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असम के बाद अब यूपी के मदरसों की बारी, योगी सरकार ने सर्वे के दिए आदेश: फंडिंग, मौलवी, सिलेबस से लेकर बच्चों को मिल रही सुविधाओं तक की होगी जाँच

किस जिले में कितने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे हैं और उनमें कितने छात्र तालीम ले रहे हैं, इसकी जानकारी भी प्राप्त होगी।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने आदेश दिया है कि राज्य के सभी मदरसों का सर्वे किया जाए और उनकी रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी जाए। यूपी सरकार राज्य की शिक्षा व्यवस्था के कायाकल्प की दिशा में प्रयास कर रही है। मदरसों के सर्वे को लेकर सभी जिलों के डीएम को आदेश दिया गया है। इसके लिए 5 अक्टूबर, 2022 तक की समयसीमा भी तय की गई है। उन मदरसों का सर्वे होगा, जो गैर-मान्यता प्राप्त हैं।

इस सम्बन्ध में एक बैठक भी हुई थी। उसमें स्पष्ट कर दिया गया कि सर्वे में SDM, BSA (बेसिक शिक्षा अधिकारी) और जिला अल्पसंख्यक अधिकारी मौजूद रहेंगे। ये रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसे वो आगे सरकार को बढ़ाएँगे। दरअसल, इसका उद्देश्य मदरसों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक बनाना है। किस जिले में कितने गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे हैं और उनमें कितने छात्र तालीम ले रहे हैं, इसकी जानकारी भी प्राप्त होगी।

इन मदरसों में जिनका संचालन ठीक से हो रहा होगा, उन्हें मान्यता के दायरे में भी लाया जाएगा। किन मदरसों को कहाँ से फंडिंग मिल रही है, इसकी भी जाँच की जाएगी। ‘उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड’ से उन मदरसों को मान्यता दिलाई जाएगी, जो इसके योग्य होंगे। इतना ही नहीं, सरकार को ये जानकारी भी हासिल करनी है कि इन मदरसों में पढ़ा रहे शिक्षक कौन हैं और वो क्या पढ़ा रहे हैं। मदरसों का सिलेबस क्या है, रिपोर्ट में ये भी जुटाया जाएगा।

‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCRCP)’ के मानकों के अनुरूप ये काम किया जा रहा है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी ने कहा कि बच्चों के मूल अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए ये आवश्यक है। पीने का पानी और फर्नीचर से लेकर बिजली सप्लाई और शौचालय की उचित व्यवस्था बच्चों के लिए आवश्यक हैं। इन मदरसों में जाँचा जाएगा कि ये मिल रहा है या नहीं। मदरसों का संचालन कौन सी संस्थाएँ कर रही हैं, इस पर भी सरकार की नजर होगी।

कई ऐसे मदरसे हैं जो NGO द्वारा संचालित हो रहे हैं, इसीलिए इन मदरसों की आय की स्रोत का पता लगाना ज़रूरी है। फ़िलहाल उत्तर प्रदेश में 16,461 मदरसे संचालित हो रहे हैं। इनमें से 560 मदरसे सरकारी अनुदान से चल रहे हैं। पिछले 6 वर्षों से इस सूची में कोई नया मदरसा नहीं जुड़ा है। मदरसों में काम करने वाली महिलाओं को भी गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद छुट्टी देने का निदेश दिया गया है। बता दें कि असम में हाल ही में 3 मदरसों को आतंकी कनेक्शन के कारण ध्वस्त किया गया है और कई गिरफ्तार हुए हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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