Thursday, July 25, 2024
Homeराजनीतिक्रिकेटर यूसुफ पठान को TMC ने अधीर रंजन चौधरी के सामने उतारा, नहीं किया...

क्रिकेटर यूसुफ पठान को TMC ने अधीर रंजन चौधरी के सामने उतारा, नहीं किया बंगाल में कॉन्ग्रेस से गठबंधन: मुश्किल हुई कॉन्ग्रेसी नेता की राह

TMC के सभी उम्मीदवारों में सबसे अधिक चौंकाने वाला नाम क्रिकेटर यूसुफ पठान का ही है। उन्हें जिस बहरामपुर सीट से टिकट दिया गया है, उस सीट से अभी कॉन्ग्रेस के अधीर रंजन चौधरी सांसद हैं। वह लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता भी हैं।

तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आज (10 मार्च, 2024) लोकसभा चुनाव के लिए पश्चिम बंगाल के अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। TMC ने पश्चिम बंगाल की सभी 42 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषणा कर दी है। TMC ने क्रिकेटर यूसुफ पठान को बहरामपुर से टिकट दिया है।

TMC के सभी उम्मीदवारों में सबसे अधिक चौंकाने वाला नाम क्रिकेटर यूसुफ पठान का ही है। उन्हें जिस बहरामपुर सीट से टिकट दिया गया है, उस सीट से अभी कॉन्ग्रेस के अधीर रंजन चौधरी सांसद हैं। वह लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता भी हैं। युसूफ पठान के उतरने के बाद चौधरी की राह मुश्किल हो गई है।

यूसुफ पठान का बंगाल से सीधा कोई नाता नहीं है, वह गुजरात के रहने वाले हैं। हालाँकि, TMC ने बहरामपुर सीट से उन पर दाँव खेला है। अधीर रंजन चौधरी इस सीट से 1999 से लगातार सांसद हैं। वह इस सीट से लगातार 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 का चुनाव जीत चुके हैं। अधीर रंजन चौधरी स्वयं बहरामपुर के ही रहने वाले हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले INDI गठबंधन के अंतर्गत कॉन्ग्रेस और TMC में बंगाल में सीट समझौते की बातें सामने आई थीं। हालाँकि, ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया था कि उनकी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ने वाली है। दूसरी तरफ अधीर रंजन चौधरी, जो कि बंगाल कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी हैं, ने भी TMC से गठबंधन को नकार दिया था।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चौधरी 2024 लोकसभा चुनाव भी इसी सीट से लड़ेंगे क्योंकि कॉन्ग्रेस ने बंगाल के लोकसभा उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है। लेकिन TMC से गठबंधन नहीं होने के बाद उनका यहाँ से प्रत्याशी बनना तय माना जा रहा है।

उनके प्रत्याशी बनने की राह में TMC से गठबंधन एक रोड़ा था क्योंकि कहा जा रहा था कि यदि दोनों पार्टियाँ मिल कर चुनाव लड़ती हैं तो उनकी बहरामपुर सीट TMC के खाते में जा सकती है। अब यह स्पष्ट हो गया है कि यहाँ TMC अपने उम्मीदवार यूसुफ पठान को लड़ाएगी।

चौधरी के लिए यह चुनाव जीतना अब काफी कठिन होगा क्योंकि एक तो यूसुफ पठान को एक प्रसिद्ध क्रिकेटर होने का फायदा मिलेगा और साथ ही यहाँ मुस्लिम आबादी भी बड़ी संख्या में है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सीट पर 52% मुस्लिम आबादी है, जिनके TMC के उम्मीदवार यूसुफ पठान के साथ जाने के कयास लग रहे हैं।

अधीर का ग्राफ भी चुनाव दर चुनाव गिरा है। 2009 लोकसभा चुनाव में जहाँ वह कुल वोटों का 56% वोट पाए थे वहीं 2014 में यह घट कर लगभग 50% रह गया। 2019 में इसमें और भी गिरावट आई और यह 45% के आसपास आ गया। उनसे हारने वाले TMC के उम्मीदवार अपूर्ब सरकार को 39% वोट मिले थे। यानी अधीर और अपूर्ब के बीच मात्र 6% का अंतर था।

2019 के चुनाव में भाजपा ने भी यहाँ 11% वोट हासिल किए थे। भाजपा यहाँ अधीर के वोटबैंक में सेंध लगा सकती है। भाजपा ने इस बार यहाँ से निर्मल कुमार साहा को उम्मीदवार बनाया है। अगर भाजपा अधीर के वोटबैंक में सेंध लगाने में सफल होती है और चुनाव त्रिकोणीय हो जाता है तो अधीर को समस्या हो सकती है।

TMC की सूची में महुआ मोइत्रा का नाम भी शामिल है। वह कृष्णानगर से चुनाव लड़ेंगी। उन्हें दिसम्बर 2023 में लोकसभा की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया था। उन पर पैसे और गिफ्ट लेकर प्रश्न पूछने का आरोप सिद्ध हुआ था। इसके अलावा शत्रुघन सिन्हा को पार्टी ने आसनसोल से उम्मीदवार बनाया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘तुमलोग वापस भारत भागो’: कनाडा में अब सांसद को ही धमकी दे रहा खालिस्तानी पन्नू, हिन्दू मंदिर पर हमले का विरोध करने पर भड़का

आर्य ने कहा है कि हमारे कनाडाई चार्टर ऑफ राइट्स में दी गई स्वतंत्रता का गलत इस्तेमाल करते हुए खालिस्तानी कनाडा की धरती में जहर बोते हुए इसे गंदा कर रहे हैं।

मुजफ्फरनगर में नेम-प्लेट लगाने वाले आदेश के समर्थन में काँवड़िए, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बोले – ‘हमारा तो धर्म भ्रष्ट हो गया...

एक कावँड़िए ने कहा कि अगर नेम-प्लेट होता तो कम से कम ये तो साफ हो जाता कि जो भोजन वो कर रहे हैं, वो शाका हारी है या माँसाहारी।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -