Tuesday, July 23, 2024
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मंत्री और विधायकी ठुकराने के बाद राजीव बनर्जी का TMC से भी इस्तीफा, BJP में जाने की अटकलें

कहा जा रहा है कि राजीब बनर्जी भी ममता बनर्जी की कार्यशैली और पार्टी के कामों में उनके भतीजे की बढ़ती दखलंदाजी से नाखुश थे। ममता कैबिनेट को छोड़ने वाले राजीब तीसरे मंत्री थे। उनसे पहले शुभेंदु अधिकारी और लक्ष्मी रतन शुक्ला ने इस्तीफा दिया था।

पश्चिम बंगाल के पूर्व कैबिनेट मंत्री राजीव बनर्जी ने शुक्रवार (29 जनवरी, 2021) को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के कुछ ही घंटे बाद तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी (टीएमसी) से भी त्यागपत्र दे दिया। राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी छोड़ने वाले टीएमसी नेताओं की सूची में अब वह भी शामिल हो गए है। बनर्जी के जल्द ही बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही है।

टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संबोधित इस्तीफे का पत्र लिखते हुए राजीब ने कहा,”मैं अखिल भारतीय तृणमूल कॉन्ग्रेस की सदस्यता के साथ-साथ इससे जुड़े सभी पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देता हूँ।” टीएमसी के साथ दो दशक पुराना नाता तोड़ने वाले पूर्व वन मंत्री बनर्जी ने कहा, “मैं उन सभी चुनौतियों और अवसरों के लिए आभारी हूँ, जो मुझे दिए गए हैं और मैं हमेशा पार्टी के सदस्य के तौर पर बिताए अपने समय को याद रखूँगा।”

राजीव बनर्जी ने पत्र की एक कॉपी अखिल भारतीय तृणमूल कॉन्ग्रेस (AITMC) पार्टी के अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को भी भेजी। बता दें, पार्टी छोड़ने से पहले उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था। बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर विधायक के रूप में अपना इस्तीफा सौंप दिया था।

गौरतलब है कि टीएमसी सदस्य के रूप में राजीव बनर्जी का इस्तीफा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलों के बीच आया है। आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अबतक कई दिग्गज और कद्दावर नेताओं ने तृणमूल कॉन्ग्रेस को छोड़, भाजपा का दामन थामा है।

अपने इस्तीफे की जानकारी फेसबुक पर देते हुए उन्होंने कहा, “आप सभी को यह सूचित करना है कि मैंने तत्काल प्रभाव से अखिल भारतीय तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्य के रूप में अपना इस्तीफा सौंप दिया है।” टीएमसी के साथ बिताए अपने पलों को याद करते हुए राजीब ने कहा, “अपने कार्यकाल के दौरान मैंने कुछ अच्छे लोगों और नेताओं के साथ काम किया है और कड़ी मेहनत और उत्साह के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश की है। मैं अपने सभी पूर्व सहयोगियों को आने वाले भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ। मुझे पश्चिम बंगाल की भलाई के लिए, काम करने का अवसर प्रदान करने के लिए मैं हमारे अध्यक्ष के प्रति हमेशा आभारी रहूँगा।”

बता दें कि 22 जनवरी, 2021 को वन मंत्री और डोमजूर (Domjur) से विधायक राजीब बनर्जी ने ममता कैबिनेट से इस्तीफा दिया था। उस दौरान राजीब बनर्जी ने इस्तीफे में लिखा था, “मुझे यह बताते हुए खेद है कि आज 22 जनवरी 2021 को मैंने कैबिनेट मंत्री के पद से अपने कार्यालय से अपना इस्तीफा दे रहा हूँ। पश्चिम बंगाल के लोगों की सेवा करना बहुत सम्मान और सौभाग्य की बात है। मैं इस अवसर को पाने के लिए दिल से आभार व्यक्त करता हूँ।”

कहा जा रहा है कि राजीब बनर्जी भी ममता बनर्जी की कार्यशैली और पार्टी के कामों में उनके भतीजे की बढ़ती दखलंदाजी से नाखुश थे। ममता कैबिनेट को छोड़ने वाले राजीब तीसरे मंत्री थे। उनसे पहले शुभेंदु अधिकारी और लक्ष्मी रतन शुक्ला ने इस्तीफा दिया था। नंदीग्राम में खासा प्रभाव रखने वाले शुभेंदु बीजेपी का दामन थाम चुके हैं, जबकि लक्ष्मी रतन पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली के करीबी माने जाते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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