की दुकान लगाते हैं। राजभर ने सोमवार (सितम्बर 30, 2019) को भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में मऊ जिला कलेक्ट्रेट में नामांकन दाखिल किया। नामांकन के बाद भाजपा की एक सभा भी हुई।

इस सभा में विजय राजभर अपने सब्जी बेचने वाले पिता से गले मिल फूट-फूट कर रोने लगे। इस दृश्य को देख कर वहाँ मौजूद लोगों की आँखें भर आईं। जब उन्हें भाजपा उम्मीदवार बनाने की ख़बर आई थी, तभी उनके पिता ख़ुशी से झूम उठे थे। राजभर ने संगठन में भी ख़ूब काम किया है। वह मऊ में भाजपा के नगर अध्यक्ष रहे हैं। नगरपालिका के चुनाव में उन्होंने सहादतपुर से वार्ड सदस्य के रूप में जीत दर्ज की थी। उनके पिता नंदलाल राजभर फुटपाथ पर दुकान लगाते हैं और यही परिवार के पालन-पोषण का जरिया भी है।

नन्दलाल ने अपने बेटे को विधानसभा उम्मीदवारी देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। भाजपा की सभा में मंत्री अनिल राजभर ने सब्जी बेचने वाले नन्दलाल राजभर को पूरे सम्मान के साथ मंच पर बिठाया। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा दीनदयाल उपाध्याय की विचारधारा के अनुरूप काम कर रही है और विजय जैसे छोटे कार्यकर्ताओं को टिकट देना भाजपा को सबसे अलग बनाता है। पार्टी के तमाम स्थानीय वरिष्ठ नेता विजय राजभर के लिए प्रचार अभियान में जुट गए हैं।

21 अक्टूबर को 17 राज्यों की 51 विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होना है। मतगणना के लिए 24 अक्टूबर की तारीख मुक़र्रर की गई है। अगर घोसी सीट की बात करें तो यह भाजपा के लिए इसीलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से भाजपा के वरिष्ठ नेता फागू चौहान जीतते रहे हैं। उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाने जाने के बाद यह सीट खाली हुई, जिस पर उपचुनाव होना है। फागू चौहान ने पहली बार ये सीट 1985 में जीती थी। इसके बाद उन्होंने जीत की हैट्रिक लगाते हुए 1996, 2002 और 2007 में जीत दर्ज की। अंतिम बार वह 2017 में जीते थे।

हालाँकि, फागू चौहान ने पहली बार यह सीट लोक दल के टिकट पर जीती थी, वहीं 2007 में उन्होंने बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। उसके बाद वह पुनः भाजपा में लौट आए। कयास लगाए जा रहे थे कि इस सीट से फागू चौहान के बेटे को टिकट दिया जाएगा लेकिन भाजपा आलाकमान ने तमाम अनुमानों को ग़लत ठहराते हुए विजय राजभर को टिकट दिया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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