Friday, July 19, 2024
Homeराजनीति'मानसखण्ड मंदिर माला मिशन' के जरिए प्राचीन मंदिरों को आपस में जोड़ेंगे CM धामी,...

‘मानसखण्ड मंदिर माला मिशन’ के जरिए प्राचीन मंदिरों को आपस में जोड़ेंगे CM धामी, माँ वाराही देवी मंदिर में पूजा-अर्चना कर बगवाल में हुए शामिल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को चंपावत दौरे पर थे। सबसे पहले वे खटीमा में आजादी के अमृत महोत्सव पर 'हर घर तिरंगा' यात्रा में शामिल हुए। इसके बाद वे माँ वाराही के धाम देवीधुरा पहुँचे। वहाँ उन्होंने माँ वाराही के मंदिर में पूजा-अर्चना की और राज्य की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।

उत्तराखंड (UttaraKhand) के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) शुक्रवार (12 अगस्त 2022) को माँ वाराही के धाम देवीधुरा पहुँचे। वहाँ उन्होंने खोलीखांड दुबाचौड़ में बगवाल मनाई। इसके साथ ही सीएम धामी ने कुमाऊँ के प्राचीन मंदिरों को भव्य बनाने और उन्हें आपस में जोड़ने के लिये मानसखण्ड मंदिर माला मिशन की शुरुआत की।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “मुख्यमंत्री कुमाऊँ के प्राचीन मंदिरों को भव्य बनाने के लिये मानसखण्ड मंदिर माला मिशन की शुरुआत की गई है, इस मिशन के अन्तर्गत ही माँ वाराही धाम देवीधुरा को भी जोड़ा जाएगा।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को चंपावत दौरे पर थे। सबसे पहले वे खटीमा में आजादी के अमृत महोत्सव पर ‘हर घर तिरंगा’ यात्रा में शामिल हुए। इसके बाद वे माँ वाराही के धाम देवीधुरा पहुँचे। वहाँ उन्होंने माँ वाराही के मंदिर में पूजा-अर्चना की और राज्य की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।

इस दौरान उन्होंने देवीधुरा में पुलिस चौकी बनाने की भी घोषणा की। बता दें कि देवीधुरा के खोलीखांड दुबाचौड़ में बगवाल मनाई जा रही है। खोलीखांड दुबाचौड़ मैदान में बगवाल फल और फूलों से खेली जाती है। इस दौरान गहड़वाल खाम के योद्धा केसरिया, चम्याल खाम के योद्धा गुलाबी, वालिग खाम के सफेद और लमगड़िया खाम के योद्धा पीले रंग के साफे बाँधकर बगवाल में शामिल हुए।

क्या है बगवाल

चार प्रमुख खाम- चम्याल, वालिग, गहड़वाल और लमगड़िया के लोग पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना कर एक-दूसरे को बगवाल का निमंत्रण देते हैं। कहा जाता है कि पूर्व में यहाँ माँ वाराही को नरबलि देने की प्रथा थी। किवदंतियों के अनुसार, एक बार नरबलि देने की बारी चम्याल खाम की आई। जिस लड़के की बलि दी जानी थी, वह एक वृद्धा का इकलौता पौत्र था। वंश के नाश होने के डर से वृद्ध महिला ने माँ वाराही की घनघोर तपस्या की।

कहा जाता है कि तपस्या से प्रसन्न होकर माँ वाराही ने वृद्धा से उसकी मनोकामना पूछी। इस पर वृद्धा ने नरबलि लेने की जगह एक सलाह दिया। इसके तहत चारों खामों के मुखिया आपस में युद्ध कर एक मानव बलि के बराबर रक्त बहाएँगे और उसी से पूजा करेंगे। माँ वाराही ने वृद्धा की बात स्वीकार कर ली। तभी से बगवाल की शुरू हुई है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जहाँ सब हैं भोले के भक्त, बोल बम की सेवा जहाँ सबका धर्म… वहाँ अस्पृश्यता की राजनीति मत ठूँसिए नकवी साब!

मुख्तार अब्बास नकवी ने लिखा कि आस्था का सम्मान होना ही चाहिए,पर अस्पृश्यता का संरक्षण नहीं होना चाहिए।

अजमेर दरगाह के सामने ‘सर तन से जुदा’ मामले की जाँच में लापरवाही! कई खामियाँ आईं सामने: कॉन्ग्रेस सरकार ने कराई थी जाँच, खादिम...

सर तन से जुदा नारे लगाने के मामले में अजमेर दरगाह के खादिम गौहर चिश्ती की जाँच में लापरवाही को लेकर कोर्ट ने इंगित किया है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -